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कल्कि करेंगे संहार

पौराणिक मान्यतानुसार भगवान विष्णु के दसवें व अंतिम अवतार भगवान कल्कि के इस धरा पर अवतरण होने का समय चल रहा है। प्रभु कल्कि का प्रकट होना अभी शेष है। ग्रंथों में कलियुग के अंतिम चरण में कल्कि अवतार के आने की भविष्यवाणी की गई है। लेकिन कलयुग के समयकाल को लेकर विद्वानों में मतभेद है। अभी कलयुग का कौन सा चरण चल रहा है किसी को कुछ नहीं पता।

हालांकि भगवान कल्कि की सम्भावित जन्मतिथि श्रावण शुक्ल षष्ठी को कल्कि जयंती के रूप में मनाने का प्रचलन भी है। एक मान्यता के अनुसार जब कलयुग अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु अपने 64 कलाओं से युक्त दसवें अवतार भगवान कल्कि अवतार के रूप में इस पृथ्वी पर अवतरित होंगे और कलयुग का अंत कर एक नई सृष्टि का सृजन कर मनुष्य को सनातन वैदिक धर्म पर आरूढ़ कराएंगे।


भगवान विष्णु का यह अवतार निष्कलंक अवतार होगा। कल्कि भगवान का स्वरूप अर्थात सगुण रूप परम दिव्य होता है। वे श्वेत अश्व पर सवार हैं, उनका रंग गोरा है जो क्रोध में काला हो जाता है। पीले वस्त्र धारण किए उनके हृदय पर श्रीवत्स का चिह्न अंकित होगा और गले में कौस्तुभ मणि होगी। उनके हाथों में दो तलवारें होंगी।


कलयुग के घोर अंधकार के युग में जब लोग धर्म और विश्वास को नजर अंदाज़ कर देते हैं और अपनी भौतिकवादी महत्वाकांक्षा और लालच में अपने उद्देश्य को भूल जाते हैं तब भ्रष्ट राजाओं की हत्या के बाद, भगवान कल्कि मनुष्यों के दिलों में भक्ति का भाव जगाएंगे। लोगों को धर्म के मार्ग का अवलंबन और शुद्धता का पालन करना सिखाएंगे ताकि सनातन वैदिक धर्म पर लोगों का विश्वास पुनः वापस आ जाए।
कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कई सदियों से हिंदुओं के बीच लोकप्रिय है। कई लोग मानते हैं कि कल्कि का अवतार हो चुका है और वे दुनिया में शांति और समृद्धि स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कल्कि का अवतार अभी तक नहीं हुआ है और वे भविष्य में अवतार लेंगे।

कल्कि अवतार यहां हैं

आजकल कल्कि अवतार को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। खास कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यू ट्यूब पर कुछ ज्यादा ही शोरगुल है। कल्कि अवतार को लेकर सबके अपने अपने विचार हैं। कुछ तो इस तरह अपने विचारों को रखते हैं मानो वो कल्कि के प्रवक्ता हों। और कुछ तो इस तरह से आते हैं जिन्हें देखकर ही लगता है कि बस करो ये तो मसखरें हैं जो हमारा मनोरंजन करने आए हैं।

यू ट्यूब पर एक मोहतरमा आती है। देखने में खूबसूरत लगती हैं। साथ श्रृंगार करके आती हैं। खुद को मा लक्ष्मी, मां काली और मां भगवती का अवतार घोषित करती हैं। ये सबको अपनी शरण में आमंत्रित कर रही हैं।

