मरना पड़ता है यहां नाम कमाने के लिए

जान दे सकता है क्या, साथ निभाने के लिए

हौसला है तो बढ़ा, हाथ मिलाने के लिए

मैंने दीवार पे ये क्या लिख दिया

बारिशें होने लगीं, मुझको मिटाने के लिए

फ़िल्म के पर्दे पे छपना कोई आसान नहीं

मरना पड़ता है यहां नाम कमाने के लिए ।

शकील आज़मी

दुख अपना अगर हमको

बताना नहीं आता

तुम को भी तो

अंदाज़ा लगाना नहीं आता –

वसीम बरेलवी………..

और कुछ दिन यहां, रुकने का बहाना मिलता

इस नए शहर में, कोई तो पुराना मिलता।

मुझको हंसने के लिए, दोस्त मयस्सर हैं बहोत

काश रोने के लिए भी कोई शाना मिलता।

मैं तो जो कुछ भी था जितना भी था, सब मिट्टी था

तुम मगर ढूंढते मुझमें, तो ख़ज़ाना मिलता।

शकील आज़मी………..

बात से बात की गहराई चली जाती है,

झूठ आ जाए तो सच्चाई चली जाती है।

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है,

जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है।

शकील आज़मी………..

बहा के ले गई जो मौज गहरे पानी में

पता चला कि उसी में मेरा किनारा था

जहां पे लोग मेरी जान लेना चाहते थे

उसी गली से गुज़रना मुझे दोबारा था।

Shakeel Azmi

The Blog

एक छोटी सी कविता from heart.

Social Apps के दौर में सब Porn लेकर आए थे,

हम बहुत खराब थे, जो Blog लेकर आए थे।

कृष्ण जन्माष्टमी विशेष

आज कृष्ण जन्माष्टमी है। इस पवित्र अवसर पर एक छोटी सी कविता प्रस्तुत है। आशा करता हूं कि आपको पसंद आएगा। कृपया Like और Share करना ना भूलें। विनम्र निवेदन है कि ब्लॉग को Subscribe जरुर करें। धन्यवाद।

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हरि चर्चा आनन्द है

जग परिचर्चा व्यस्त

जो कृष्ण नाम का जाप करें

मन केवल उनका मस्त।

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जब रावण जग में आता है

तब धर्म नहीं बच पाता है

तब धीर वीर गंभीर रूप धर

एक राम जगत में आता है।

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अपने और पराए की

जब बात जगत में होती है

अनाचार और पाप मिटाने

श्री कृष्ण की लीला होती है।

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जब पापी की बढ़ती पीड़ा से

धरती रोज कराहेगी

फिर धर्म चक्र की रक्षा को

भगवान की शक्ति आएगी।

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अब कलयुग नाच रहा नंगा

है कौन यहां जो ले पंगा

अब धर्म बचाने हे गिरधर

जल्दी आओ लेकर डंडा।

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क्या गर्मी नष्ट कर देगी दुनिया को…..

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने दुनिया को चेताते हुए कहा है कि विश्व की जलवायु में विकार (गड़बड़ी) शुरू हो गया है। उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संस्थान की ओर से जारी रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि उत्तरी गोलार्ध में स्थित देशों में सबसे अधिक गर्म मौसम दर्ज किया गया। विश्व मौसम विज्ञान केन्द्र ने यूरोप की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन संगठन के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि अगस्त माह जुलाई के बाद वर्ष 2023 का दूसरा सबसे गर्म महीना रहा। इस वर्ष अगस्त माह औद्योगिकीकरण के औसत तापमान से भी लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। समुद्रीय सतह का औसत तापमान में भी इस वर्ष रिकार्ड वृद्धि हुई।

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इसीलिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि इस वर्ष ग्रीष्म के ये गर्म दिन केवल हमें डरा नहीं रहे बल्कि काटने को तैयार हैं।
यूरोपीय मौसम विज्ञान केन्द्र कोपरनिकस के अनुसार 2016 के बाद 2023 सबसे अधिक गर्म वर्ष रहा।
वैज्ञानिकों ने लगातार बढ़ती गर्मी के लिए इंसानों द्वारा कोयले, तेल और प्राकृतिक गैसों के अधिकाधिक इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा एल नीनो ने इसमें अपनी भूमिका निभाई है। एल नीनो प्रशांत महासागर की गर्म हवाओं का झोंका है जो विश्व के मौसम पर अपना प्रभाव डालता है।

