दुनिया इस समय समुद्री बाढ़ के भयानक प्रकोप का सामना कर रही है। इस आपदा में हजारों लोग मारे जा रहे हैं और लाखों लोग बेघर हो रहे हैं। लीबिया में आई भीषण समुद्री बाढ़ के कारण अब तक 20000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। परिस्थितियां इतनी भयावह हैं की लाशों को ढूंढना भी मुश्किल हो रहा है।
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सवाल केवल लीबिया का नहीं है। सवाल है, जलवायु परिवर्तन और आने वाले समय में इसके दुष्परिणामों का।
केवल सितंबर माह के शुरुआती 11 दिनों में दुनिया के आठ देशों में भीषण बारिश और बाढ़ ने 8 देशों में भयंकर तबाही मचाई। इन देशों में तुर्की, ग्रीस, ब्राजील, अमेरिका, स्पेन, चीन, हांगकांग और लीबिया शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के बदलते रुख के पीछे सबसे बड़ी वजह है जलवायु परिवर्तन। बदलती जलवायु का असर वैश्विक तापमान और मौसम, दोनों पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर का तापमान और मॉनसून अस्थिर हो रहा है। दुनियाभर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और मौसम में अनियमितता देखने को मिल रही है। इस वर्ष तो गर्मी ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। ठंडे देशों में अचानक से गर्मी शुरू हो गई है, रेगिस्तान में बाढ़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। 1902 के बाद से मौसम की दूसरी सबसे बड़ी चरम घटनाएं 2023 में देखी जा रही हैं। मौसमी घटनाओं के जरिए प्रकृति ये कहने की कोशिश कर रही है कि हमें पर्यावरण पर ध्यान देने की जरूरत है।
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय के सूल’।
हिंदी के महान रचनाकार और आधुनिक हिंदी के पिता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का यह कथन हिन्दी भाषा के संदर्भ में वर्षों पहले लिखी गई थी। ऐसा लिखने के पीछे उनकी दूरदर्शिता थी जो आज सच साबित हो रही है। आज हिंदी अपने ही देश में उपेक्षित है। अंग्रेजी के प्रति लोगों का पागलपन हास्यास्पद है। आखिर हम कब अपनी मातृभाषा को सम्मान देंगे।
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हिंदी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में से एक है। इसे भारत की पहचान के तौर पर भी देखा जाता है। भारत में 22 भाषाएं और उनकी 72,507 लिपियाँ हैं। एक देश में इतनी सारी भाषाओं और विविधताओं के बीच हिंदी वह भाषा है जो हिंदुस्तान को जोड़ती है। भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। सभी राज्यों में बसे जनमानस को हिंदी के महत्व से जागरूक करने और इसके प्रचार-प्रसार के लिए भारत हिंदी दिवस मनाया जाता है। विदेशों में बसे भारतीयों को हिंदी भाषा एक दूसरे से जोड़ने का काम करती है। हिंदी दिवस साल में दो बार मनाया जाता है। पहला जनवरी माह में और दूसरा सितंबर में। जनवरी महीने में मनाया जाने वाला हिंदी दिवस वैश्विक स्तर पर होता है। 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है जिसकी नींव आजादी के समय ही रखी गई। 14 सितंबर 1946 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा माना। देश की पहली सरकार ने आधिकारिक तौर पर 14 सितंबर 1953 को हिंदी दिवस मनाया। हिंदी राष्ट्र को जोड़ने का काम करती है। महात्मा गांधी जैसी कई महान विभूतियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने का समर्थन किया है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी भाषा का उपयोग होता है। हिंदी दिवस के मौके पर कई तरह के कार्यक्रम और सेमिनार का आयोजन होता है, जहां हिंदी के महत्व पर वाद-विवाद होता है। साथ ही हिंदी के प्रति लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इस दिन बहुत से कार्यक्रम होते हैं। इस दिन हिंदी से जुड़े लोगों को पुरस्कृत भी किया जाता है।
अश्लील फिल्म देखना अपराध नहीं है, क्योंकि यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है। और इसमें हस्तक्षेप करना निजता में दखल देने के समान है।पोर्नोग्राफी सदियों से प्रचलन में थी।
