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कल्कि करेंगे संहार

पौराणिक मान्यतानुसार भगवान विष्णु के दसवें व अंतिम अवतार भगवान कल्कि के इस धरा पर अवतरण होने का समय चल रहा है। प्रभु कल्कि का प्रकट होना अभी शेष है। ग्रंथों में कलियुग के अंतिम चरण में कल्कि अवतार के आने की भविष्यवाणी की गई है। लेकिन कलयुग के समयकाल को लेकर विद्वानों में मतभेद है। अभी कलयुग का कौन सा चरण चल रहा है किसी को कुछ नहीं पता।

हालांकि भगवान कल्कि की सम्भावित जन्मतिथि श्रावण शुक्ल षष्ठी को कल्कि जयंती के रूप में मनाने का प्रचलन भी है। एक मान्यता के अनुसार जब कलयुग अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु अपने 64 कलाओं से युक्त दसवें अवतार भगवान कल्कि अवतार के रूप में इस पृथ्वी पर अवतरित होंगे और कलयुग का अंत कर एक नई सृष्टि का सृजन कर मनुष्य को सनातन वैदिक धर्म पर आरूढ़ कराएंगे।


भगवान विष्णु का यह अवतार निष्कलंक अवतार होगा। कल्कि भगवान का स्वरूप अर्थात सगुण रूप परम दिव्य होता है। वे श्वेत अश्व पर सवार हैं, उनका रंग गोरा है जो क्रोध में काला हो जाता है। पीले वस्त्र धारण किए उनके हृदय पर श्रीवत्स का चिह्न अंकित होगा और गले में कौस्तुभ मणि होगी। उनके हाथों में दो तलवारें होंगी।


कलयुग के घोर अंधकार के युग में जब लोग धर्म और विश्वास को नजर अंदाज़ कर देते हैं और अपनी भौतिकवादी महत्वाकांक्षा और लालच में अपने उद्देश्य को भूल जाते हैं तब भ्रष्ट राजाओं की हत्या के बाद, भगवान कल्कि मनुष्यों के दिलों में भक्ति का भाव जगाएंगे। लोगों को धर्म के मार्ग का अवलंबन और शुद्धता का पालन करना सिखाएंगे ताकि सनातन वैदिक धर्म पर लोगों का विश्वास पुनः वापस आ जाए।
कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कई सदियों से हिंदुओं के बीच लोकप्रिय है। कई लोग मानते हैं कि कल्कि का अवतार हो चुका है और वे दुनिया में शांति और समृद्धि स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कल्कि का अवतार अभी तक नहीं हुआ है और वे भविष्य में अवतार लेंगे।

आखिर कब होगा विश्व युद्ध

पिछले तीन चार सालों से दुनिया में विश्व युद्ध को लेकर बड़ी उत्सुकता है। इसे लेकर तरह तरह के विचार सोशल मीडिया पर आते रहते हैं। लोग बड़ी उत्सुकता से इन खबरों को पढ़ते भी हैं। कभी कभी तो ऐसा लगता है कि जैसे कल ही शुरू हो जाएगा विश्व युद्ध। दुनिया में जब भी कोई बड़ी राजनैतिक हलचल होती है तो महासंग्राम की चर्चा तेज हो जाती है। लेकिन हर बार विश्व युद्ध की आहट शांति से गुजर जाती है।

मैं यह नहीं कह रहा कि विश्व युद्ध हो‌ क्योंकि इससे किसी को कोई लाभ नहीं होगा। इससे हानि ही हानि होगी। तबाही होगी, भुखमरी होगी, दुःख होंगे पीड़ा होगी। लेकिन किसी के चाहने या न चाहने से कुछ होता नहीं। जब जो होना होगा हो जाएगा। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विश्व युद्ध अवश्यंभावी है।

