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आखिर कब होगा विश्व युद्ध

पिछले तीन चार सालों से दुनिया में विश्व युद्ध को लेकर बड़ी उत्सुकता है। इसे लेकर तरह तरह के विचार सोशल मीडिया पर आते रहते हैं। लोग बड़ी उत्सुकता से इन खबरों को पढ़ते भी हैं। कभी कभी तो ऐसा लगता है कि जैसे कल ही शुरू हो जाएगा विश्व युद्ध। दुनिया में जब भी कोई बड़ी राजनैतिक हलचल होती है तो महासंग्राम की चर्चा तेज हो जाती है। लेकिन हर बार विश्व युद्ध की आहट शांति से गुजर जाती है।

मैं यह नहीं कह रहा कि विश्व युद्ध हो‌ क्योंकि इससे किसी को कोई लाभ नहीं होगा। इससे हानि ही हानि होगी। तबाही होगी, भुखमरी होगी, दुःख होंगे पीड़ा होगी। लेकिन किसी के चाहने या न चाहने से कुछ होता नहीं। जब जो होना होगा हो जाएगा। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विश्व युद्ध अवश्यंभावी है।

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मुझे लगता है युद्ध ही एकमात्र स्थाई समाधान रह गया है। विश्व के कुछ देश किसी भी कीमत पर अपनी जिद से पीछे नहीं हटने वाले और ऐसे ही राष्ट्रों की भूमिका प्रमुख होगी तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कराने में। यद्यपि वास्तविकता तो यह है कि विश्व युद्ध शुरू हो चुका है ‌लेकिन इसकी विधिवत घोषणा नहीं हुई है। आर्मेनिया अज़रबैजान हो या फिलिस्तीन और इजराइल या फिर कोरियाई संकट हर जगह विश्व युद्ध की एक चिंगारी जल रही है।

चीन की विस्तारवादी नीति और ताइवान पर उसकी नजर, यूरोप में इस्लाम के विरुद्ध पनपती भावनाएं, ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी, नेपाल में राजशाही को लेकर आंदोलन, हूती विद्रोहियों द्वारा मचा तांडव, इस्लामिक देशों की इजरायल के विरुद्ध एकजुटता आदि सभी घटनाएं अघोषित जारी विश्व युद्ध के ही कारण हैं। गुटबाजी तेज हो गई है तो कूटनीतिक चालें भी तेज हो गई है। हर कोई अपने अपने हित साधने के लिए दूसरे मुल्कों को अपने पाले में लाने की भरपूर कोशिश कर रहा है ताकि उसे पर्याप्त रणनीतिक लाभ सके।

लेकिन सवाल फिर वही है कि आखिर विधिवत रूप से यह कब शुरू होगा। कोई भी बड़ा देश इसे शुरू करने का संकट मोल लेने को तैयार नहीं दिख रहा लेकिन वे इससे अपने आप को बचा कर रख पाएंगे ऐसा भी नहीं प्रतीत होता। खैर हमें इंतजार रहेगा विश्व युद्ध का। क्योंकि हमें एक सुंदर और बेहतरीन दुनिया की तलाश है। खुदा हाफ़िज़।

बहुत जल्द आपस में भिड़ेंगे चीन, अमेरिका और रूस

क्या दुनिया में जारी तनावों के बीच परमाणु युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। एक अध्ययन में ऐसा खुलासा हुआ है। अध्ययन के अनुसार हालिया वर्षों में चीन, रूस और अमेरिका ने परमाणु परीक्षण स्थल पर नए संयंत्र बनाए हैं और सुरंगे खोदी हैं।

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अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन ने ऐसी सैटेलाइट तस्वीरें प्राप्त की है जिसमें संयंत्रों और सुरंगों को देखा जा सकता है। एक तस्वीर में रूस के आर्कटिक महासागर द्वीपसमूह, दूसरी में चीन के सबसे दूर पश्चिमी इलाके झिंजियांग, और तीसरी में अमेरिका के नेवादा रेगिस्तान की तस्वीर शामिल हैं। मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉन प्रोलिफरेशन स्टडीज के सहायक प्रोफेसर जेफरी लुईस ने सीएनएन को बताया कि पिछले कुछ सालों की सैटेलाइट तस्वीरों में पहाड़ों के नीचे नई सुरंगें, नई सड़कें और भंडारण सुविधाएं दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि वास्तव में ऐसे कई संकेत दिख रहे हैं जो इस बात का संकेत देते हैं कि अमेरिका, रूस, और चीन परमाणु परीक्षण की दोबारा शुरुआत कर सकते हैं।

चैनल के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना के सेवा निवृत्त कर्नल सेड्रिक लीटन ने तीनों शक्तियों के परमाणु संयंत्रों की तस्वीरों की समीक्षा की है। वे भी मानते भी हैं कि ये देश परमाणु परीक्षण कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत स्पष्ट है कि तीनों देशों, रूस, चीन और अमेरिका ने न केवल अपने परमाणु संयंत्रों के आधुनिकीकरण में बल्कि परीक्षण के लिए आवश्यक गतिविधियों को तैयार करने में भी बहुत समय, प्रयास और पैसों का निवेश किया है।