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यह कहना है केरल उच्च न्यायालय का। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के कृत्य को अपराध घोषित करना किसी व्यक्ति की निजता में दखल और उसकी निजी पसंद में हस्तक्षेप करना होगा। केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पीवी कुन्हिकृष्णन ने भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 292 के तहत 33 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ अश्लीलता के मामले को रद्द करते हुए यह निर्णय दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी प्राइवेसी में अश्लील फोटो या वीडियो देखना अपने आप में आईपीसी की धारा 292 (अश्लीलता) के तहत अपराध नहीं है। इसी तरह, किसी व्यक्ति द्वारा अपनी प्राइवेसी में मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखना भी आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध नहीं है। न्यायमूर्ति कुन्हिकृष्णन ने कहा कि यदि कोई किसी अश्लील वीडियो या फोटो को प्रसारित या वितरित करने या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहा है, तो वह आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध बनता है।
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लेकिन हमें इस प्रश्न पर निर्णय लेना है कि यदि कोई व्यक्ति दूसरों को दिखाए बिना अपने निजी समय में अश्लील वीडियो देखता है, तो क्या यह अपराध की श्रेणी में आएगा ? वर्ष 2016 में कोच्ची के अलुवा महल में सड़क के किनारे अपने मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखते हुए पुलिस ने …………..को पकड़ा था। आरोपी व्यक्ति ने एफआईआर और उसके संबंध में चल रही अदालती कार्यवाही को रद्द करने की याचिका दायर की थी। माता पिता को सचेत करते हुए न्यायमूर्ति ने कहा कि नए डिजिटल युग ने इसे बच्चों के लिए भी अधिक सुलभ बना दिया है। माता-पिता द्वारा बच्चों को खुश करने के लिए इंटरनेट वाले मोबाइल फोन देने के प्रति भी आगाह करते हुए कहा कहा कि माता-पिता को इसके खतरे के बारे में पता होना चाहिए तथा अपनी उपस्थिति में बच्चों को मोबाइल फोन दें। उन्होंने आगे कहा कि अगर नाबालिग बच्चे अश्लील वीडियो देखते हैं तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके। इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।
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वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे। कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।
यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।
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किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारत ने किसी भी देश का पक्ष न लेकर, और अपने देश के हितों को आगे रखकर सही कदम उठाया है।
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यह कहना है पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। शुक्रवार को अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। भारत में चल रही जी 20 देशों की बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था के निर्धारण में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूक्रेन के मामले में भारत सरकार ने रणनीतिक तटस्थता की नीति अपनाते हुए पश्चिमी देशों की इस अपील को खारिज कर दिया कि वह रूस के साथ अपने सारे व्यापारिक संबंधों को तोड़ ले। अपनी इस नीति के तहत भारत ने पश्चिमी देशों से मधुर संबंध बनाते हुए रूस से ईंधन, तेल, कोयला और भारी उपकरण का व्यापार कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सफलता हासिल की है। सिंह ने आगे कहा कि जब दो ताकतवर देशों के बीच संघर्ष चल रहा हो तो ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना किसी भी देश के लिए बड़ा मुश्किल होता है। शांति की अपील करते हुए मनमोहन सिंह ने भारत के पक्ष को सही ठहराया। वह वर्ष 2004 से 2014 के बीच में भारत के प्रधानमंत्री थे। पिछले वर्ष फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मोदी कई बार यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर चुके