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मुझे लगता है युद्ध ही एकमात्र स्थाई समाधान रह गया है। विश्व के कुछ देश किसी भी कीमत पर अपनी जिद से पीछे नहीं हटने वाले और ऐसे ही राष्ट्रों की भूमिका प्रमुख होगी तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कराने में। यद्यपि वास्तविकता तो यह है कि विश्व युद्ध शुरू हो चुका है ‌लेकिन इसकी विधिवत घोषणा नहीं हुई है। आर्मेनिया अज़रबैजान हो या फिलिस्तीन और इजराइल या फिर कोरियाई संकट हर जगह विश्व युद्ध की एक चिंगारी जल रही है।

चीन की विस्तारवादी नीति और ताइवान पर उसकी नजर, यूरोप में इस्लाम के विरुद्ध पनपती भावनाएं, ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी, नेपाल में राजशाही को लेकर आंदोलन, हूती विद्रोहियों द्वारा मचा तांडव, इस्लामिक देशों की इजरायल के विरुद्ध एकजुटता आदि सभी घटनाएं अघोषित जारी विश्व युद्ध के ही कारण हैं। गुटबाजी तेज हो गई है तो कूटनीतिक चालें भी तेज हो गई है। हर कोई अपने अपने हित साधने के लिए दूसरे मुल्कों को अपने पाले में लाने की भरपूर कोशिश कर रहा है ताकि उसे पर्याप्त रणनीतिक लाभ सके।

लेकिन सवाल फिर वही है कि आखिर विधिवत रूप से यह कब शुरू होगा। कोई भी बड़ा देश इसे शुरू करने का संकट मोल लेने को तैयार नहीं दिख रहा लेकिन वे इससे अपने आप को बचा कर रख पाएंगे ऐसा भी नहीं प्रतीत होता। खैर हमें इंतजार रहेगा विश्व युद्ध का। क्योंकि हमें एक सुंदर और बेहतरीन दुनिया की तलाश है। खुदा हाफ़िज़।

कल्कि अवतार यहां हैं

आजकल कल्कि अवतार को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। खास कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यू ट्यूब पर कुछ ज्यादा ही शोरगुल है। कल्कि अवतार को लेकर सबके अपने अपने विचार हैं। कुछ तो इस तरह अपने विचारों को रखते हैं मानो वो कल्कि के प्रवक्ता हों। और कुछ तो इस तरह से आते हैं जिन्हें देखकर ही लगता है कि बस करो ये तो मसखरें हैं जो हमारा मनोरंजन करने आए हैं।

यू ट्यूब पर एक मोहतरमा आती है। देखने में खूबसूरत लगती हैं। साथ श्रृंगार करके आती हैं। खुद को मा लक्ष्मी, मां काली और मां भगवती का अवतार घोषित करती हैं। ये सबको अपनी शरण में आमंत्रित कर रही हैं।

एक हैं राकेश शर्मा जी जो खुद को भक्त प्रहलाद मानते हैं। इनका भी मानना है कि भगवान धरा पर अवतरित हो चुके हैं ताकि पाप और पापियों का अंत हो सके। ये टैरो कार्ड रीडर भी हैं और भविष्यवाणी भी करते रहते हैं। वैसे कल्कि अवतार के प्रेमियों के बीच बहुत लोकप्रिय भी हैं।

https://youtube.com/@ambrance1112?si=VPiSSADVB-DjP4d1

एक और सज्जन हैं जो खुद को कल्कि अवतार का एक प्रमुख पात्र मानते हैं। ये सज्जन हैं डाक्टर विलास जगदाले। ये महोदय यू ट्यूब पर ही आजकल धुनी रमाते हैं, योग और समाधि सिखाते हैं। इन्हें लगता है कि दुनिया का साम्राज्य एक दिन इनके हाथों में होगा और ये न्याय करेंगे। अपने वीडियो में पिछले कई सालों से बताते आ रहे हैं कि कोई बहुत बड़ी तबाही आएगी और सभी पापियों का नाश हो जाएगा।