एक हैं राकेश शर्मा जी जो खुद को भक्त प्रहलाद मानते हैं। इनका भी मानना है कि भगवान धरा पर अवतरित हो चुके हैं ताकि पाप और पापियों का अंत हो सके। ये टैरो कार्ड रीडर भी हैं और भविष्यवाणी भी करते रहते हैं। वैसे कल्कि अवतार के प्रेमियों के बीच बहुत लोकप्रिय भी हैं।

https://youtube.com/@ambrance1112?si=VPiSSADVB-DjP4d1

एक और सज्जन हैं जो खुद को कल्कि अवतार का एक प्रमुख पात्र मानते हैं। ये सज्जन हैं डाक्टर विलास जगदाले। ये महोदय यू ट्यूब पर ही आजकल धुनी रमाते हैं, योग और समाधि सिखाते हैं। इन्हें लगता है कि दुनिया का साम्राज्य एक दिन इनके हाथों में होगा और ये न्याय करेंगे। अपने वीडियो में पिछले कई सालों से बताते आ रहे हैं कि कोई बहुत बड़ी तबाही आएगी और सभी पापियों का नाश हो जाएगा।

https://youtube.com/@DrVilasJagdaleG?si=w31gjrOOZP3jbtIE

वहीं उड़ीसा के सत्यभांजा नामक एक व्यक्ति भी कल्कि अवतार को लेकर रोज कुछ न कुछ विचार रखते रहते हैं। आजकल किसी पुलिन पांडा नाम के ज्योतिषी को लेकर ये आने वाले समय के बारे में बातें बताते हैं। बताते चलें कि पुलिन पांडा जी की पहचान जाने माने ज्योतिषी की है। ख़ैर हमें क्या।

https://youtube.com/@SatyaBhanjaHindi?si=JRjPqZ97RS_HRK6S

चलते चलते एक और महोदय के बारे में बताते चलें। इनके वीडियो देखकर लगता है मानो ये खुद भगवान कल्कि के साथ ही अवतार हुए हैं। इन्हें कल्कि के बारे में सब कुछ पता है। इनका दावा है कि आने वाले समय में भगवान कल्कि सारे पापियों का सफाया कर देंगे। इन महोदय के चैनल का लिंक है

https://youtu.be/WzMeloEvsLs?si=2Tqzc21VXAlmqbqL

लेकिन असल बात तो ये है कि असली कल्कि अवतार का सही पता तो मेरे पास है। दुर्भाग्य ये है कि न तो मैं यू ट्यूब चैनल चलाता हूं और ना ही मैं तामझाम की ख्वाहिश ही रखता हूं। हां, लेकिन यह सच है कि असली कल्कि का पता मेरे पास है। बताता इसलिए नहीं क्योंकि दुनिया उस पर विश्वास करेगी नहीं। हालांकि कुछ लोगों ने कल्कि अवतार के बारे में खुलकर बताया है लेकिन लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। इसलिए बेहतर यही है कि वक्त का इंतजार करें और कल्कि को खुद ही कल्कि घोषित करने का अवसर दें। इतना बता दूं कि इस समय कल्कि को सारे पापी, दुराचारी और पाखंडी घेरने की फिराक में हैं लेकिन वो कल्कि का कुछ नुकसान कर नहीं पाएंगे। कल्कि ने कोहराम मचा रखा है। वो फटाफट निर्णय लिए जा रहे हैं और राक्षस विरादरी बेचैन है इस समय।

तानाशाह किम जोंग की ट्रेन

उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।

Courtesy Rauter


वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे।
कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।

यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।

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किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।

👉👉 This is Hindi translation of a news published in News Channel Al Jazeera. To read the source news click on the link given below.


https://www.aljazeera.com/news/2023/9/12/kim-jong-uns-moving-fortress-armoured-train-what-to-know

अब सरकारें नहीं होने देंगी आत्महत्या

लगभग 2000 लोग प्रत्येक दिन आत्महत्या करके अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन दुनिया भर की सरकारें ऐसे लोगों की सहायता करने की बजाय उन्हें दण्डित करती हैं। लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है।