हैं। अपनी बातचीत में मोदी ने कहा था कि विश्व शांति के लिए उनका देश जो कुछ भी कर सकता है, उसके लिए वह तैयार हैं। मनमोहन सिंह ने कहा आगे कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तथा चीन और पश्चिमी देशों के बीच में आए दरार के कारण वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अब बदल चुकी है। नई वैश्विक व्यवस्था को बनाने में भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आजादी के बाद संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए एक बड़े और शांतिप्रिय लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को आज दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है। भारत इस वर्ष जी 20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है, और जिसकी बैठक नई दिल्ली में चल रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है जी 20 की बैठक में रूस यूक्रेन युद्ध के समाधान पर चर्चा नहीं होगी बल्कि इसकी जगह जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऋण संकट जो इस समय की विकासशील देशों की मुख्य समस्या है, चर्चा का मुख्य केंद्र होगा। मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष चल रहे हैं और इन सभी का समाधान कूटनीति तथा बातचीत के जरिए होना चाहिए। जी 20 के सदस्य देश के रूप में या बिना जी-20 के हमारे देश का रुख भी यही होना चाहिए क्योंकि एक बंटा हुआ विश्व किसी भी चुनौती का सामना नहीं कर सकता।
यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
संजू भगत को देखकर उनके पड़ोसी उन पर हंसा करते थे क्योंकि उनका पेट बहुत अधिक बाहर की निकला हुआ था, देखकर लगता था कि जैसे उनके पेट में बच्चा हो। लेकिन लोगों की प्रतिक्रिया की परवाह न करते हुए उन्होंने अपनी इस शारीरिक कुरुपता को रूपए कमाने का जरिया बना लिया।
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संजू भगत का जन्म 1963 में नागपुर में हुआ था। बचपन में उनके शरीर में किसी भी प्रकार की असमान्यता के लक्षण नहीं थे। संजू भगत का परिवार एक गरीब परिवार था संजू भगत अपने खेतों में काम करते और जब वह 20 वर्ष के हुए तब उनका पेट बढ़ना शुरू हुआ। जब संजू भगत की उम्र 30 वर्ष की हुई तो लोग उन्हें गर्भवती आदमी कहकर उनको चिढ़ाते थे। अब संजू भगत के परिवार के लोगों को उनकी चिंता सताने लगी और उन्होंने संजू से कई बार कहा कि वह अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह मशवरा करें। धीरे-धीरे संजू भगत का पेट बाहर की ओर निकलता रहा और इतना बढ़ गया कि उनको सांस लेने में कठिनाई होने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर संजू भगत को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें एक अजीबोगरीब बात पता चली। डॉक्टरों के अनुसार संजू भगत ना तो पेट से थे और ना ही उनके पेट में कोई ट्यूमर था। संजू भगत के पेट में उनका जुड़वा भाई था। 1999 में जब संजू अस्पताल पहुंचे तो उस दिन अजय मेहता नाम के डॉक्टर ड्यूटी पर थे। ऑपरेशन के दौरान संजू के पेट से एक दूसरा इंसान निकाला। यही नहीं उनके पेट के अंदर से बहुत सारे मानव अंग निकले जैसे की बाल, हड्डियां, महिला जननांग इत्यादि। डॉक्टर इस घटना से आश्चर्यचकित थे और अंग्रेजी में इस घटना को vanishing twin syndrome कहा जाता है। वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम में जुड़वा या ज्यादा बच्चे होने पर, एक बच्चा गर्भ में ही मर जाता है। इसकी वजह से एक भ्रूण गायब हो जाता है या दूसरा बच्चा, मल्टीपल, प्लेसेंटा इसे आंशिक या पूर्ण रूप से सोख लेता है। इसका पहला मामला 1945 में सामने आया था। यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। https://www.historydefined.net/sanju-bhagat/ एक निवेदन 🙏🙏🙏 कृपया ब्लॉग को Subscribe जरुर करें और like तथा share करना ना भूलें।
अटलांटिक महासागर के नीले जल विस्तार और प्रकृति की सुंदरता के बीच एक रहस्य भी छिपा हुआ है। यह रहस्य है सांपों का द्वीप। जी हां, दुनिया का वह हिस्सा जो सबसे ख़तरनाक और भयानक माना जाता है। इस टापू पर दुनिया के खतरनाक सांप रहते हैं।