https://youtube.com/@DrVilasJagdaleG?si=w31gjrOOZP3jbtIE

वहीं उड़ीसा के सत्यभांजा नामक एक व्यक्ति भी कल्कि अवतार को लेकर रोज कुछ न कुछ विचार रखते रहते हैं। आजकल किसी पुलिन पांडा नाम के ज्योतिषी को लेकर ये आने वाले समय के बारे में बातें बताते हैं। बताते चलें कि पुलिन पांडा जी की पहचान जाने माने ज्योतिषी की है। ख़ैर हमें क्या।

https://youtube.com/@SatyaBhanjaHindi?si=JRjPqZ97RS_HRK6S

चलते चलते एक और महोदय के बारे में बताते चलें। इनके वीडियो देखकर लगता है मानो ये खुद भगवान कल्कि के साथ ही अवतार हुए हैं। इन्हें कल्कि के बारे में सब कुछ पता है। इनका दावा है कि आने वाले समय में भगवान कल्कि सारे पापियों का सफाया कर देंगे। इन महोदय के चैनल का लिंक है

https://youtu.be/WzMeloEvsLs?si=2Tqzc21VXAlmqbqL

लेकिन असल बात तो ये है कि असली कल्कि अवतार का सही पता तो मेरे पास है। दुर्भाग्य ये है कि न तो मैं यू ट्यूब चैनल चलाता हूं और ना ही मैं तामझाम की ख्वाहिश ही रखता हूं। हां, लेकिन यह सच है कि असली कल्कि का पता मेरे पास है। बताता इसलिए नहीं क्योंकि दुनिया उस पर विश्वास करेगी नहीं। हालांकि कुछ लोगों ने कल्कि अवतार के बारे में खुलकर बताया है लेकिन लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। इसलिए बेहतर यही है कि वक्त का इंतजार करें और कल्कि को खुद ही कल्कि घोषित करने का अवसर दें। इतना बता दूं कि इस समय कल्कि को सारे पापी, दुराचारी और पाखंडी घेरने की फिराक में हैं लेकिन वो कल्कि का कुछ नुकसान कर नहीं पाएंगे। कल्कि ने कोहराम मचा रखा है। वो फटाफट निर्णय लिए जा रहे हैं और राक्षस विरादरी बेचैन है इस समय।

क्या पाक में होगा तख्तापलट

पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां इतनी भयानक है कि जल्दी ही सैन्य तख्तापलट हो सकता है। बदतर आर्थिक हालत और राजनीतिक उथल-पुथल देश में संवैधानिक संकट का संकेत दे रहा है।

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दरअसल पाक के आर्मी चीफ जनरल हासिम मुनीर की कुछ तस्वीरें उभर कर सामने आ रही हैं जिनसे पाकिस्तान में संभावित तख्तापलट के संकेत मिल रहे हैं। इसी माह वे पांच दिन अमेरिकी दौरे पर थे जहां पर वे कई प्रमुख लोगों से मुलाकात करते हैं। अपने अमेरिकी दौरे के दौरान मुनीर अमेरिकी विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकेन के साथ मुलाकात की जबकि सामान्य: ऐसा होता नहीं है। भला सेना प्रमुख विदेश सचिव से मुलाकात क्यों करेंगे। खैर जो तस्वीर सबसे ज्यादा परेशान कर रही है वो है जनरल मुनीर और विक्टोरिया न्यूलैंड की मुलाकात की तस्वीरें।
दरअसल न्यूलैंड नाम की महिला ने जब जब किसी देश का भ्रमण किया तो वहां तख्तापलट पलट हो गया। यूक्रेन, म्यांमार, जार्जिया, कजाखस्तान के संदर्भ में न्यूलैंड की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में पाक आर्मी चीफ से इसकी एक घंटे की मुलाकात कहीं न कहीं पाकिस्तान में किसी बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम की ओर संकेत कर रही है।