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कोपरनिकस मौसम विज्ञान केन्द्र के निदेशक कार्लो बुअनटेम्पो का कहना है कि हमारे पर्यावरण का गर्म होना यह संकेत देता है कि ये दशाएं न केवल उग्र हैं बल्कि ये लगातार बनी हुई हैं जिसका प्रभाव लोगों के साथ साथ पृथ्वी पर भी पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करके पता लगाया है कि 120000 वर्ष पहले जो तापमान था उससे अधिक इस समय का तापमान हो गया है। उनका मानना है कि दुनिया का तापमान इससे अधिक गर्म पहले भी रहा है लेकिन यह मानव सभ्यता के विकसित होने से पहले की बात है।
विनम्र निवेदन
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यह लेख अल जजीरा नामक एक प्रसिद्ध अरबी समाचार चैनल के अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। अंग्रेजी में लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।


https://www.aljazeera.com/news/2023/9/6/un-announces-climate-breakdown-after-record-summer-heat?traffic_source=rss&sf181556753=1

भगवान ढूंढने जब मैं निकला

भगवान ढूंढने जब मैं निकला

मन में प्रबल जिज्ञासा थी

पर जीवन के संघर्षों के आगे

कहीं नहीं कोई आशा थी।

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पग पग धोखे मिलते थे

सब भेष बदलकर मिलते थे

दुनिया के तानों को सह कर भी

हम अपनी धुन में रहते थे।

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धन वैभव की चाह नहीं थी

दिन भर चिंतन करते थे

आंख गड़ा सब मुझे निहारें

सनकी पागल कहते थे।

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नहीं राह आसान भक्त की

रह रह कर कांटे चुभते हैं

क्या तकलीफें देकर ही श्रीमन

सच्चे भगत परखते हैं।

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32 मर्द 1 महिला और 12 मर्डर

जी हां, सुनने में अजीब लगता है लेकिन यह एक सच्ची कहानी है। यह कहानी है काजुको हिगा नामक एक महिला की जिसे अनतहन की रानी के नाम से भी जाना जाता है।

Courtesy Medium


बात उस समय की है जब दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था। प्रशांत महासागर से गुजर रहा एक जहाज अमेरिकी हमले से डूब गया। इस जहाज में सवार केवल 32 लोग किसी तरह अपनी जान बचा सके और इसी महासागर के एक निर्जन टापू पर वे किसी तरह पहुंच सके। टापू पर रहने वाले लोग पहले ही इसे छोड़कर जा चुके थे लेकिन एक किसी कारणवश नहीं जा सकी थी। और यह महिला इन 32 जवान मर्दों के बीच फंस गई।


आप कल्पना कर सकते हैं उस महिला के लिए उनके बीच कैसी जंग छिड़ी होगी। सभी उस महिला का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते थे। यह महिला जिस भी पुरुष की ओर आकर्षित होती अगले ही दिन उसकी हत्या हो जाती क्योंकि इस वीरान द्वीप पर एक अकेली औरत प्यार, घृणा कामुकता और हत्या का कारण बन चुकी थी।

Courtesy Facebook


इस महिला को पाने के लिए उन 32 पुरुषों में रोज लड़ाईयां होती। कुछ ही दिनों में इन 32 में से 12 की हत्या हो चुकी थी। इन हत्याओं के बाद बाकी बचे लोगों ने महसूस किया कि इस एक अकेली औरत की वजह से उनके बीच रोज खूनी संघर्ष होता है और उनके कुछ साथियों को जान भी गंवानी पड़ी तो क्यों ना इसे ही खत्म कर दिया जाए। ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी।
तो उन सभी ने उसे मारने की योजना बनाई लेकिन काजुको हीगा इनके चंगुल से बच निकली। जब उसने अपनी कहानी मीडिया वालों को बताई तो वह रातों रात सेलेब्रिटी बन गई।
अनतहन प्रशांत महासागर के मैरियाना द्वीप समूह का एक छोटा सा हिस्सा है जो लगभग 9 किलोमीटर की लंबाई और 4 किमी चौड़ाई में फैला हुआ है।
पहले यह द्वीप स्पेन की कालोनी थी जिसे उन्होंने जर्मनी को बेंच दिया था। बाद में जर्मनी ने इसे जापान को बेंच दिया। इस समय यहां जापान के लोग बड़े स्तर पर नारियल की खेती करते हैं।