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ब्राजील के समुद्री तट पर स्थित इस निर्जन टापू के पत्थरों के नीचे एक रहस्य छिपा हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच इस टापू की वनस्पतियों में लाखों जहरीले सांप सरकते हुए दिखाई देते हैं जो हर वक्त हमला करने के लिए तैयार रहते हैं। दुनिया का सबसे जहरीला सांप गोल्डन लांसहेड है जिसके काटने पर मनुष्य एक घंटे से अधिक जीवित नहीं रह सकता है। इल्ह दा क्विमिदा ग्रैंडी द्वीप जिसे सांपों का द्वीप भी कहा जाता है, देखने में जितना मनमोहन है उतना ही खतरनाक भी है। यह ब्राजील के दक्षिण पूर्वी तट स्थित साओ पालो द्वीप से 33 किमी दूर है।
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अटलांटिक महासागर में स्थित यह द्वीप आकार में केवल 430000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। और सांपों की संख्या का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हर 11 फीट की एक सांप रहता है। यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। https://www.historydefined.net/snake-island/ एक निवेदन 🙏🙏🙏 कृपया ब्लॉग को Subscribe जरुर करें और like तथा share करना ना भूलें।
अगर इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए तो दुनिया में बहुत सारे अधम और बुरे किरदार आपको मिल जाएंगे। इन किरदारों में हत्यारे, बलात्कारी और सीरियल किलर सहित ऐसे कृत्य करने वाले लोग शामिल हैं जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। अगर हम आपसे कहें कि किसी ऐसे घृणित किरदार की कल्पना करें तो जाहिर तौर पर वह एक छोटा बालक तो नहीं हो सकता। लेकिन हाय! ऐसा एक किरदार है जिसकी उम्र महज 11 वर्ष है।
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यह डरावनी कहानी मैरी बेल नामक एक बच्चे की है जिसकी कहानी आपमें कंपकंपी पैदा कर देगी। यह कहानी है एक मासूम के क्रूर और निर्दयी बनने की। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि बचपने और मासूमियत से भरी एक लड़की इतना जघन्य कृत्य कैसे कर सकती है। आखिर किन मनोभावों ने उसे घृणित कृत्य करने पर विवश कर दिया। केवल 11 वर्ष की सीरियल किलर मैरी बेल की कहानी में इतनी पहेलियां हैं जिनका उत्तर खोजना आसान नहीं होगा। यह एक बेचैनी कर देने वाली कहानी है। यह कहानी मानव स्वभाव की जटिलताओं को समझने में हमारी मदद करेगी।
मैरी बेल का बचपन बहुत ही बेचैन और उथल पुथल भरे वातावरण में गुजरा। मानसिक रूप से अस्वस्थ बेट्टी नामक एक महिला के गर्भ से चुनौतीपूर्ण माहौल में बेल का जन्म हुआ। बेला की मां यौनकर्मी (वेश्या) के रूप में कार्य करती थी और अक्सर घर पर कम रहती थी। बचपन में मां का बेटी के प्रति व्यवहार भी डरावना ही रहता था। बेल की मां ने कई बार उसकी जान लेने तक की कोशिशें कर चुकी थी। यही नहीं कई बार उसकी मां ने उसका यौन शोषण भी किया। मेरी बेल के जीवन में यह सारी तकलीफें 5 वर्ष की उम्र से ही शुरू हो गई थी। घरेलू हिंसा और आपराधिक कृत्यों के बीच बेल को एक बहुत ही कटु माहौल मिला। इस कारण मारपीट करना, चोरी करना मैरी बेल के लिए एक सामान्य घटना हो गई। लोगों की निगाह में उसका अशांत व्यवहार ध्यान आकर्षित करने के रूप में मशहूर होने लगा। बेल बार बार कहा करती थी कि मैं एक हत्यारी हूं लेकिन लोगों उसकी बातों को बेकार और शेखी बघारने वाली समझकर खारिज कर दिया करते थे। दुर्भाग्यवश उसकी बातें खोखली साबित नहीं हुई। 11 वर्ष की आयु होने के ठीक एक दिन पूर्व 25 मई 1968 में बेल ने अपने जीवन का पहला अपराध किया। उसने एक हत्या की। हालांकि इससे पहले भी वह अपने हत्यारे स्वभाव का परिचय दे चुकी थी। वह खेल खेलते समय कई बार अपने साथियों को गंभीर नुक़सान पहुंचा चुकी थी लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते थे। खैर… पहली हत्या करने के ठीक दो सप्ताह बाद उसने दूसरी हत्या कर दी जब उसने चार वर्षीय मार्टिन ब्राउन नामक एक बच्चे की बहुत ही घिनौने तरीके से गला घोंटकर हत्या कर दी। अधिकारियों का मानना है कि उसने यह घटना अकेले अंजाम दी थी। हत्या के पहले और हत्या के बाद उसका व्यवहार