आसमान में दो सूर्य निकलने वाला है

संत अच्युतानंद दास ने भविष्य मालिका के नाम का ग्रंथ लिखा है। बताते हैं कि आप भगवान श्री कृष्ण के साथी सुदामा जी के अवतार थे। अच्युतानंद दास ने 318 पुस्तकें भविष्य के विषय पर लिखी है। इन पुस्तकों को अच्युतानंद मलिका के नाम से जाना जाता है। भविष्य मालिका के अनुसार धरती 3 चरणों से गुजरेगी। पहले में कलयुग का अंत, दूसरे में महाविनाश और तीसरा एक नया युग लेकर आएगा।

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इस पुस्तक की प्रमुख भविष्यवाणियां बेहद डरावनी हैं। इसके अनुसार धरती की धुरी बदल जाएगी और कई भूंकप आएंगे। आसमान में दो सूर्य निकलने का प्रतीत होंगे जोकि आसमानी होगा और बंगाल की खाड़ी में गिरेगा तथा ओडिशा जलमग्न हो जाएगा। समुद्र का जलस्तर बढ़ जाएगा और जगन्नाथ मंदिर की 22वीं सीढी तक पानी आ जाएगा। प्राकृतिक आपदाओं के कारण धरती पर 7 दिनों तक अंधेरा रहेगा। यह घटना 2022 से 2029 के बीच होगी। भविष्य मालिका के अनुसार 2025 के बाद का समय एक विभिषिका के समान होगा और वहीं लोग बचेंगे तो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलेंगे। लोग कीट- पंतंगों की तरह मरेंगे और विश्व की जनसंख्या घटकर 134 करोड़ से 64 करोड़ ही रह जाएगी। चीन तबाह हो जाएगा। रूस हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा। 

तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने पर हो जाएगी जो 6 साल 6 माह तक चलेगा। 13 मुस्लिम देशों के साथ मिलकर चीन भारत पर हमला करेगा। भारत की इसमें विजय होगी और भारत अपने दुश्मनों को खत्म कर विश्‍व गुरु बन जाएगा।

जेल में बाहर निकला डान

नेपाल में 19 वर्ष जेल तक जेल की सजा काटने के बाद हत्यारोपी 79 वर्षीय हत्यारोपी चार्ल्स गुरमुख शोभराज इस समय स्वतंत्रता का जश्न मना रहा है। क्रिसमस के 1 दिन बाद ही उसने मेरे मोबाइल पर एक संदेश भेजा। यह संदेश उसने पेरिस के एक होटल में आराम फरमाते समय भेजा। उसका संदेश इस प्रकार था। “सुबह के 6 बज रहे हैं। काफी सालों बाद मैं बाथटब में स्नान कर रहा हूं। बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं।