Courtesy Medium


You can access the English version of the story by just clicking the following link 👇👇👇
https://short-history.com/queen-of-anatahan-cf596f7e651c

हर शिखर तिरंगा

माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाले भारतीय पर्वतारोहियों की एक टीम ने अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया है। दो दिन पहले ही चीन ने अपने नये नक्शे को जारी करते हुए उसमें अरुणाचल प्रदेश को दर्शाया था। अरमा कोंडा अरुणाचल प्रदेश के हुकुम पेट मंडल के अधूरी सीताराम राजू जिले में स्थित है।

Courtesy Times of India

अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्वतारोहियों की इस टीम को हर शिखर तिरंगा नाम दिया गया है। इसमें कुल 15 सदस्य हैं। यह उपलब्धि हासिल करने में टीम को 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे में 5545 फीट की चढ़ाई करनी पड़ी।

इस टीम का मिशन भारत के प्रत्येक राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराना है। टीम ने इसी वर्ष 1 अगस्त से उत्तर पूर्वी राज्यों से अपने मिशन की शुरुआत की थी और अब 21 राज्यों की ऊंची चोटियों पर तिरंगा लहरा चुके हैं। तेलंगाना में अपने मिशन को पूरा करने के बाद टीम ने अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश किया। टीम का अगला लक्ष्य है उड़ीसा की पर्वत चोटी देव माली को फतह करना। टीम का मिशन 15 अक्टूबर को सिक्किम की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर तिरंगा फहराने के साथ पूर्ण होगा। राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना, भारत की विविधता को दर्शाना, राष्ट्रीयता की भावना को समृद्ध करना, साहसिक कार्यों, खोज और स्थानीय जागरूकता फैलाना पर्वतारोहियों की टीम के मिशन का उद्देश्य है।

टीम का नेतृत्व नेशनल एडवेंचर अवार्ड के विजेता तेनजिंग नोर्गे कर रहे हैं। माउंट एवरेस्ट को तीन बार फतह कर चुके रणवीर सिंह भी इस टीम के सदस्य हैं। इस टीम में सेना के जवान और कुछ पर्वतारोही छात्र भी शामिल हैं। यह टीम तमिलनाडु की ऊंची चोटी डोडाबेटा पर भी तिरंगा फहरा चुकी है।

एक विश्व युद्ध और ….. निर्णय

क्षमा करें, मैं युद्ध, विध्वंस, विनाश, बर्बादी और तबाही का पैरोकार नहीं हूं। युद्ध एक विभीषिका है, मानवता के लिए अभिशाप है। लेकिन कभी कभी यह मानवता की रक्षा करने के लिए जरूरी हो जाता है। लगता है वह समय नज़दीक है। वर्तमान परिस्थितियां भी विश्व युद्ध का ही संकेत दे रही हैं। पूरी दुनिया में इस समय हलचल है। कूटनीति अपने सबसे चरम बिन्दु पर है। दुनिया दो धड़ों में विभाजित दिखाई दे रही है। कुछ देशों ने अपने अपने पक्ष भी चुन लिए हैं। यूक्रेन में लंबे समय से युद्ध चल रहा है। हजारों मारे जा चुके हैं हजारों बेघर हो चुके हैं। अमेरिका की चौधराहट को चुनौतियां मिल रही हैं। रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ साथ ईरान जैसे छोटे मुल्क भी लंबे समय से अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। भारत भी दो पक्षों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। जम्मू कश्मीर को लेकर पाकिस्तान तो अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन से भारत का निर्णायक टकराव आज नहीं तो कल होना ही है। आर्मेनिया और अज़रबैजान रुक रुक कर गोला बारूद की अदला बदली कर ही लेते हैं। इजरायल और फिलिस्तीन की जन्मजात दुश्मनी और संघर्ष बातचीत से हल नहीं होने की दूर दूर तक आस दिखाई नहीं दे रही। इथोपिया अपने पड़ोसी देश इरीट्रिया से संघर्ष कर रहा है।