अजीब और परेशान करने वाला था। पहली हत्या के ठीक दो माह बाद बेल ने दूसरी हत्या को अंजाम दिया। इस हत्या ने उसके आस पास के लोगों को हिलाकर रख दिया। इसके कुछ दिनों बाद ब्रायन होव नामक एक बच्चा लापता हो गया। खोजबीन करने वाले अधिकारियों को पत्थरों के नीचे दबी उसकी लाश मिली जिसकी हत्या गला घोंटकर की गई थी और उसके पेट को कैंची और ब्लेड से चीरकर कई टुकड़े कर दिए गए थे। शुरुआती छानबीन में पता लगा कि होव के पेट को चीरकर अंग्रेजी के अक्षर एन N को उकेरा गया था लेकिन बाद में पता चला कि यह अक्षर एन नहीं एम M था। अधिकारियों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह हत्या किसी नाबालिग द्वारा की गई है। पुलिस ने जब मैरी बेल और उसकी दोस्त नोरमा बेल से पूछताछ शुरू की तो दोनों के बयान विरोधाभासी थे। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों टूट गई और कबूल कर लिया कि दोनों ने मिलकर इस हत्या को अंज़ाम दिया है। अपराध की दृष्टि से इंग्लैंड के इतिहास में यह बड़ी कुख्यात घटना थी जिसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या कोई छोटी लड़की ऐसा कुकृत्य कर सकती है। इस घटना में नाटकीय मोड़ तब आया जब कोर्ट ने सुनवाई के बाद नोरमा बेल को बिना सजा दिए मुक्त कर दिया जबकि मैरी बेल को खतरनाक व्यक्तित्व और दूसरे बच्चों के लिए खतरा बताते अनिश्चितकालीन जेल की सजा सुनाई। मैरी को सजा होते ही इंग्लैंड की मीडिया में उससे जुड़ी खबरों और उसके जीवन की घटनाओं को प्रकाशित करने की होड़ मच गई। उसकी मां बेट्टी ने मीडिया से पैसे लेकर निर्लज्जतापूर्वक बेल से जुड़ी जानकारियां बेचने लगी। इसके बाद अखबारों में मेरी बेल की खबर 1977 में प्रकाशित हुई जब वह जेल से भागने में सफल हो गयी। हालांकि उसे शीघ्र ही गिरफ्तार भी कर लिया गया। 12 वर्ष बाद मैरी को जेल से रिहा कर दिया गया और अब वह 23 वर्ष की हो गई थी। यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। एक निवेदन 🙏🙏🙏 कृपया ब्लॉग को Subscribe जरुर करें और like तथा share करना ना भूलें। https://www.historydefined.net/mary-bell/
The most exciting thing in tech right now is AI chatbots. These chatbots are continuously being tested to see how brilliantly they could perform and expectedly they are emerging as the superheroes, tackling challenges with efficiency and precision. Many of them are showing unexpected performence. But still, there are some fields where it isn’t great in comparison to human brains.
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These chatbots receives instructions from users and then hunts the internet for answers. Now these technological miracle have started occupying wider place in various fields like Banking and Finance Industry, Media and Entertainment, Healthcare, E-commerce, Retail, Travel and Tourism, Others. Global AI Based Chatbots market looks promising in the next 5 years. Growing demand around the world had a direct impact on the growth of the AI Based Chatbots. It is expected that the market will grow magnificently during 2023 – 2030.
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Govts of the world are showing keen interest in the development. Recently China has released the chatbots publicly while Britain is planning an AI summit and the US seems to be getting tougher on chip exports. But they’re poised to create a major new problem. Will meteoric manifestation of artificial intelligence dominate future? Will AI bring an all around transformation ? What will be it outcome, better or worse because they are ridiculously easy to misuse. AI could be used for all sorts of malicious tasks, including leaking people’s private information and helping criminals phish, spam, and scam people. Experts warn that we are heading toward a security and privacy “disaster.”