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कुछ घंटे बाद ही बॉक्सिंग डे के अवसर पर उसका नाश्ता करते हुए एक फोटोग्राफ संदेश मुझे मिला। सफेद रंग की प्लेट में पनीर की तीन तरह की सब्जियां, मसालेदार गोश्त की सब्जी और आलू बुखारा साथ ब्लैक कॉफी रखा हुआ था। संदेश में लिखा था कि मैं बेहतरीन नाश्ता कर रहा हूं।
3 दिन पहले ही शोभराज, जोकी एक फ्रांसीसी नागरिक है, नेपाल के काठमांडू सेंट्रल जेल की जेल से रिहा हुआ था। 1975 में दो सैलानियों की हत्या करने के जुर्म में उसे यह सजा दी गई थी। ऐसा नहीं है कि वह पहली बार जेल गया था। शोभराज ने अपने जीवन के 40 वर्ष जेल में ही गुजारे हैं। वह ग्रीस और तेहरान की जिलों में भी सजा काट चुका है। भारत में भी उसे हत्या समेत कई अपराधों में 21 वर्ष जेल की सजा हो चुकी है। 1990 में जब वह तिहाड़ जेल में बंद था, तब उससे मेरी पहली मुलाकात हुई थी। उस समय मैं दिल्ली में एक क्राइम रिपोर्टर था और अक्सर मैं उसका इंटरव्यू/ साक्षात्कार किया करता था।
1970 में शोभराज हिप्पी यात्रियों (हिप्पी ट्रेल या ओवरलैंड 1950 के दशक के मध्य से 1970 के दशक के अंत तक हिप्पी उपसंस्कृति के सदस्यों और अन्य लोगों द्वारा की गई एक ओवरलैंड यात्रा को दिया गया नाम है जो यूरोप और पश्चिम एशिया से दक्षिण एशिया के माध्यम से यात्रा करता है जैसे कि अफगानिस्तान , पाकिस्तान, भारत , नेपाल , श्रीलंका , बांग्लादेश से थाईलैंड तक, हिप्पी ट्रेल वैकल्पिक पर्यटन का एक रूप था) का पीछा किया करता था, उनसे दोस्ती करके उनके भोजन या पेय पदार्थ में अचेत करने वाला पदार्थ या नींद की दवा मिलाकर उनके पैसे और पासपोर्ट लूट लेता था।
इस तरह शोभराज लूटे हुए पासपोर्ट का प्रयोग दूसरे देशों की यात्राओं करने में करता था और वहां भी वह इसी तरह के अपराधों को अंजाम दिया करता था। इस तरह शोभराज धूर्त आदमी के रूप में मशहूर हो गया क्योंकि वह बड़ी आसानी से अधिकारियों को चकमा देकर फरार हो जाता था। भारत, पाकिस्तान, नेपाल और थाईलैंड में 10 लोगों की हत्या का आरोप उस पर लगा है। हालांकि माना जाता है कि उसने इससे अधिक लोगों की हत्या की है, लेकिन उसे सजा सिर्फ दो ही मामलों में हो पाई है। शोभराज और उसके अपराधों के ज्यादातर किस्से 1970 से 1976 के बीच के हैं जो मीडिया के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा है। इस पर लिखी गई किताबों की रिकार्ड बिकी हैं। बीबीसी ने नेटफ्लिक्स पर धूर्त आदमी (The Serpent) नाम से डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है जो बहुत लोकप्रिय हुई।
अब जेल से रिहा होने के बाद शोभराज अपने जीवन से जुड़ी कहानियों को बेचने की फिराक में है। उसके जीवन पर बनी एक जीवनी वृतांत और डॉक्यूमेंट्री हाल ही में रिलीज की गई है। वह यह नहीं बताता कि उसने अपने जीवन से जुड़ी जानकारी को बेचकर कितने रुपए कमाए हैं। लेकिन वह कहता है कि वह अपने साथ कुछ कैमरामैन को लेकर पूरी दुनिया घूमना चाहता है ताकि अपने जीवन से जुड़ी हुई घटनाओं को रिकार्ड कर फिल्म और सीरियल बनाने वालों को बेच सके। उसने उन सभी लोगों को नोटिस भेज कर हर्जाना वसूलने की धमकी दी है जिन्होंने उसे अपनी किताबें, फिल्मों, सीरियल या डॉक्यूमेंट्री में गलत तरीके से प्रस्तुत किया है।
29 वर्षीय अमेरिकी छात्र कोनी जो ब्रोनजिक और 26 वर्षीय कनाडाई लारेंट कैरी की हत्या के जुर्म में शोभराज को नेपाल में 20 वर्ष के कारावास की सजा हुई है। हालांकि इन दोनों की हत्या 1975 में हुई थी लेकिन शोभराज को सजा मिलने में 28 वर्ष लगे यानी उसे 2023 में सजा सुनाई गई है। 2019 में सजा काटने के दौरान जेल में ही उसके दिल का आपरेशन हुआ और तभी से वह नेपाल की सुप्रीम अदालत में स्वास्थ्य आयु और जेल में अच्छे व्यवहार के आधार पर रिहाई के लिए याचिकाएं दायर करता रहा। पिछले साल दिसंबर माह में उसे रिहा भी कर दिया गया।
क्रिसमस दिवस पर फोन पर दिए गए एक साक्षात्कार में उसने मुझे बताया कि उसने अपने जीवन में कभी किसी की हत्या नहीं की। उसने बताया कि उसने पैसे लूटे, पासपोर्ट चुराकर प्रयोग किया लेकिन किसी की हत्या नहीं की।
शोभराज कहता है कि उसे हत्या के आरोप में फंसाया गया है और 2023 से पहले वह कभी नेपाल गया ही नहीं। खुद को पीड़ित होने का दावा करते हुए कहा कि इसके लिए भ्रष्ट न्यायिक व्यवस्था जिम्मेदार है। अरबी समाचार चैनल अल जजीरा से बातचीत करते हुए उसने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति के माध्यम से वह नेपाल सरकार को कानूनी नोटिस भेजेगा। उसने कहा कि वह नेट फ्लिक्स और बीबीसी को भी नोटिस भेजेगा।
यह लेख अल जजीरा की न्यूज़ पोर्टल पर प्रकाशित अंग्रेजी खबर का आंशिक हिन्दी अनुवाद है। अंग्रेजी लेख सुपर्णा वर्मा का है। इसमें मेरे द्वारा कुछ भी जोड़ा नहीं गया है। मूल खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। अगर आप कमेंट कर बताएं तो संपूर्ण खबर का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करने को तत्पर हूं।
https://www.aljazeera.com/features/2023/8/25/charles-sobhraj-convicted-murderer-has-a-new-story-to-tell

