हत्यारी लड़की

अगर इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए तो दुनिया में बहुत सारे अधम और बुरे किरदार आपको मिल जाएंगे। इन किरदारों में हत्यारे, बलात्कारी और सीरियल किलर सहित ऐसे कृत्य करने वाले लोग शामिल हैं जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
अगर हम आपसे कहें कि किसी ऐसे घृणित किरदार की कल्पना करें तो जाहिर तौर पर वह एक छोटा बालक तो नहीं हो सकता। लेकिन हाय! ऐसा एक किरदार है जिसकी उम्र महज 11 वर्ष है।

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यह डरावनी कहानी मैरी बेल नामक एक बच्चे की है जिसकी कहानी आपमें कंपकंपी पैदा कर देगी। यह कहानी है एक मासूम के क्रूर और निर्दयी बनने की। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि बचपने और मासूमियत से भरी एक लड़की इतना जघन्य कृत्य कैसे कर सकती है। आखिर किन मनोभावों ने उसे घृणित कृत्य करने पर विवश कर दिया।
केवल 11 वर्ष की सीरियल किलर मैरी बेल की कहानी में इतनी पहेलियां हैं जिनका उत्तर खोजना आसान नहीं होगा। यह एक बेचैनी कर देने वाली कहानी है। यह कहानी मानव स्वभाव की जटिलताओं को समझने में हमारी मदद करेगी।


मैरी बेल का बचपन बहुत ही बेचैन और उथल पुथल भरे वातावरण में गुजरा। मानसिक रूप से अस्वस्थ बेट्टी नामक एक महिला के गर्भ से चुनौतीपूर्ण माहौल में बेल का जन्म हुआ। बेला की मां यौनकर्मी (वेश्या) के रूप में कार्य करती थी और अक्सर घर पर कम रहती थी। बचपन में मां का बेटी के प्रति व्यवहार भी डरावना ही रहता था। बेल की मां ने कई बार उसकी जान लेने तक की कोशिशें कर चुकी थी। यही नहीं कई बार उसकी मां ने उसका यौन शोषण भी किया। मेरी बेल के जीवन में यह सारी तकलीफें 5 वर्ष की उम्र से ही शुरू हो गई थी। घरेलू हिंसा और आपराधिक कृत्यों के बीच बेल को एक बहुत ही कटु माहौल मिला। इस कारण मारपीट करना, चोरी करना मैरी बेल के लिए एक सामान्य घटना हो गई। लोगों की निगाह में उसका अशांत व्यवहार ध्यान आकर्षित करने के रूप में मशहूर होने लगा। बेल बार बार कहा करती थी कि मैं एक हत्यारी हूं लेकिन लोगों उसकी बातों को बेकार और शेखी बघारने वाली समझकर खारिज कर दिया करते थे। दुर्भाग्यवश उसकी बातें खोखली साबित नहीं हुई। 11 वर्ष की आयु होने के ठीक एक दिन पूर्व 25 मई 1968 में बेल ने अपने जीवन का पहला अपराध किया। उसने एक हत्या की। हालांकि इससे पहले भी वह अपने हत्यारे स्वभाव का परिचय दे चुकी थी। वह खेल खेलते समय कई बार अपने साथियों को गंभीर नुक़सान पहुंचा चुकी थी लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते थे। खैर… पहली हत्या करने के ठीक दो सप्ताह बाद उसने दूसरी हत्या कर दी जब उसने चार वर्षीय मार्टिन ब्राउन नामक एक बच्चे की बहुत ही घिनौने तरीके से गला घोंटकर हत्या कर दी। अधिकारियों का मानना है कि उसने यह घटना अकेले अंजाम दी थी। हत्या के पहले और हत्या के बाद उसका व्यवहार अजीब और परेशान करने वाला था।
पहली हत्या के ठीक दो माह बाद बेल ने दूसरी हत्या को अंजाम दिया। इस हत्या ने उसके आस पास के लोगों को हिलाकर रख दिया। इसके कुछ दिनों बाद ब्रायन होव नामक एक बच्चा लापता हो गया। खोजबीन करने वाले अधिकारियों को पत्थरों के नीचे दबी उसकी लाश मिली जिसकी हत्या गला घोंटकर की गई थी और उसके पेट को कैंची और ब्लेड से चीरकर कई टुकड़े कर दिए गए थे। शुरुआती छानबीन में पता लगा कि होव के पेट को चीरकर अंग्रेजी के अक्षर एन N को उकेरा गया था लेकिन बाद में पता चला कि यह अक्षर एन नहीं एम M था। अधिकारियों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह हत्या किसी नाबालिग द्वारा की गई है। पुलिस ने जब मैरी बेल और उसकी दोस्त नोरमा बेल से पूछताछ शुरू की तो दोनों के बयान विरोधाभासी थे। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों टूट गई और कबूल कर लिया कि दोनों ने मिलकर इस हत्या को अंज़ाम दिया है। अपराध की दृष्टि से इंग्लैंड के इतिहास में यह बड़ी कुख्यात घटना थी जिसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या कोई छोटी लड़की ऐसा कुकृत्य कर सकती है। इस घटना में नाटकीय मोड़ तब आया जब कोर्ट ने सुनवाई के बाद नोरमा बेल को बिना सजा दिए मुक्त कर दिया जबकि मैरी बेल को खतरनाक व्यक्तित्व और दूसरे बच्चों के लिए खतरा बताते अनिश्चितकालीन जेल की सजा सुनाई। मैरी को सजा होते ही इंग्लैंड की मीडिया में उससे जुड़ी खबरों और उसके जीवन की घटनाओं को प्रकाशित करने की होड़ मच गई। उसकी मां बेट्टी ने मीडिया से पैसे लेकर निर्लज्जतापूर्वक बेल से जुड़ी जानकारियां बेचने लगी। इसके बाद अखबारों में मेरी बेल की खबर 1977 में प्रकाशित हुई जब वह जेल से भागने में सफल हो गयी। हालांकि उसे शीघ्र ही गिरफ्तार भी कर लिया गया।
12 वर्ष बाद मैरी को जेल से रिहा कर दिया गया और अब वह 23 वर्ष की हो गई थी।
यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
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https://www.historydefined.net/mary-bell/