Al Jazeera


प्रतिवर्ष दुनिया में 700000 (7 लाख) लोग खुदकुशी करके अपनी जान दे देते हैं। इसका अर्थ यह हुआ की 2000 लोग रोजाना आत्मघात करते हैं। ऐसे सभी लोगों को जो अपने जीवन को समाप्त कर खत्म करना चाहते हैं, उन्हें सहायता, दया सहानुभूति की जरूरत है।
दुनिया भर के 23 देशों में आत्महत्या करना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है और इसके लिए उन्हें आर्थिक दंड या कारावास की सजा दी जाती है। आत्महत्या जैसे कलंक को मिटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आत्महत्या निवारण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संघ ने मिलकर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या प्रतिषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन को दुनिया भर में यह संदेश देने के लिए चुना गया है कि खुदकुशी जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। वर्ष 2023 इसकी आस को जगाता दिख रहा है। क्योंकि अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने इसके लिए एक रूपरेखा भी तैयार कर लिया है। इसके लिए यह संगठन उन देशों पर खुदकुशी संबंधी कानूनों को बदलने का दबाव बना रहा है जहां इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
पिछले कुछ सालों में गुआना पाकिस्तान घाना और मलेशिया ने अपने यहां खुदकुशी को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। ये क्रांतिकारी कानूनी बदलाव न केवल आत्महत्या और खुदकुशी के विचार जैसे कलंक को समाप्त करने की ओर पहला कदम होगा बल्कि यह लोगों को भी इस समस्या को रोकने के लिए आगे आने में मदद करेगा। बहुत सारे देशों में, जो पहले ब्रिटिश कालोनी रह चुके हैं, खुदकुशी कानूनी अपराध माना जाता है जो कि पुराने अंग्रेजी विधान पर आधारित हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि अतीत के इन कानूनी खामियों से नाता तोड़कर एक साहसिक कदम उठाया जाए और आने वाली सदी को बेहतर बनाया जा सके। कष्टों और पीड़ा से जूझ रहे ऐसे लोग जो आत्महत्या करने की सीमा तक पहुंच जाते हैं, उन्हें भी इलाज और सहयोग पाने का अधिकार है। आत्महत्या के मामलों में सजा मिलने के डर के कारण लोग किसी से भी सहयोग या सहायता मांगने से हिचकते हैं और इसी कारण ऐसी घटनाओं की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। इसका मतलब यह हुआ कि सरकारें भी इस समस्या की गंभीरता से अनजान है और इसीलिए इसे रोकने के लिए उनके पास कोई कारगर उपाय नहीं है। यही कारण है कि गुयाना, जहां आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, इसे कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर सहमत होते हुए आत्महत्या निवारण विधेयक 2022 को पास किया जिसमें न केवल आत्महत्या को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया बल्कि इसे रोकने के उपायों का भी प्रावधान किया गया है। आज गुयाना में आत्महत्या रोकने के लिए पूरे देश में जगह-जगह केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। गुयाना के इन प्रयासों ने सेंट लूसिया, बहामास और सुरीनाम जैसे द्वीपीय और विकासशील देशों को भी खुदकुशी को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी वर्ष ब्रीजटाउन घोषणापत्र पर द्वीपीय और विकासशील देश ने हस्ताक्षर किए हैं जिसमें स्वास्थ्य संबंधी कानूनों में संशोधन और खुदकुशी को गैर कानूनी बनाने की बात कही गई है। घाना ने भी मार्च 2023 को इसे कानूनी दायरे से बाहर कर दिया। केन्या और युगांडा में भी इसे लेकर याचिकाएं दायर हो रही हैं। मलेशिया ने भी इसी वर्ष कानून बनाकर इसे सजा के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। बांग्लादेश ने भी इस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पहल को समर्थन दे रहा है। आत्महत्या के 77 फीसदी मामले कम और मध्य आय वाले देशों में होते हैं।
आत्महत्या अपराध नहीं है बल्कि मानव अधिकार है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अब समय आ गया है कि खराब मानसिक स्वास्थ्य को दण्ड देने की बजाय दुनिया उन लोगों की मदद करें जो दुखों के कारण आत्महत्या करने को प्रेरित होते हैं।

This article is a Hindi translation of news published in Al Jazeera news portal. Read the source here. Click the link below 👇👇👇

https://www.aljazeera.com/opinions/2023/9/10/from-ghana-to-guyana-hope-mounts-in-fight-against-suicide-criminalisation?sf181679475=1

Will AI Singularity Wipe Out Humanity?

