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मनमोहन सिंह ने की मोदी सरकार की तारीफ

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारत ने किसी भी देश का पक्ष न लेकर, और अपने देश के हितों को आगे रखकर सही कदम उठाया है।

Courtesy Russia Today


यह कहना है पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। शुक्रवार को अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। भारत में चल रही जी 20 देशों की बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था के निर्धारण में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यूक्रेन के मामले में भारत सरकार ने रणनीतिक तटस्थता की नीति अपनाते हुए पश्चिमी देशों की इस अपील को खारिज कर दिया कि वह रूस के साथ अपने सारे व्यापारिक संबंधों को तोड़ ले। अपनी इस नीति के तहत भारत ने पश्चिमी देशों से मधुर संबंध बनाते हुए रूस से ईंधन, तेल, कोयला और भारी उपकरण का व्यापार कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सफलता हासिल की है।
सिंह ने आगे कहा कि जब दो ताकतवर देशों के बीच संघर्ष चल रहा हो तो ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना किसी भी देश के लिए बड़ा मुश्किल होता है। शांति की अपील करते हुए मनमोहन सिंह ने भारत के पक्ष को सही ठहराया। वह वर्ष 2004 से 2014 के बीच में भारत के प्रधानमंत्री थे।
पिछले वर्ष फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मोदी कई बार यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर चुके हैं। अपनी बातचीत में मोदी ने कहा था कि विश्व शांति के लिए उनका देश जो कुछ भी कर सकता है, उसके लिए वह तैयार हैं। मनमोहन सिंह ने कहा आगे कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तथा चीन और पश्चिमी देशों के बीच में आए दरार के कारण वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अब बदल चुकी है। नई वैश्विक व्यवस्था को बनाने में भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आजादी के बाद संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए एक बड़े और शांतिप्रिय लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को आज दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है। भारत इस वर्ष जी 20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है, और जिसकी बैठक नई दिल्ली में चल रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है जी 20 की बैठक में रूस यूक्रेन युद्ध के समाधान पर चर्चा नहीं होगी बल्कि इसकी जगह जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऋण संकट जो इस समय की विकासशील देशों की मुख्य समस्या है, चर्चा का मुख्य केंद्र होगा।
मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष चल रहे हैं और इन सभी का समाधान कूटनीति तथा बातचीत के जरिए होना चाहिए। जी 20 के सदस्य देश के रूप में या बिना जी-20 के हमारे देश का रुख भी यही होना चाहिए क्योंकि एक बंटा हुआ विश्व किसी भी चुनौती का सामना नहीं कर सकता।


यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


https://www.rt.com/india/582606-india-neutral-stance-ukraine/


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तो क्या एलन मस्क ने रोक दिया परमाणु युद्ध

पिछले वर्ष परमाणु युद्ध के डर से एलन मस्क ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए यूक्रेन के हमले को रोक दिया था। यह दावा किया गया है एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स और टेस्ला पर लिखी गई एक पुस्तक में जो में, जो शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है

Elon Musk image courtesy Russia Today


रूसी सेना के एक फ्लीट पर जब यूक्रेन ड्रोन हमला करने वाला थे, उसी समय स्टार लिंक और स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क ने कंपनी के कर्मचारियों को सिग्नल बंद करने का आदेश दे दिया था। पिछले वर्ष जब यूक्रेनी सेना ने रूसी सेना की एक टुकड़ी पर हमला करने के लिए ड्रोन भेजे तो बीच रास्ते में ही इनका संपर्क टूट गया। वाल्टर इजाकसन की लिखी पुस्तक जो अगले सप्ताह प्रकाशित होगी, में यह दावा किया गया है।

