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बात बिगड़ जाती है।

Image Courtesy Twitter

मेरे पास

खामोशी के सिवा

कोई हल नही

मैं बात करता हूँ

तो बात बिगड़ जाती है…!

कुछ खामोशियां,

कुछ बेहिसियां,

और कुछ बदगुमानियां,

कोई भी मज़बूत ईमारत हो

रिश्तों की बुनियाद खा जाती हैं…!

लफ़्ज़ों की चापलूसी,

बाजार के ये रिश्ते

और स्वार्थ की ये दुनिया

सादगी ईमान के

इंसान को खा जाती है।

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मैं वक्त के हाथों में खिलौने की तरह था।

आज के ब्लॉग में मैंने ट्विटर से कुछ बेहतरीन प्रेरणादायक ट्विट्स लिए हैं। इन्हें पढ़कर मन को सुकून मिलता है। टूटे हुए दिल को हौंसला मिलता है। आशा करता हूं कि ये प्रयोग आपको अच्छा लगेगा। आप चाहें तो इन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्टेटस के रूप में भी लगा सकते हैं।

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मरना पड़ता है यहां नाम कमाने के लिए

जान दे सकता है क्या, साथ निभाने के लिए

हौसला है तो बढ़ा, हाथ मिलाने के लिए

मैंने दीवार पे ये क्या लिख दिया

बारिशें होने लगीं, मुझको मिटाने के लिए

फ़िल्म के पर्दे पे छपना कोई आसान नहीं

मरना पड़ता है यहां नाम कमाने के लिए ।

शकील आज़मी

दुख अपना अगर हमको

बताना नहीं आता

तुम को भी तो

अंदाज़ा लगाना नहीं आता –

वसीम बरेलवी………..

और कुछ दिन यहां, रुकने का बहाना मिलता

इस नए शहर में, कोई तो पुराना मिलता।

मुझको हंसने के लिए, दोस्त मयस्सर हैं बहोत

काश रोने के लिए भी कोई शाना मिलता।

मैं तो जो कुछ भी था जितना भी था, सब मिट्टी था

तुम मगर ढूंढते मुझमें, तो ख़ज़ाना मिलता।

शकील आज़मी………..

बात से बात की गहराई चली जाती है,

झूठ आ जाए तो सच्चाई चली जाती है।

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है,

जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है।

शकील आज़मी………..

बहा के ले गई जो मौज गहरे पानी में

पता चला कि उसी में मेरा किनारा था

जहां पे लोग मेरी जान लेना चाहते थे

उसी गली से गुज़रना मुझे दोबारा था।

Shakeel Azmi

The Blog

एक छोटी सी कविता from heart.

Social Apps के दौर में सब Porn लेकर आए थे,

हम बहुत खराब थे, जो Blog लेकर आए थे।

जीवन में पेलम पेला है

अब चारो ओर झमेला है,

क्या महाभारत की बेला है,

तिल तिल मरती मानवता,

जीवन में पेलम पेला है।

भीड़ भरी इस दुनिया में,

इंसान खड़ा अकेला है,

सुख चैन खोजने भाग रहा,

जिस ग्रह पर दुःख का मेला है।

विज्ञान भरी इस दुनिया में,

नैतिकता का कहां बसेरा है,

परेशान भगवान भी हैं,

इस जग का कहां सवेरा है।

सोच जरा हे नश्वर प्राणी,

क्या तेरा क्या मेरा है,

कुछ करना है तो, कर अच्छा,

यह जग माया का फेरा है।

हाहाकार अशांत है जग,

क्या चलाचली का बेला है

कुछ सूझ रहा नहीं मुझको

ये भी साला एक खेला है।

उसे गौर से देख कहीं खुदा ना हो

शायरी हमारे दर्द को कम करती है, साहस के साथ कठिनाईयों का मुकाबला करने की हिम्मत देती हैं। मन को सुकून देती हैं। आज के इस पोस्ट में मैं आपको ट्विटर से उधार लेकर कुछ बेहतरीन शायरी पेश कर रहा हूं।

बुरे वक्त में भी जो तुमसे जुदा न हो,

उसे गौर से देख कहीं खुदा न हो ।।

हमारे ज़ख़्म – ए – तमन्ना पुराने हो गए हैं

कि उस गली में गए अब ज़माने हो गए हैं।।

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ

क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ।।

कौन है जो हवाओ मे ज़हर घोल रहा है ,

जानते सब हैं लेकिन कोई बोल नहीं रहा है।।

बुरे वक्त ने सिखाया है बीतने से पहले

कई बार हारना पड़ता है जीतने से पहले !!

परिंदे घोंसलों से कह के ये बाहर निकल आए

हमें उड़ने दिया जाए हमारे पर निकल आए !!