
करो पढ़ाई बनो कलक्टर, रौशन कर लो नाम
घूस चूस कर खूब कमाओ, भाड़ में गया ईमान
कबीरा सारा रा रा रा ।

माई बिक रही दादा बिक रहे, बिक रहे गांव समाज
नीयत बिक रही भाव बिक रहे, बेशर्म हुआ इंसान
कबीरा सारा रा रा रा ।
धन दौलत पर नारी बिक रही, पैसा बना भगवान
धन की खातिर भाई लड़ रहे, बाप हैं सब परेशान
कबीरा सारा रा रा रा ।

चापलूस दलालों के चंगुल में, तड़प रहा समाज
मेहनत कर्मठ निष्ठाओं का, कहीं नहीं सम्मान
कबीरा सारा रा रा रा ।