इसमें कहा गया है कि एलन मस्क ने गुप्त तरीके से स्पेस एक्स के इंजीनियरों को क्रीमिया के आसपास के इलाकों में स्टार लिंक के सिग्नल को बंद करने का आदेश दिया था। मस्क को डर था कि यूक्रेनी हमले के जवाब में रूस मिनी पर्ल हार्बर जैसा परमाणु हमला कर देगा। पुस्तक में यह दावा भी किया गया है कि यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफार्मेशन मिनिस्टर मिखाइल फेदरोव ने मस्क को संदेश भेजकर पुनः सिग्नल शुरू करने का अनुरोध किया था जिसे मस्क ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यूक्रेन युद्ध में हद से आगे बढ़ रहा है और अपनी रणनीतिक हार को न्योता दे रहा है। इस असफल ड्रोन हमले की ख़बर सबसे पहले अमेरिकी समाचार पत्र न्यू यॉर्क टाइम्स में जुलाई में प्रकाशित की गई थी हालांकि इसमें सभी घटनाओं का जिक्र नहीं किया गया था। जुलाई 2022 से अब तक स्पेस एक्स ने कीव को बीस हजार से अधिक स्टार लिंक के सिग्नल सर्विस स्टेशन दिए हैं ताकि यूक्रेनी नागरिकों को इंटरनेट और संचार सुविधाएं मिल सकें। इजाकसन ने पुस्तक में मस्क की बातचीत का एक अंश प्रकाशित किया है जिसमें मस्क कह रहे हैं कि वह इस युद्ध में कहां शामिल हैं? स्टार लिंक को किसी युद्ध का हिस्सा बनने के लिए नहीं बनाया गया है। यह इसलिए बनाया गया है ताकि लोग नेटफ्लिक्स जैसी सेवाओं का आनंद ले सकें, आनलाइन स्कूल की सुविधा उठा सकें। किसी ड्रोन हमले को सफल बनाने के लिए इसे नहीं बनाया गया है।
क्रीमिया पर इस असफल हमले के बाद मस्क ने पेंटागन से कहा था कि अब स्टार लिंक यूक्रेन को अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करेगा, क्योंकि उनके और पेंटागन के बीच की बातें समाचार चैनल सीएनएन को लीक हो रहीं थीं। हालांकि बाद में मस्क ने ट्वीट कर यूक्रेन में स्टार लिंक की सेवाएं जारी रखने की बात कही थी।
इजाकसन प्रसिद्ध समाचार पत्रिका टाइम के संपादक रह चुके हैं। इसके अलावा वह तुलान विश्व विद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर हैं और बेंजामिन फ्रैंकलिन, अल्बर्ट आइंस्टीन, हेनरी किसिंजर और स्टीव जॉब्स जैसी महान हस्तियों की जीवनी भी लिख चुके हैं।

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यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


https://www.rt.com/news/582543-musk-starlink-crimea-attack/


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Will AI Singularity Wipe Out Humanity?

Now a days there is too much hype of Artificial Intelligence in the world. Creation of a machine which simulate human intelligence is no ordinary feat.
But our discussion is, will it really serve good to mankind in the future ? Will people, industries and technology come together in harmony with nature to create a better future.

Image courtesy Google


AI is a simulation of human intelligence into machines which now has made its way into our everyday lives.
It is established that Super AI will surpasse human intelligence. It can significantly reduce errors and increase accuracy and precision, with more productivity than humans. It can work endlessly without breaks thinking much faster than humans and perform multiple tasks at a time. It won’t have any biased views.
But it includes the risk of job displacement and ethical concerns. Robots can be utilized to replace human resources and Ethics and morality can not be incorporated into them. They are completely devoid of emotions and highly practical and rational in its approach. A big disadvantage of AI is that it will not be capable of creativity in its approach as it works with pre-fed data and past experiences. AI is itself a creativity by human.
According to a study, global AI market is set to grow up to 54 percent every year. This moment is referred to as the AI singularity. So the big question being asked is, is rapid and uncontrolled growth and progress of AI eventually wipe out humanity.

AI: A Security And Privacy “Disaster.”

The most exciting thing in tech right now is AI chatbots. These chatbots are continuously being tested to see how brilliantly they could perform and expectedly they are emerging as the superheroes, tackling challenges with efficiency and precision. Many of them are showing unexpected performence. But still, there are some fields where it isn’t great in comparison to human brains.

Image courtesy Google

These chatbots receives instructions from users and then hunts the internet for answers. Now these technological miracle have started occupying wider place in various fields like Banking and Finance Industry, Media and Entertainment, Healthcare, E-commerce, Retail, Travel and Tourism, Others. Global AI Based Chatbots market looks promising in the next 5 years. Growing demand around the world had a direct impact on the growth of the AI Based Chatbots. It is expected that the market will grow magnificently during 2023 – 2030.

Image courtesy Google

Govts of the world are showing keen interest in the development. Recently China has released the chatbots publicly while Britain is planning an AI summit and the US seems to be getting tougher on chip exports.
But they’re poised to create a major new problem. Will meteoric manifestation of artificial intelligence dominate future? Will AI bring an all around transformation ? What will be it outcome, better or worse because they are ridiculously easy to misuse. AI could be used for all sorts of malicious tasks, including leaking people’s private information and helping criminals phish, spam, and scam people. Experts warn that we are heading toward a security and privacy “disaster.”

तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है – यूक्रेन


यूक्रेन के रक्षा प्रमुख एलेक्सी डानीलोव ने कहा कि कीव और मास्को के बीच जारी संघर्ष को दो देशों के बीच युद्ध समझना भूल है। दरअसल यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है।

Courtesy twitter


यूक्रेन की राजधानी कीव में मंगलवार को बात करते हुए उन्होंने कहा कि जारी संघर्ष के बीच भी नाटो यूक्रेन को एक सदस्य के रूप में अपनाना चाहता है और हम इसे मजबूत बनाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई यह समझता है कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू नहीं हुआ है तो वह गलतफहमी में जी रहा है। तीसरा विश्व युद्ध अब और सक्रिय हो रहा है। यह युद्ध और जटिल होता जा रहा है। जब वह ये बातें कह रहे थे तो उनके बगल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के निदेशक डेविड पेट्रास भी मौजूद थे।

Image Courtesy Al Jazeera

पेट्रास ने अपने संबोधन में कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वह ऐसा संघर्ष देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस ना तो ज्ञान के क्षेत्र में प्रभावशाली और ना ही युद्ध मैदान में प्रदर्शन के क्षेत्र में। बावजूद इसके उन्होंने एक उत्कृष्ट रक्षा तंत्र विकसित कर लिया है जिसे भेदना आसान नहीं होगा। मंगलवार को ही रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में दावा किया गया था कि दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध में अब तक यूक्रेन के 66000 सैनिक मारे जा चुके हैं और उनके लगभग 7600 हथियारों के जखीरे बर्बाद हो चुके हैं। यूक्रेन को इस युद्ध में अब तक कोई महत्वपूर्ण लाभ नहीं मिला है।


हालांकि यूक्रेन ने कुछ गांवों पर अपना अधिकार जमा लिया है लेकिन ये सभी गांव रूसी रक्षा सीमा से बहुत दूर स्थित हैं। रूसी राष्ट्रपति लंबे समय से यह कहते आए हैं कि यूक्रेन में जारी संघर्ष अमेरिका और नाटो द्वारा रूस के विरुद्ध छेड़ा गया छद्म युद्ध है और पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को बड़ी मात्रा में हथियारों की आपूर्ति और गुप्त सूचनाओं का आदान प्रदान यह बताता है कि वास्तव में वे भी इस युद्ध का हिस्सा हैं।
रूस नाटो को विरोधी खेमे के रूप में देखता है और इसके पूर्व में विस्तार का विरोध करता है। यूक्रेन की अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य संगठन का हिस्सा बनने की लालसा ही रूसी हमले के पीछे मुख्य वजह है।‌

Image courtesy: Russia Today

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जी 20, भारत और भविष्य

भारत की राजधानी दिल्ली में होने जा रही जी -20 बैठक में हिस्सा लेने दुनिया के ताकतवर देशों के राष्ट्र प्रमुख पहुंच चुके हैं। लेकिन एक सवाल जो दिल्ली की धुंधले वातावरण में मंडरा रहा है वह यह कि क्या इस सम्मेलन से किसी उद्देश्य की पूर्ति होगी। विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं होगा।
जी 20 की शुरुआत 1999 में एशियाई देशों में आए वित्तीय संकट के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वित्त मंत्रियों और केन्द्रीय बैंकों के गवर्नरों के लिए एक मंच के रूप हुआ था। वर्ष 2007 में आए वित्तीय संकट के बाद इस समूह को राष्ट्राध्यक्ष के स्तर पर लाया गया और 2009 में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए इसे प्रमुख मंच के रुप में निर्दिष्ट किया गया। उस समय इसके सदस्य 4 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर अपनी और विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करने, व्यापार के मार्ग की रुकावटों और वित्तीय व्यवस्था में सुधार लाने पर सहमत हुए थे। तब से लेकर यह संगठन वित्तीय और आर्थिक मुद्दों, जिसमें अधिकांशत: वैश्विक होते हैं, पर चर्चा करने के लिए हर वर्ष बैठक करता है।

