दोस्तों, बीरबल अकबर के नौरत्नों में से एक थे जो अपने बहुमूल्य सलाह के लिए जाने जाते थे। उनकी विनोदप्रियता और चतुराई के किस्से देश के कोने कोने में प्रसिद्द थे। खुद अकबर भी उसके प्रसंशक थे। लोकप्रियता में बीरबल का कोई सानी नहीं था।
एक बार अकबर ने अपनी बेगम को तोहफे में बहुमूल्य हार दिया। रानी बहुत खुश हुईं। अकबर ने बेगम को बताया कि उसने इस हार को खास कारीगरों से बनवाया है। रानी ने कहा कि वह इसे हमेशा अपने पास रखेंगी। अकबर को बहुत खुशी हुई। अगले दिन सुबह रानी सोकर उठने के बाद जब नहा कर तैयार होती हैं तो उन्हें हार नही मिलता है। हार के चोरी होने की बात जब अकबर को पता चलती है तो वह गुस्से से तमतमा उठता है। लेकिन रानी को दुखी देखकर अकबर ने कहा कि बेगम आप दुखी ना हों। वो तो मामूली सा तोहफा था, हम आपके लिए और उससे भी अच्छा हार बनवा देंगे। इसके बाद अकबर सिपाहियों और दासियो को आदेश देता है कि वे रानी के कमरे के हर एक कोने में जाकर ढूंढो हार ढूंढें। सिपाही थोड़ी देर बाद आता है और कहता है कि जहाँपनाह हमने हर जगह हार ढूंढा लेकिन हार कहीं नही मिला। अकबर ने कहा मामला गम्भीर है और अब सिर्फ बीरबल ही इस मामले को सुलझा सकते हैं। उसने सिपाहियों से तत्काल बीरबल को बुलावा भेजा। बीरबल के आने पर अकबर ने उसे पूरी घटना बताते हुए कहा कि सच्चाई पता करो।

बीरबल ने कहा कि हुजूर एक बात तो पक्की है कि चोर सिपाहियों और दासियों में से ही है। इस बात का पता लगाने के लिये मुझे अपने एक दोस्त को बुला कर लाना पड़ेगा। बीरबल ने बताया कि उसका दोस्त कोई ऐसा-वैसा दोस्त नही है, उसके पास जादुई शक्तियां हैं, जो चोर को पकड़ने में मदद करेंगी। बीरबल ने अकबर से कहा कि आप बस रानी के कमरे में पहरा देने वाले सिपाही और दासियों को बुलवाइये, मैं अभी अपने दोस्त को लेकर आता हूँ। थोड़ी देर बाद बीरबल एक गधे को लेकर महल में आते हैं। यह देखकर अकबर बीरबल से पूछा। ये क्या मजाक है, हमने तो तुम्हे तुम्हारा दोस्त लाने को कहा था, ये तो गधा है।
बीरबल ने कहा हुजूर यही ह्मेरा दोस्त है जिसे जादुई शक्ति आती है और यही चोर पकड़ने में हमारी मदद करेगा। बीरबल एक तम्बू में गधे को खड़ा कर देते हैं। फिर बीरबल ने अकबर से कहा कि इस तम्बू के अंदर एक-एक करके सिपाही और दासियो को भेजिए और इन सबको गधे की पूंछ पकड़ कर ये बोलना है कि मैंने चोरी नही की। जब ये सारे लोग गधे की पूंछ पकड़ लेंगे, तभी मेरा दोस्त बताएगा चोर कौन है।
अकबर ने कहा ठीक है। उसने सिपाहियों और दासियो से वैसा ही करने को कहा जैसा बीरबल ने कहा था। और फिर सभी सिपाही और दासी गधे की पूंछ पकड़ते हैं। अंत में बीरबल ने कहा कि अब मैं अपने दोस्त से पूछ कर आता हूँ कि चोर कौन है। कुछ देर बाद बीरबल ने अकबर से कहा कि अब उसे उन सभी सिपाहियों और दासियों के हाथ सूंघने हैं। सभी के हाथ सूंघने के बाद, बीरबल ने एक सिपाही को पकड़कर कहा कि ये सिपाही चोर है। अकबर ने बीरबल से पूछा कि तुम कैसे कह सकते हो कि यही चोर है। तुम गधे की बात कैसे समझ सकते हो।
बीरबल ने कहा जहाँपनाह मैंने उस गधे की पूंछ पर एक खास इत्र लगा दिया था। इसलिए मैंने इन सभी से गधे की पूंछ पकड़ने को कहा और जहाँ पनाह मैं ये भी जानता था कि चोर पकड़े जाने के डर से गधे की पूंछ नही पकड़ेगा। उस इत्र की खुशबू सभी के हाथों में से आ रही थी। लेकिन जब मैंने इसके हाथ सूंघे, तो इसके हाथों में वह खुसबू नही आ रही थी। इसलिए यही चोर है। इस तरह बीरबल ने एक बार फिर अपनी चतुराई से अकबर को मंत्रमुग्ध कर दिया।