धोखाधड़ी की सजा 11196 वर्ष जेल

तुर्की में क्रिप्टो करेंसी व्यापार से जुड़े एक व्यक्ति और उसके दो संबंधियों को निवेशकों के लाखों डालर्स के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में 11, 196 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है। 29 वर्षीय फारुख फतेह ओजेर की कंपनी थोडेक्स जब 2021 में अचानक से धराशाई हो गयी तो वह निवेशकों के लाखों डालर्स के साथ अल्बानिया भाग गया था।
जून में प्रत्यर्पण के जरिए इसे तुर्की लाया गया जहां उसे संगठित अपराध और रुपए के लेनदेन संबंधी धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए इसने कहा कि यदि उसका इरादा आपराधिक होता तो वह इतने शौक से थोडेक्स कंपनी नहीं स्थापित करता।
उसने यह भी कहा कि वह इतना बुद्धिमान और चतुर है कि किसी भी संस्था का नेतृत्व कर सकता है और इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि मैंने 22 वर्ष की अवस्था में अपनी कंपनी स्थापित कर लिया था। इस मामले में उसकी बहन सेराप और भाई गुवेन भी दोषी ठहराए गए। तुर्की में ऐसे असाधारण जेल सजा देना आम बात है। यूरोपीय संगठन में शामिल के प्रयास में तुर्की ने 2004 में मौत की सजा का प्रावधान समाप्त कर दिया था। तुर्की में ही वर्ष 2022 में टेलीविजन पर धार्मिक उपदेश देने वाले एक व्यक्ति अदनान ओक्तार को धोखाधड़ी और यौन अपराध के एक मामले में 8658 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ओक्तार के लिए 40562 वर्ष जेल की सजा की मांग की थी। थोडेक्स कंपनी जो वर्ष 2017 में अस्तित्व में आई थी, आभासी मुद्रा के मामले में तुर्की की बड़ी कंपनियों में से एक थी।

साभार BBC News


ओजेर ने राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय विशेषज्ञ के रूप में नाम कमा लिया था और देश के मशहूर राजनीतिक व्यक्तियों से उसके मधुर संबंध भी थे। हालांकि जल्दी ही उसकी कंपनी धराशाई हो गयी और निवेशकों के पैसे डूब गए जिसके बाद वह लापता हो गया। इंटरपोल से अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी होने के बाद उसे अल्बानिया में गिरफ्तार कर लिया गया था और लंबी कानूनी प्रक्रिया के साथ उसे तुर्की प्रत्यर्पित किया गया।
पहले तुर्की की मीडिया में इस बात की चर्चा थी कि उसने निवेशकों के लगभग 2 बिलियन डॉलर के साथ धोखाधड़ी की है। हालांकि अभियोजन पक्ष का अनुमान है कि 356 मिलियन लीरा का नुक़सान हुआ है। जिस समय थोडेक्स कंपनी लड़खड़ायी थी उस समय इसकी कीमत 43 मिलियन डॉलर थी। इस समय इसकी कीमत 13 मिलियन डॉलर के बराबर है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तुर्की की मुद्रा लीरा का मूल्य घटा है और वहां महंगाई दर भी इस समय अधिक है।
👉👉 यह BBC News में 08/09/23 को प्रकाशित एक खबर का हिन्दी अनुवाद है जिसे आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
https://www.bbc.com/news/world-europe-66752785?xtor=AL-72-%5Bpartner%5D-%5Bbbc.news.twitter%5D-%5Bheadline%5D-%5Bnews%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D&at_campaign_type=owned&at_link_origin=BBCWorld&at_link_id=D7E0B6D8-4E4C-11EE-AD01-CE72FE754D29&at_link_type=web_link&at_campaign=Social_Flow&at_format=link&at_ptr_name=twitter&at_bbc_team=editorial&at_medium=social

