हिंदी का मारा हुआ

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय के सूल’।


हिंदी के महान रचनाकार और आधुनिक हिंदी के पिता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का यह कथन हिन्दी भाषा के संदर्भ में वर्षों पहले लिखी गई थी। ऐसा लिखने के पीछे उनकी दूरदर्शिता थी जो आज सच साबित हो रही है। आज हिंदी अपने ही देश में उपेक्षित है। अंग्रेजी के प्रति लोगों का पागलपन हास्यास्पद है। आखिर हम कब अपनी मातृभाषा को सम्मान देंगे।

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हिंदी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में से एक है। इसे भारत की पहचान के तौर पर भी देखा जाता है। भारत में 22 भाषाएं और उनकी 72,507 लिपियाँ हैं। एक देश में इतनी सारी भाषाओं और विविधताओं के बीच हिंदी वह भाषा है जो हिंदुस्तान को जोड़ती है। भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। सभी राज्यों में बसे जनमानस को हिंदी के महत्व से जागरूक करने और इसके प्रचार-प्रसार के लिए भारत हिंदी दिवस मनाया जाता है। विदेशों में बसे भारतीयों को हिंदी भाषा एक दूसरे से जोड़ने का काम करती है।
हिंदी दिवस साल में दो बार मनाया जाता है। पहला जनवरी माह में और दूसरा सितंबर में। जनवरी महीने में मनाया जाने वाला हिंदी दिवस वैश्विक स्तर पर होता है। 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है जिसकी नींव आजादी के समय ही रखी गई। 14 सितंबर 1946 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा माना। देश की पहली सरकार ने आधिकारिक तौर पर 14 सितंबर 1953 को हिंदी दिवस मनाया।
हिंदी राष्ट्र को जोड़ने का काम करती है। महात्मा गांधी जैसी कई महान विभूतियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने का समर्थन किया है।
हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी भाषा का उपयोग होता है। हिंदी दिवस के मौके पर कई तरह के कार्यक्रम और सेमिनार का आयोजन होता है, जहां हिंदी के महत्व पर वाद-विवाद होता है। साथ ही हिंदी के प्रति लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इस दिन बहुत से कार्यक्रम होते हैं। इस दिन हिंदी से जुड़े लोगों को पुरस्कृत भी किया जाता है।

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