Courtesy Google


2009 में ईरान का प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट की ख़बर इसकी बैठक चर्चा के केंद्र बिन्दु में रही थी। 2016 में चीन के हैनझाउ प्रांत में इसकी बैठक में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पेरिस जलवायु समझौते पर दस्तखत किए थे। हाल ही में कोरोना की महामारी के बीच वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर जी 20 को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। दुनिया की कुल आबादी के 60 फीसदी हिस्से और कुल आर्थिक उत्पादन के 80 फीसदी की हिस्सेदारी इसी संगठन के पास है। इसीलिए इस संगठन की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।

Courtesy India Today


हालांकि वर्तमान में 19 देशों वाले इस समूह, जिसमें अमेरिका, रूस, यूरोपीय संगठन और चीन जैसे विश्व के ताकतवर देश शामिल हैं, की कमी ये है कि इनके हित संरेखित नहीं होते। विल्सन सेंटर स्थित दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि जी 7 और जी 20 दोनों महत्वपूर्ण समूह हैं। जी 7 दुनिया के विकसित देशों का छोटा लेकिन प्रभावशाली संगठन है। जबकि जी 20 के सदस्यों में विकासशील, एशिया लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के देश शामिल हैं। यह समूह इस समय एक विशेष भू राजनैतिक क्षण से गुजर रहा है। कुगलमैन कहते हैं कि अगर एक मंच पर अमेरिका और उसके सहयोगी चीन तथा रूस के साथ मौजूद हैं तो दिक्कतें होना लाजिमी है। वर्तमान में रूस यूक्रेन युद्ध के चलते तनाव और भी बढ़ गये हैं। अमेरिका यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा भी कर चुका है और उस पर खड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगा रखा है। अपनी मेजबानी में भारत इस समूह के सदस्यों के बीच सहमति बनाने के लिए संघर्षरत है। इस कार्य में भारत की परेशानियां इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि रुसी राष्ट्रपति पुतिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग जी 20 की इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। खबर है कि मैक्सिको के राष्ट्रपति ए़ड्रीज मैनुअल लोपेज़ ओब्राडोर भी बैठक में हिस्सा ना लें।
इन परिस्थितियों में यदि भारत इस बैठक में संयुक्त घोषणापत्र जारी करवाने में विफल रहता है तो शर्मनाक होगा।

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👉👉👉👉 This is a Hindi translation of an article published in Arabic News Al Jazeera. You are welcome to access the English Version by clicking the following link 👇👇👇

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कृष्ण जन्माष्टमी विशेष

आज कृष्ण जन्माष्टमी है। इस पवित्र अवसर पर एक छोटी सी कविता प्रस्तुत है। आशा करता हूं कि आपको पसंद आएगा। कृपया Like और Share करना ना भूलें। विनम्र निवेदन है कि ब्लॉग को Subscribe जरुर करें। धन्यवाद।

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हरि चर्चा आनन्द है

जग परिचर्चा व्यस्त

जो कृष्ण नाम का जाप करें

मन केवल उनका मस्त।

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जब रावण जग में आता है

तब धर्म नहीं बच पाता है

तब धीर वीर गंभीर रूप धर

एक राम जगत में आता है।

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अपने और पराए की

जब बात जगत में होती है

अनाचार और पाप मिटाने

श्री कृष्ण की लीला होती है।

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जब पापी की बढ़ती पीड़ा से

धरती रोज कराहेगी

फिर धर्म चक्र की रक्षा को

भगवान की शक्ति आएगी।

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अब कलयुग नाच रहा नंगा

है कौन यहां जो ले पंगा

अब धर्म बचाने हे गिरधर

जल्दी आओ लेकर डंडा।

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क्या गर्मी नष्ट कर देगी दुनिया को…..

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने दुनिया को चेताते हुए कहा है कि विश्व की जलवायु में विकार (गड़बड़ी) शुरू हो गया है। उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संस्थान की ओर से जारी रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि उत्तरी गोलार्ध में स्थित देशों में सबसे अधिक गर्म मौसम दर्ज किया गया। विश्व मौसम विज्ञान केन्द्र ने यूरोप की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन संगठन के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि अगस्त माह जुलाई के बाद वर्ष 2023 का दूसरा सबसे गर्म महीना रहा। इस वर्ष अगस्त माह औद्योगिकीकरण के औसत तापमान से भी लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। समुद्रीय सतह का औसत तापमान में भी इस वर्ष रिकार्ड वृद्धि हुई।