बात बिगड़ जाती है।

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मेरे पास

खामोशी के सिवा

कोई हल नही

मैं बात करता हूँ

तो बात बिगड़ जाती है…!

कुछ खामोशियां,

कुछ बेहिसियां,

और कुछ बदगुमानियां,

कोई भी मज़बूत ईमारत हो

रिश्तों की बुनियाद खा जाती हैं…!

लफ़्ज़ों की चापलूसी,

बाजार के ये रिश्ते

और स्वार्थ की ये दुनिया

सादगी ईमान के

इंसान को खा जाती है।

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Will AI Singularity Wipe Out Humanity?

Now a days there is too much hype of Artificial Intelligence in the world. Creation of a machine which simulate human intelligence is no ordinary feat.
But our discussion is, will it really serve good to mankind in the future ? Will people, industries and technology come together in harmony with nature to create a better future.

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AI is a simulation of human intelligence into machines which now has made its way into our everyday lives.
It is established that Super AI will surpasse human intelligence. It can significantly reduce errors and increase accuracy and precision, with more productivity than humans. It can work endlessly without breaks thinking much faster than humans and perform multiple tasks at a time. It won’t have any biased views.
But it includes the risk of job displacement and ethical concerns. Robots can be utilized to replace human resources and Ethics and morality can not be incorporated into them. They are completely devoid of emotions and highly practical and rational in its approach. A big disadvantage of AI is that it will not be capable of creativity in its approach as it works with pre-fed data and past experiences. AI is itself a creativity by human.
According to a study, global AI market is set to grow up to 54 percent every year. This moment is referred to as the AI singularity. So the big question being asked is, is rapid and uncontrolled growth and progress of AI eventually wipe out humanity.

मैं वक्त के हाथों में खिलौने की तरह था।

आज के ब्लॉग में मैंने ट्विटर से कुछ बेहतरीन प्रेरणादायक ट्विट्स लिए हैं। इन्हें पढ़कर मन को सुकून मिलता है। टूटे हुए दिल को हौंसला मिलता है। आशा करता हूं कि ये प्रयोग आपको अच्छा लगेगा। आप चाहें तो इन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्टेटस के रूप में भी लगा सकते हैं।

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दुनिया कितनी लाचार है।

चापलूस दलालों की

अब होती जय जय कार है

इसीलिए इस दुनिया का

अब हो रहा सत्यानाश है।

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बेच रहे ईमान सरासर

पाप सभी स्वीकार है

इंसा का इंसा पर अब तो

नहीं रहा ऐतबार है।

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चारो ओर है अंधियारा

बढ़ रहा अत्याचार है

शांति सौहार्द की आस नहीं

दुनिया कितनी लाचार है।

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AI: A Security And Privacy “Disaster.”

The most exciting thing in tech right now is AI chatbots. These chatbots are continuously being tested to see how brilliantly they could perform and expectedly they are emerging as the superheroes, tackling challenges with efficiency and precision. Many of them are showing unexpected performence. But still, there are some fields where it isn’t great in comparison to human brains.

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These chatbots receives instructions from users and then hunts the internet for answers. Now these technological miracle have started occupying wider place in various fields like Banking and Finance Industry, Media and Entertainment, Healthcare, E-commerce, Retail, Travel and Tourism, Others. Global AI Based Chatbots market looks promising in the next 5 years. Growing demand around the world had a direct impact on the growth of the AI Based Chatbots. It is expected that the market will grow magnificently during 2023 – 2030.