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इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रों के मध्य आर्थिक प्रतियोगिता, देश के नागरिकों का जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर एक दूसरे के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां ये बताती हैं कि अब लोगों में धैर्य और सहनशीलता ख़त्म हो चुकी है। अब इंसान में सोचने और विचारने की क्षमता क्षीण हो चुकी है। अब हर कोई अपने को दूसरे से श्रेष्ठ साबित करना चाहता है। अपने विचार अपनी परंपरा अपनी जात और अपना संप्रदाय। कोई किसी को नष्ट करने की बात कर रहा है कोई किसी को। बात इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि अब एक दूसरे के धर्म को नष्ट करने की धमकियां दी जा रही हैं। सुनने में आया है कि किसी दो कौड़ी के नेता ने सनातन को नष्ट करने की इच्छा व्यक्त की है। कम से कम कोई भी सच्चा धर्म दूसरे धर्म को नष्ट करने की मंशा नहीं रखता। और अगर कोई ऐसी भावना पालता है तो प्रकृति उसे उसके धर्म के साथ खुद ही नष्ट कर देती है। ये सारी परिस्थितियां ये बताने के लिए पर्याप्त हैं कि जल्द ही पूरी दुनिया उथल पुथल के दौर से गुजरने वाली हैं।

जब इंसानी फितरत और स्वभाव इस कदर उग्र हो जाए कि वह अपनी जाति, परंपरा, संगठन, संप्रदाय के नाम पर मानवता, समाज, मूल्य, परंपरा और सिद्धांतों की तिलांजलि देने को तैयार हो तो समझ लेना चाहिए कि विध्वंस की बेला दरवाजे पर दस्तक दे रही है। धनबल से निर्बल सताया जा रहा है। असमानता की बात उठाकर लोगों को बरगलाया जा रहा। असमानता तो प्रकृति के मूल में है। एक ही मिट्टी के दो कण कभी भी एक समान नहीं हो सकते लेकिन महत्व दोनों का एक समान है। सृष्टि का सौन्दर्य ही इस बात में समाहित है कि उसकी विषमता में ही समत्व का भाव छिपा है। ज़रुरत है इसी भाव को समझने की ना कि एक दूसरे को एक दूसरे पर थोपने की। धरातल पर समानता लाने की बात मूर्खता है। हां वैचारिक और आत्मिक समानता विषमता में पहले भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। लेकिन लोगों की समझ में यह बात तब आएगी जब वे एक भयंकर कालचक्र से गुजरेंगे। मुझे ऐसा लगता है कि वह समय बहुत नजदीक है। बहुत सारे लोगों ने अपनी भविष्यवाणियों में इसका संकेत पहले ही दे चुके हैं। दुनिया को चेताने वाले आज भी सावधान कर रहे हैं। लेकिन दुनिया की समझ में यह बात आए तो बात बने।

जलता हुआ आदमी

चौंकिए मत। हम यहां किसी जलते हुए आदमी की दास्तां नहीं बताने आए हैं। हम आपको अमेरिका के एक सांस्कृतिक त्योहार के बारे में बताने जा रहे हैं जोकि इस समय चर्चा में है। 27 अगस्त से शुरू हुए आयोजन में खलल पड़ गई है जिसकी वजह से 70 हजार लोग कीचड़ में फंस गए हैं और एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। आयोजन के पहले दिन के बाद की पूरी रात भयंकर बारिश हुई और आगे भी इसकी संभावना बनी हुई है।

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दरअसल जलता हुआ आदमी यानी बर्निंग मैन अमेरिका का एक सांस्कृतिक त्योहार है। इसका प्रथम आयोजन 1990 में अमेरिका के नेवादा में स्थित राक शहर के मरुस्थल में हुआ था। इसकी स्थापना जून 1986 में लैरी हार्वे और उनके मित्र जेरी गोडेल ने ग्रीष्म संक्रांति के समय सैन फ्रांसिस्को के बाकर बीच पर लकड़ी के बने एक आदमी को जलाकर की थी।

इस कार्यक्रम में शामिल होने दुनिया भर से लोग आते हैं। लेकिन इस दौरान उन्हें सेलफोन और इंटरनेट जैसी सुविधाओं से दूर रहना होता है। पारम्परिक नाच गाने और नृत्य के बीच उन्हें रहना पड़ता है। प्रकृति को नुक़सान पहुंचाने वाली चीजों के इस्तेमाल पर मनाही है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मनमाफिक जीने की आजादी दी जाती है ताकि वे स्वतंत्रता का मतलब समझ सकें।