बाढ़ लीला ने हजारों को लीला

दुनिया इस समय समुद्री बाढ़ के भयानक प्रकोप का सामना कर रही है। इस आपदा में हजारों लोग मारे जा रहे हैं और लाखों लोग बेघर हो रहे हैं। लीबिया में आई भीषण समुद्री बाढ़ के कारण अब तक 20000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। परिस्थितियां इतनी भयावह हैं की लाशों को ढूंढना भी मुश्किल हो रहा है।

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सवाल केवल लीबिया का नहीं है। सवाल है, जलवायु परिवर्तन और आने वाले समय में इसके दुष्परिणामों का।

केवल सितंबर माह के शुरुआती 11 दिनों में दुनिया के आठ देशों में भीषण बारिश और बाढ़ ने 8 देशों में भयंकर तबाही मचाई। इन देशों में तुर्की, ग्रीस, ब्राजील, अमेरिका, स्पेन, चीन, हांगकांग और लीबिया शामिल हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के बदलते रुख के पीछे सबसे बड़ी वजह है जलवायु परिवर्तन। बदलती जलवायु का असर वैश्विक तापमान और मौसम, दोनों पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर का तापमान और मॉनसून अस्थिर हो रहा है। दुनियाभर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और मौसम में अनियमितता देखने को मिल रही है। इस वर्ष तो गर्मी ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।
ठंडे देशों में अचानक से गर्मी शुरू हो गई है, रेगिस्तान में बाढ़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। 1902 के बाद से मौसम की दूसरी सबसे बड़ी चरम घटनाएं 2023 में देखी जा रही हैं। मौसमी घटनाओं के जरिए प्रकृति ये कहने की कोशिश कर रही है कि हमें पर्यावरण पर ध्यान देने की जरूरत है।

तानाशाह किम जोंग की ट्रेन

उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।

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वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे।
कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।

यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।

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किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।

👉👉 This is Hindi translation of a news published in News Channel Al Jazeera. To read the source news click on the link given below.


https://www.aljazeera.com/news/2023/9/12/kim-jong-uns-moving-fortress-armoured-train-what-to-know

अब सरकारें नहीं होने देंगी आत्महत्या

लगभग 2000 लोग प्रत्येक दिन आत्महत्या करके अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन दुनिया भर की सरकारें ऐसे लोगों की सहायता करने की बजाय उन्हें दण्डित करती हैं। लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है।