Now a days there is too much hype of Artificial Intelligence in the world. Creation of a machine which simulate human intelligence is no ordinary feat.
But our discussion is, will it really serve good to mankind in the future ? Will people, industries and technology come together in harmony with nature to create a better future.

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AI is a simulation of human intelligence into machines which now has made its way into our everyday lives.
It is established that Super AI will surpasse human intelligence. It can significantly reduce errors and increase accuracy and precision, with more productivity than humans. It can work endlessly without breaks thinking much faster than humans and perform multiple tasks at a time. It won’t have any biased views.
But it includes the risk of job displacement and ethical concerns. Robots can be utilized to replace human resources and Ethics and morality can not be incorporated into them. They are completely devoid of emotions and highly practical and rational in its approach. A big disadvantage of AI is that it will not be capable of creativity in its approach as it works with pre-fed data and past experiences. AI is itself a creativity by human.
According to a study, global AI market is set to grow up to 54 percent every year. This moment is referred to as the AI singularity. So the big question being asked is, is rapid and uncontrolled growth and progress of AI eventually wipe out humanity.

AI: A Security And Privacy “Disaster.”

The most exciting thing in tech right now is AI chatbots. These chatbots are continuously being tested to see how brilliantly they could perform and expectedly they are emerging as the superheroes, tackling challenges with efficiency and precision. Many of them are showing unexpected performence. But still, there are some fields where it isn’t great in comparison to human brains.

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These chatbots receives instructions from users and then hunts the internet for answers. Now these technological miracle have started occupying wider place in various fields like Banking and Finance Industry, Media and Entertainment, Healthcare, E-commerce, Retail, Travel and Tourism, Others. Global AI Based Chatbots market looks promising in the next 5 years. Growing demand around the world had a direct impact on the growth of the AI Based Chatbots. It is expected that the market will grow magnificently during 2023 – 2030.

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Govts of the world are showing keen interest in the development. Recently China has released the chatbots publicly while Britain is planning an AI summit and the US seems to be getting tougher on chip exports.
But they’re poised to create a major new problem. Will meteoric manifestation of artificial intelligence dominate future? Will AI bring an all around transformation ? What will be it outcome, better or worse because they are ridiculously easy to misuse. AI could be used for all sorts of malicious tasks, including leaking people’s private information and helping criminals phish, spam, and scam people. Experts warn that we are heading toward a security and privacy “disaster.”

जी 20, भारत और भविष्य

भारत की राजधानी दिल्ली में होने जा रही जी -20 बैठक में हिस्सा लेने दुनिया के ताकतवर देशों के राष्ट्र प्रमुख पहुंच चुके हैं। लेकिन एक सवाल जो दिल्ली की धुंधले वातावरण में मंडरा रहा है वह यह कि क्या इस सम्मेलन से किसी उद्देश्य की पूर्ति होगी। विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं होगा।
जी 20 की शुरुआत 1999 में एशियाई देशों में आए वित्तीय संकट के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वित्त मंत्रियों और केन्द्रीय बैंकों के गवर्नरों के लिए एक मंच के रूप हुआ था। वर्ष 2007 में आए वित्तीय संकट के बाद इस समूह को राष्ट्राध्यक्ष के स्तर पर लाया गया और 2009 में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए इसे प्रमुख मंच के रुप में निर्दिष्ट किया गया। उस समय इसके सदस्य 4 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर अपनी और विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करने, व्यापार के मार्ग की रुकावटों और वित्तीय व्यवस्था में सुधार लाने पर सहमत हुए थे। तब से लेकर यह संगठन वित्तीय और आर्थिक मुद्दों, जिसमें अधिकांशत: वैश्विक होते हैं, पर चर्चा करने के लिए हर वर्ष बैठक करता है।

