पिछले सौ वर्षों का अगर विश्लेषण किया जाए तो यह बात आसानी से समझ में आती है कि दुनिया को अगर किसी देश ने सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वो अमेरिका है। बात चाहे दुनिया के आर्थिक तंत्र की हो या विनाश के हथियारों का या फिर हमारे जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली आधुनिक तकनीक तंत्र के विकास का, अमेरिका का प्रभाव हर क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। लेकिन अजीब बात यह है कि उसके प्रभाव का परिणाम यह है कि आज पूरी दुनिया में उथल पुथल है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं लुढ़कने की कगार पर हैं। कोई भी उपाय कारगर साबित नहीं हो रहा है और आदमी उग्रता की ओर चलने को विवश हो रहा है। दुनिया भर के देश एक दूसरे से लड़ने के लिए विश्व युद्ध की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

दुनिया भर के देशों के लोग अब इस बात की उम्मीद खो रहे हैं कि उनके नेता उनकी बढ़ती हुई परेशानियां और समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं। बावजूद इसके आशाएं और उम्मीदें जिंदा हैं लेकिन ऐसी उम्मीदें बहुत गहरा जख्म देने के बाद ही जगती हैं। अब विश्व ऐसे संकट, विनाश और कष्टों के सबसे कठिन दौर से गुजरने का अनुभव करेगा जो उसने शायद ही कभी देखा होगा। इस समय जो भी घटनाएं घटित हो रही हैं वे सभी दैवीय हैं जिनमें से कई घटित भी हो चुकी हैं, जैसे कि 11 सितंबर की घटना, वर्ष 2008 में अर्थव्यवस्थाओं का पतन और कोविड महामारी। पिछले 70 वर्षों में हमने कई बार दुनिया के अंत की चेतावनी सुनी हैं।

आने वाले समय में सबसे पहले जिसका पतध होगा वो देश अमेरिका होगा और जो युद्ध होगा वो मानव जाति का अंतिम संग्राम साबित होगा।
हालांकि इससे पहले की विनाशलीला शुरू हो, ईश्वर चेतावनी जरुर देता है। लेकिन उस विनाशलीला के बाद वो उम्मीद भी जिंदा होगी जो अभी खत्म हो चुकी है। और इसी के साथ इंसान एक बेहतर विश्व में प्रवेश करेगा।

लेकिन उस नये संसार में प्रवेश करने से पहले मानव जाति को विध्वंस और विलोपन के कष्ट को सहन करना होगा। हालांकि ईश्वर ऐसा होने नहीं देंगे। वह अवश्य ही इस विनाशलीला में हस्तक्षेप करेंगे और दुनिया में अपना साम्राज्य स्थापित करेंगे।
This article is a Hindi translation of book “The Fall Of The United States” authored by RONALD WEINLAND. You can access the English version by clicking the following link ,👇👇👇