गूगल

इसीलिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि इस वर्ष ग्रीष्म के ये गर्म दिन केवल हमें डरा नहीं रहे बल्कि काटने को तैयार हैं।
यूरोपीय मौसम विज्ञान केन्द्र कोपरनिकस के अनुसार 2016 के बाद 2023 सबसे अधिक गर्म वर्ष रहा।
वैज्ञानिकों ने लगातार बढ़ती गर्मी के लिए इंसानों द्वारा कोयले, तेल और प्राकृतिक गैसों के अधिकाधिक इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा एल नीनो ने इसमें अपनी भूमिका निभाई है। एल नीनो प्रशांत महासागर की गर्म हवाओं का झोंका है जो विश्व के मौसम पर अपना प्रभाव डालता है।

गूगल


कोपरनिकस मौसम विज्ञान केन्द्र के निदेशक कार्लो बुअनटेम्पो का कहना है कि हमारे पर्यावरण का गर्म होना यह संकेत देता है कि ये दशाएं न केवल उग्र हैं बल्कि ये लगातार बनी हुई हैं जिसका प्रभाव लोगों के साथ साथ पृथ्वी पर भी पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करके पता लगाया है कि 120000 वर्ष पहले जो तापमान था उससे अधिक इस समय का तापमान हो गया है। उनका मानना है कि दुनिया का तापमान इससे अधिक गर्म पहले भी रहा है लेकिन यह मानव सभ्यता के विकसित होने से पहले की बात है।
विनम्र निवेदन
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यह लेख अल जजीरा नामक एक प्रसिद्ध अरबी समाचार चैनल के अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। अंग्रेजी में लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।


https://www.aljazeera.com/news/2023/9/6/un-announces-climate-breakdown-after-record-summer-heat?traffic_source=rss&sf181556753=1

32 मर्द 1 महिला और 12 मर्डर

जी हां, सुनने में अजीब लगता है लेकिन यह एक सच्ची कहानी है। यह कहानी है काजुको हिगा नामक एक महिला की जिसे अनतहन की रानी के नाम से भी जाना जाता है।

Courtesy Medium


बात उस समय की है जब दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था। प्रशांत महासागर से गुजर रहा एक जहाज अमेरिकी हमले से डूब गया। इस जहाज में सवार केवल 32 लोग किसी तरह अपनी जान बचा सके और इसी महासागर के एक निर्जन टापू पर वे किसी तरह पहुंच सके। टापू पर रहने वाले लोग पहले ही इसे छोड़कर जा चुके थे लेकिन एक किसी कारणवश नहीं जा सकी थी। और यह महिला इन 32 जवान मर्दों के बीच फंस गई।


आप कल्पना कर सकते हैं उस महिला के लिए उनके बीच कैसी जंग छिड़ी होगी। सभी उस महिला का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते थे। यह महिला जिस भी पुरुष की ओर आकर्षित होती अगले ही दिन उसकी हत्या हो जाती क्योंकि इस वीरान द्वीप पर एक अकेली औरत प्यार, घृणा कामुकता और हत्या का कारण बन चुकी थी।

Courtesy Facebook


इस महिला को पाने के लिए उन 32 पुरुषों में रोज लड़ाईयां होती। कुछ ही दिनों में इन 32 में से 12 की हत्या हो चुकी थी। इन हत्याओं के बाद बाकी बचे लोगों ने महसूस किया कि इस एक अकेली औरत की वजह से उनके बीच रोज खूनी संघर्ष होता है और उनके कुछ साथियों को जान भी गंवानी पड़ी तो क्यों ना इसे ही खत्म कर दिया जाए। ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी।
तो उन सभी ने उसे मारने की योजना बनाई लेकिन काजुको हीगा इनके चंगुल से बच निकली। जब उसने अपनी कहानी मीडिया वालों को बताई तो वह रातों रात सेलेब्रिटी बन गई।
अनतहन प्रशांत महासागर के मैरियाना द्वीप समूह का एक छोटा सा हिस्सा है जो लगभग 9 किलोमीटर की लंबाई और 4 किमी चौड़ाई में फैला हुआ है।
पहले यह द्वीप स्पेन की कालोनी थी जिसे उन्होंने जर्मनी को बेंच दिया था। बाद में जर्मनी ने इसे जापान को बेंच दिया। इस समय यहां जापान के लोग बड़े स्तर पर नारियल की खेती करते हैं।

Courtesy Medium


You can access the English version of the story by just clicking the following link 👇👇👇
https://short-history.com/queen-of-anatahan-cf596f7e651c