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2009 में ईरान का प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट की ख़बर इसकी बैठक चर्चा के केंद्र बिन्दु में रही थी। 2016 में चीन के हैनझाउ प्रांत में इसकी बैठक में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पेरिस जलवायु समझौते पर दस्तखत किए थे। हाल ही में कोरोना की महामारी के बीच वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर जी 20 को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। दुनिया की कुल आबादी के 60 फीसदी हिस्से और कुल आर्थिक उत्पादन के 80 फीसदी की हिस्सेदारी इसी संगठन के पास है। इसीलिए इस संगठन की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।

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हालांकि वर्तमान में 19 देशों वाले इस समूह, जिसमें अमेरिका, रूस, यूरोपीय संगठन और चीन जैसे विश्व के ताकतवर देश शामिल हैं, की कमी ये है कि इनके हित संरेखित नहीं होते। विल्सन सेंटर स्थित दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि जी 7 और जी 20 दोनों महत्वपूर्ण समूह हैं। जी 7 दुनिया के विकसित देशों का छोटा लेकिन प्रभावशाली संगठन है। जबकि जी 20 के सदस्यों में विकासशील, एशिया लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के देश शामिल हैं। यह समूह इस समय एक विशेष भू राजनैतिक क्षण से गुजर रहा है। कुगलमैन कहते हैं कि अगर एक मंच पर अमेरिका और उसके सहयोगी चीन तथा रूस के साथ मौजूद हैं तो दिक्कतें होना लाजिमी है। वर्तमान में रूस यूक्रेन युद्ध के चलते तनाव और भी बढ़ गये हैं। अमेरिका यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा भी कर चुका है और उस पर खड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगा रखा है। अपनी मेजबानी में भारत इस समूह के सदस्यों के बीच सहमति बनाने के लिए संघर्षरत है। इस कार्य में भारत की परेशानियां इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि रुसी राष्ट्रपति पुतिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग जी 20 की इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। खबर है कि मैक्सिको के राष्ट्रपति ए़ड्रीज मैनुअल लोपेज़ ओब्राडोर भी बैठक में हिस्सा ना लें।
इन परिस्थितियों में यदि भारत इस बैठक में संयुक्त घोषणापत्र जारी करवाने में विफल रहता है तो शर्मनाक होगा।

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क्या गर्मी नष्ट कर देगी दुनिया को…..

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने दुनिया को चेताते हुए कहा है कि विश्व की जलवायु में विकार (गड़बड़ी) शुरू हो गया है। उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संस्थान की ओर से जारी रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि उत्तरी गोलार्ध में स्थित देशों में सबसे अधिक गर्म मौसम दर्ज किया गया। विश्व मौसम विज्ञान केन्द्र ने यूरोप की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन संगठन के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि अगस्त माह जुलाई के बाद वर्ष 2023 का दूसरा सबसे गर्म महीना रहा। इस वर्ष अगस्त माह औद्योगिकीकरण के औसत तापमान से भी लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। समुद्रीय सतह का औसत तापमान में भी इस वर्ष रिकार्ड वृद्धि हुई।

गूगल

इसीलिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि इस वर्ष ग्रीष्म के ये गर्म दिन केवल हमें डरा नहीं रहे बल्कि काटने को तैयार हैं।
यूरोपीय मौसम विज्ञान केन्द्र कोपरनिकस के अनुसार 2016 के बाद 2023 सबसे अधिक गर्म वर्ष रहा।
वैज्ञानिकों ने लगातार बढ़ती गर्मी के लिए इंसानों द्वारा कोयले, तेल और प्राकृतिक गैसों के अधिकाधिक इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा एल नीनो ने इसमें अपनी भूमिका निभाई है। एल नीनो प्रशांत महासागर की गर्म हवाओं का झोंका है जो विश्व के मौसम पर अपना प्रभाव डालता है।