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Govts of the world are showing keen interest in the development. Recently China has released the chatbots publicly while Britain is planning an AI summit and the US seems to be getting tougher on chip exports.
But they’re poised to create a major new problem. Will meteoric manifestation of artificial intelligence dominate future? Will AI bring an all around transformation ? What will be it outcome, better or worse because they are ridiculously easy to misuse. AI could be used for all sorts of malicious tasks, including leaking people’s private information and helping criminals phish, spam, and scam people. Experts warn that we are heading toward a security and privacy “disaster.”

नया कानून

बच्चे मोबाइल पर अधिक समय व्यतीत ना करें और उनमें अच्छे नैतिक और सामाजिक गुणों का विकास हो, इसके लिए चीन एक नया कानून लागू करने जा रहा है। इस संबंध में चीन की उच्च इंटरनेट नियामक संस्था साइबर स्पेस प्रशासन विभाग एक प्रस्ताव जारी किया है।

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प्रस्ताव के अनुसार इसके लिए सभी मोबाइल और ऐप में लघु मोड जोड़ा जाएगा जो प्रयोगकर्ता को उसकी उम्र के आधार पर इंटरनेट पर समय व्यतीत करने को नियमित करेगा। इस कानून के जरिए वह बच्चों के बीच अनवांछित जानकारियों को पहुंचने से भी रोक सकेगा। इस कानून पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए इसके ड्राफ्ट को 2 सितम्बर तक के लिए सार्वजनिक कर दिया गया था। कानून के अनुसार जब कम उम्र वाले अल्पवयस्क मोड में मोबाइल का प्रयोग करेंगे तो निर्धारित समय के बाद आनलाइन ऐप खुद ही बंद हो जाएगा।

इस दौरान उन्हें उम्र आधारित विषय वस्तु प्रदान किया जाएगा। इस मोड में कोई भी जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम होगी 10 बजे रात से सुबह 6 बजे के बीच मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। वे बच्चे जिनकी उम्र 8 वर्ष से अधिक नहीं होगी, केवल 40 मिनट इस्तेमाल कर सकेंगे, जबकि 8 से 16 वर्ष के वयस्क केवल एक घंटे ही मोबाइल का प्रयोग कर पाएंगे।
इसके अलावा मोबाइल इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां ऐसी विषय वस्तु का निर्माण करेंगी जो बच्चों में समाजवादी मूल्यों का संचार करेंगे।

यह लेख अमेरिकी समाचार एजेंसी CNN के एक अंग्रेजी समाचार का हिंदी अनुवाद है। कृपया मूल समाचार को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। और हां Like Share Subscribe करना ना भूलें। धन्यवाद 🙏🙏🙏

https://edition.cnn.com/2023/08/03/tech/china-minors-mobile-phone-limits-intl-hnk/index.html?utm_medium=social&utm_source=twCNN&utm_content=2023-09-07T05%3A16%3A06&utm_term=video

तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है – यूक्रेन


यूक्रेन के रक्षा प्रमुख एलेक्सी डानीलोव ने कहा कि कीव और मास्को के बीच जारी संघर्ष को दो देशों के बीच युद्ध समझना भूल है। दरअसल यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है।

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यूक्रेन की राजधानी कीव में मंगलवार को बात करते हुए उन्होंने कहा कि जारी संघर्ष के बीच भी नाटो यूक्रेन को एक सदस्य के रूप में अपनाना चाहता है और हम इसे मजबूत बनाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई यह समझता है कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू नहीं हुआ है तो वह गलतफहमी में जी रहा है। तीसरा विश्व युद्ध अब और सक्रिय हो रहा है। यह युद्ध और जटिल होता जा रहा है। जब वह ये बातें कह रहे थे तो उनके बगल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के निदेशक डेविड पेट्रास भी मौजूद थे।

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पेट्रास ने अपने संबोधन में कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वह ऐसा संघर्ष देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस ना तो ज्ञान के क्षेत्र में प्रभावशाली और ना ही युद्ध मैदान में प्रदर्शन के क्षेत्र में। बावजूद इसके उन्होंने एक उत्कृष्ट रक्षा तंत्र विकसित कर लिया है जिसे भेदना आसान नहीं होगा। मंगलवार को ही रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में दावा किया गया था कि दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध में अब तक यूक्रेन के 66000 सैनिक मारे जा चुके हैं और उनके लगभग 7600 हथियारों के जखीरे बर्बाद हो चुके हैं। यूक्रेन को इस युद्ध में अब तक कोई महत्वपूर्ण लाभ नहीं मिला है।