एक विश्व युद्ध और ….. निर्णय

क्षमा करें, मैं युद्ध, विध्वंस, विनाश, बर्बादी और तबाही का पैरोकार नहीं हूं। युद्ध एक विभीषिका है, मानवता के लिए अभिशाप है। लेकिन कभी कभी यह मानवता की रक्षा करने के लिए जरूरी हो जाता है। लगता है वह समय नज़दीक है। वर्तमान परिस्थितियां भी विश्व युद्ध का ही संकेत दे रही हैं। पूरी दुनिया में इस समय हलचल है। कूटनीति अपने सबसे चरम बिन्दु पर है। दुनिया दो धड़ों में विभाजित दिखाई दे रही है। कुछ देशों ने अपने अपने पक्ष भी चुन लिए हैं। यूक्रेन में लंबे समय से युद्ध चल रहा है। हजारों मारे जा चुके हैं हजारों बेघर हो चुके हैं। अमेरिका की चौधराहट को चुनौतियां मिल रही हैं। रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ साथ ईरान जैसे छोटे मुल्क भी लंबे समय से अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। भारत भी दो पक्षों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। जम्मू कश्मीर को लेकर पाकिस्तान तो अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन से भारत का निर्णायक टकराव आज नहीं तो कल होना ही है। आर्मेनिया और अज़रबैजान रुक रुक कर गोला बारूद की अदला बदली कर ही लेते हैं। इजरायल और फिलिस्तीन की जन्मजात दुश्मनी और संघर्ष बातचीत से हल नहीं होने की दूर दूर तक आस दिखाई नहीं दे रही। इथोपिया अपने पड़ोसी देश इरीट्रिया से संघर्ष कर रहा है।

Courstey Google

इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रों के मध्य आर्थिक प्रतियोगिता, देश के नागरिकों का जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर एक दूसरे के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां ये बताती हैं कि अब लोगों में धैर्य और सहनशीलता ख़त्म हो चुकी है। अब इंसान में सोचने और विचारने की क्षमता क्षीण हो चुकी है। अब हर कोई अपने को दूसरे से श्रेष्ठ साबित करना चाहता है। अपने विचार अपनी परंपरा अपनी जात और अपना संप्रदाय। कोई किसी को नष्ट करने की बात कर रहा है कोई किसी को। बात इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि अब एक दूसरे के धर्म को नष्ट करने की धमकियां दी जा रही हैं। सुनने में आया है कि किसी दो कौड़ी के नेता ने सनातन को नष्ट करने की इच्छा व्यक्त की है। कम से कम कोई भी सच्चा धर्म दूसरे धर्म को नष्ट करने की मंशा नहीं रखता। और अगर कोई ऐसी भावना पालता है तो प्रकृति उसे उसके धर्म के साथ खुद ही नष्ट कर देती है। ये सारी परिस्थितियां ये बताने के लिए पर्याप्त हैं कि जल्द ही पूरी दुनिया उथल पुथल के दौर से गुजरने वाली हैं।

जब इंसानी फितरत और स्वभाव इस कदर उग्र हो जाए कि वह अपनी जाति, परंपरा, संगठन, संप्रदाय के नाम पर मानवता, समाज, मूल्य, परंपरा और सिद्धांतों की तिलांजलि देने को तैयार हो तो समझ लेना चाहिए कि विध्वंस की बेला दरवाजे पर दस्तक दे रही है। धनबल से निर्बल सताया जा रहा है। असमानता की बात उठाकर लोगों को बरगलाया जा रहा। असमानता तो प्रकृति के मूल में है। एक ही मिट्टी के दो कण कभी भी एक समान नहीं हो सकते लेकिन महत्व दोनों का एक समान है। सृष्टि का सौन्दर्य ही इस बात में समाहित है कि उसकी विषमता में ही समत्व का भाव छिपा है। ज़रुरत है इसी भाव को समझने की ना कि एक दूसरे को एक दूसरे पर थोपने की। धरातल पर समानता लाने की बात मूर्खता है। हां वैचारिक और आत्मिक समानता विषमता में पहले भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। लेकिन लोगों की समझ में यह बात तब आएगी जब वे एक भयंकर कालचक्र से गुजरेंगे। मुझे ऐसा लगता है कि वह समय बहुत नजदीक है। बहुत सारे लोगों ने अपनी भविष्यवाणियों में इसका संकेत पहले ही दे चुके हैं। दुनिया को चेताने वाले आज भी सावधान कर रहे हैं। लेकिन दुनिया की समझ में यह बात आए तो बात बने।