गूगल


कोपरनिकस मौसम विज्ञान केन्द्र के निदेशक कार्लो बुअनटेम्पो का कहना है कि हमारे पर्यावरण का गर्म होना यह संकेत देता है कि ये दशाएं न केवल उग्र हैं बल्कि ये लगातार बनी हुई हैं जिसका प्रभाव लोगों के साथ साथ पृथ्वी पर भी पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करके पता लगाया है कि 120000 वर्ष पहले जो तापमान था उससे अधिक इस समय का तापमान हो गया है। उनका मानना है कि दुनिया का तापमान इससे अधिक गर्म पहले भी रहा है लेकिन यह मानव सभ्यता के विकसित होने से पहले की बात है।
विनम्र निवेदन
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यह लेख अल जजीरा नामक एक प्रसिद्ध अरबी समाचार चैनल के अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। अंग्रेजी में लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।


https://www.aljazeera.com/news/2023/9/6/un-announces-climate-breakdown-after-record-summer-heat?traffic_source=rss&sf181556753=1

हर शिखर तिरंगा

माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाले भारतीय पर्वतारोहियों की एक टीम ने अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया है। दो दिन पहले ही चीन ने अपने नये नक्शे को जारी करते हुए उसमें अरुणाचल प्रदेश को दर्शाया था। अरमा कोंडा अरुणाचल प्रदेश के हुकुम पेट मंडल के अधूरी सीताराम राजू जिले में स्थित है।

Courtesy Times of India

अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्वतारोहियों की इस टीम को हर शिखर तिरंगा नाम दिया गया है। इसमें कुल 15 सदस्य हैं। यह उपलब्धि हासिल करने में टीम को 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे में 5545 फीट की चढ़ाई करनी पड़ी।

इस टीम का मिशन भारत के प्रत्येक राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराना है। टीम ने इसी वर्ष 1 अगस्त से उत्तर पूर्वी राज्यों से अपने मिशन की शुरुआत की थी और अब 21 राज्यों की ऊंची चोटियों पर तिरंगा लहरा चुके हैं। तेलंगाना में अपने मिशन को पूरा करने के बाद टीम ने अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश किया। टीम का अगला लक्ष्य है उड़ीसा की पर्वत चोटी देव माली को फतह करना। टीम का मिशन 15 अक्टूबर को सिक्किम की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर तिरंगा फहराने के साथ पूर्ण होगा। राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना, भारत की विविधता को दर्शाना, राष्ट्रीयता की भावना को समृद्ध करना, साहसिक कार्यों, खोज और स्थानीय जागरूकता फैलाना पर्वतारोहियों की टीम के मिशन का उद्देश्य है।

टीम का नेतृत्व नेशनल एडवेंचर अवार्ड के विजेता तेनजिंग नोर्गे कर रहे हैं। माउंट एवरेस्ट को तीन बार फतह कर चुके रणवीर सिंह भी इस टीम के सदस्य हैं। इस टीम में सेना के जवान और कुछ पर्वतारोही छात्र भी शामिल हैं। यह टीम तमिलनाडु की ऊंची चोटी डोडाबेटा पर भी तिरंगा फहरा चुकी है।