हालांकि यूक्रेन ने कुछ गांवों पर अपना अधिकार जमा लिया है लेकिन ये सभी गांव रूसी रक्षा सीमा से बहुत दूर स्थित हैं। रूसी राष्ट्रपति लंबे समय से यह कहते आए हैं कि यूक्रेन में जारी संघर्ष अमेरिका और नाटो द्वारा रूस के विरुद्ध छेड़ा गया छद्म युद्ध है और पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को बड़ी मात्रा में हथियारों की आपूर्ति और गुप्त सूचनाओं का आदान प्रदान यह बताता है कि वास्तव में वे भी इस युद्ध का हिस्सा हैं।
रूस नाटो को विरोधी खेमे के रूप में देखता है और इसके पूर्व में विस्तार का विरोध करता है। यूक्रेन की अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य संगठन का हिस्सा बनने की लालसा ही रूसी हमले के पीछे मुख्य वजह है।‌

Image courtesy: Russia Today

👉👉👉 This is a Hindi translation of a news published in Russia Today. You can access the source by clicking the following link 👇👇👇

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जी 20, भारत और भविष्य

भारत की राजधानी दिल्ली में होने जा रही जी -20 बैठक में हिस्सा लेने दुनिया के ताकतवर देशों के राष्ट्र प्रमुख पहुंच चुके हैं। लेकिन एक सवाल जो दिल्ली की धुंधले वातावरण में मंडरा रहा है वह यह कि क्या इस सम्मेलन से किसी उद्देश्य की पूर्ति होगी। विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं होगा।
जी 20 की शुरुआत 1999 में एशियाई देशों में आए वित्तीय संकट के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वित्त मंत्रियों और केन्द्रीय बैंकों के गवर्नरों के लिए एक मंच के रूप हुआ था। वर्ष 2007 में आए वित्तीय संकट के बाद इस समूह को राष्ट्राध्यक्ष के स्तर पर लाया गया और 2009 में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए इसे प्रमुख मंच के रुप में निर्दिष्ट किया गया। उस समय इसके सदस्य 4 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर अपनी और विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करने, व्यापार के मार्ग की रुकावटों और वित्तीय व्यवस्था में सुधार लाने पर सहमत हुए थे। तब से लेकर यह संगठन वित्तीय और आर्थिक मुद्दों, जिसमें अधिकांशत: वैश्विक होते हैं, पर चर्चा करने के लिए हर वर्ष बैठक करता है।

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2009 में ईरान का प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट की ख़बर इसकी बैठक चर्चा के केंद्र बिन्दु में रही थी। 2016 में चीन के हैनझाउ प्रांत में इसकी बैठक में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पेरिस जलवायु समझौते पर दस्तखत किए थे। हाल ही में कोरोना की महामारी के बीच वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर जी 20 को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। दुनिया की कुल आबादी के 60 फीसदी हिस्से और कुल आर्थिक उत्पादन के 80 फीसदी की हिस्सेदारी इसी संगठन के पास है। इसीलिए इस संगठन की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।

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हालांकि वर्तमान में 19 देशों वाले इस समूह, जिसमें अमेरिका, रूस, यूरोपीय संगठन और चीन जैसे विश्व के ताकतवर देश शामिल हैं, की कमी ये है कि इनके हित संरेखित नहीं होते। विल्सन सेंटर स्थित दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि जी 7 और जी 20 दोनों महत्वपूर्ण समूह हैं। जी 7 दुनिया के विकसित देशों का छोटा लेकिन प्रभावशाली संगठन है। जबकि जी 20 के सदस्यों में विकासशील, एशिया लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के देश शामिल हैं। यह समूह इस समय एक विशेष भू राजनैतिक क्षण से गुजर रहा है। कुगलमैन कहते हैं कि अगर एक मंच पर अमेरिका और उसके सहयोगी चीन तथा रूस के साथ मौजूद हैं तो दिक्कतें होना लाजिमी है। वर्तमान में रूस यूक्रेन युद्ध के चलते तनाव और भी बढ़ गये हैं। अमेरिका यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा भी कर चुका है और उस पर खड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगा रखा है। अपनी मेजबानी में भारत इस समूह के सदस्यों के बीच सहमति बनाने के लिए संघर्षरत है। इस कार्य में भारत की परेशानियां इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि रुसी राष्ट्रपति पुतिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग जी 20 की इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। खबर है कि मैक्सिको के राष्ट्रपति ए़ड्रीज मैनुअल लोपेज़ ओब्राडोर भी बैठक में हिस्सा ना लें।
इन परिस्थितियों में यदि भारत इस बैठक में संयुक्त घोषणापत्र जारी करवाने में विफल रहता है तो शर्मनाक होगा।

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👉👉👉👉 This is a Hindi translation of an article published in Arabic News Al Jazeera. You are welcome to access the English Version by clicking the following link 👇👇👇

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