एक विश्व युद्ध और ….. निर्णय

क्षमा करें, मैं युद्ध, विध्वंस, विनाश, बर्बादी और तबाही का पैरोकार नहीं हूं। युद्ध एक विभीषिका है, मानवता के लिए अभिशाप है। लेकिन कभी कभी यह मानवता की रक्षा करने के लिए जरूरी हो जाता है। लगता है वह समय नज़दीक है। वर्तमान परिस्थितियां भी विश्व युद्ध का ही संकेत दे रही हैं। पूरी दुनिया में इस समय हलचल है। कूटनीति अपने सबसे चरम बिन्दु पर है। दुनिया दो धड़ों में विभाजित दिखाई दे रही है। कुछ देशों ने अपने अपने पक्ष भी चुन लिए हैं। यूक्रेन में लंबे समय से युद्ध चल रहा है। हजारों मारे जा चुके हैं हजारों बेघर हो चुके हैं। अमेरिका की चौधराहट को चुनौतियां मिल रही हैं। रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ साथ ईरान जैसे छोटे मुल्क भी लंबे समय से अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। भारत भी दो पक्षों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। जम्मू कश्मीर को लेकर पाकिस्तान तो अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन से भारत का निर्णायक टकराव आज नहीं तो कल होना ही है। आर्मेनिया और अज़रबैजान रुक रुक कर गोला बारूद की अदला बदली कर ही लेते हैं। इजरायल और फिलिस्तीन की जन्मजात दुश्मनी और संघर्ष बातचीत से हल नहीं होने की दूर दूर तक आस दिखाई नहीं दे रही। इथोपिया अपने पड़ोसी देश इरीट्रिया से संघर्ष कर रहा है।

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इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रों के मध्य आर्थिक प्रतियोगिता, देश के नागरिकों का जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर एक दूसरे के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां ये बताती हैं कि अब लोगों में धैर्य और सहनशीलता ख़त्म हो चुकी है। अब इंसान में सोचने और विचारने की क्षमता क्षीण हो चुकी है। अब हर कोई अपने को दूसरे से श्रेष्ठ साबित करना चाहता है। अपने विचार अपनी परंपरा अपनी जात और अपना संप्रदाय। कोई किसी को नष्ट करने की बात कर रहा है कोई किसी को। बात इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि अब एक दूसरे के धर्म को नष्ट करने की धमकियां दी जा रही हैं। सुनने में आया है कि किसी दो कौड़ी के नेता ने सनातन को नष्ट करने की इच्छा व्यक्त की है। कम से कम कोई भी सच्चा धर्म दूसरे धर्म को नष्ट करने की मंशा नहीं रखता। और अगर कोई ऐसी भावना पालता है तो प्रकृति उसे उसके धर्म के साथ खुद ही नष्ट कर देती है। ये सारी परिस्थितियां ये बताने के लिए पर्याप्त हैं कि जल्द ही पूरी दुनिया उथल पुथल के दौर से गुजरने वाली हैं।

जब इंसानी फितरत और स्वभाव इस कदर उग्र हो जाए कि वह अपनी जाति, परंपरा, संगठन, संप्रदाय के नाम पर मानवता, समाज, मूल्य, परंपरा और सिद्धांतों की तिलांजलि देने को तैयार हो तो समझ लेना चाहिए कि विध्वंस की बेला दरवाजे पर दस्तक दे रही है। धनबल से निर्बल सताया जा रहा है। असमानता की बात उठाकर लोगों को बरगलाया जा रहा। असमानता तो प्रकृति के मूल में है। एक ही मिट्टी के दो कण कभी भी एक समान नहीं हो सकते लेकिन महत्व दोनों का एक समान है। सृष्टि का सौन्दर्य ही इस बात में समाहित है कि उसकी विषमता में ही समत्व का भाव छिपा है। ज़रुरत है इसी भाव को समझने की ना कि एक दूसरे को एक दूसरे पर थोपने की। धरातल पर समानता लाने की बात मूर्खता है। हां वैचारिक और आत्मिक समानता विषमता में पहले भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। लेकिन लोगों की समझ में यह बात तब आएगी जब वे एक भयंकर कालचक्र से गुजरेंगे। मुझे ऐसा लगता है कि वह समय बहुत नजदीक है। बहुत सारे लोगों ने अपनी भविष्यवाणियों में इसका संकेत पहले ही दे चुके हैं। दुनिया को चेताने वाले आज भी सावधान कर रहे हैं। लेकिन दुनिया की समझ में यह बात आए तो बात बने।