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प्रतिवर्ष दुनिया में 700000 (7 लाख) लोग खुदकुशी करके अपनी जान दे देते हैं। इसका अर्थ यह हुआ की 2000 लोग रोजाना आत्मघात करते हैं। ऐसे सभी लोगों को जो अपने जीवन को समाप्त कर खत्म करना चाहते हैं, उन्हें सहायता, दया सहानुभूति की जरूरत है।
दुनिया भर के 23 देशों में आत्महत्या करना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है और इसके लिए उन्हें आर्थिक दंड या कारावास की सजा दी जाती है। आत्महत्या जैसे कलंक को मिटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आत्महत्या निवारण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संघ ने मिलकर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या प्रतिषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन को दुनिया भर में यह संदेश देने के लिए चुना गया है कि खुदकुशी जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। वर्ष 2023 इसकी आस को जगाता दिख रहा है। क्योंकि अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने इसके लिए एक रूपरेखा भी तैयार कर लिया है। इसके लिए यह संगठन उन देशों पर खुदकुशी संबंधी कानूनों को बदलने का दबाव बना रहा है जहां इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
पिछले कुछ सालों में गुआना पाकिस्तान घाना और मलेशिया ने अपने यहां खुदकुशी को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। ये क्रांतिकारी कानूनी बदलाव न केवल आत्महत्या और खुदकुशी के विचार जैसे कलंक को समाप्त करने की ओर पहला कदम होगा बल्कि यह लोगों को भी इस समस्या को रोकने के लिए आगे आने में मदद करेगा। बहुत सारे देशों में, जो पहले ब्रिटिश कालोनी रह चुके हैं, खुदकुशी कानूनी अपराध माना जाता है जो कि पुराने अंग्रेजी विधान पर आधारित हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि अतीत के इन कानूनी खामियों से नाता तोड़कर एक साहसिक कदम उठाया जाए और आने वाली सदी को बेहतर बनाया जा सके। कष्टों और पीड़ा से जूझ रहे ऐसे लोग जो आत्महत्या करने की सीमा तक पहुंच जाते हैं, उन्हें भी इलाज और सहयोग पाने का अधिकार है। आत्महत्या के मामलों में सजा मिलने के डर के कारण लोग किसी से भी सहयोग या सहायता मांगने से हिचकते हैं और इसी कारण ऐसी घटनाओं की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। इसका मतलब यह हुआ कि सरकारें भी इस समस्या की गंभीरता से अनजान है और इसीलिए इसे रोकने के लिए उनके पास कोई कारगर उपाय नहीं है। यही कारण है कि गुयाना, जहां आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, इसे कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर सहमत होते हुए आत्महत्या निवारण विधेयक 2022 को पास किया जिसमें न केवल आत्महत्या को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया बल्कि इसे रोकने के उपायों का भी प्रावधान किया गया है। आज गुयाना में आत्महत्या रोकने के लिए पूरे देश में जगह-जगह केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। गुयाना के इन प्रयासों ने सेंट लूसिया, बहामास और सुरीनाम जैसे द्वीपीय और विकासशील देशों को भी खुदकुशी को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी वर्ष ब्रीजटाउन घोषणापत्र पर द्वीपीय और विकासशील देश ने हस्ताक्षर किए हैं जिसमें स्वास्थ्य संबंधी कानूनों में संशोधन और खुदकुशी को गैर कानूनी बनाने की बात कही गई है। घाना ने भी मार्च 2023 को इसे कानूनी दायरे से बाहर कर दिया। केन्या और युगांडा में भी इसे लेकर याचिकाएं दायर हो रही हैं। मलेशिया ने भी इसी वर्ष कानून बनाकर इसे सजा के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। बांग्लादेश ने भी इस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पहल को समर्थन दे रहा है। आत्महत्या के 77 फीसदी मामले कम और मध्य आय वाले देशों में होते हैं।
आत्महत्या अपराध नहीं है बल्कि मानव अधिकार है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अब समय आ गया है कि खराब मानसिक स्वास्थ्य को दण्ड देने की बजाय दुनिया उन लोगों की मदद करें जो दुखों के कारण आत्महत्या करने को प्रेरित होते हैं।

This article is a Hindi translation of news published in Al Jazeera news portal. Read the source here. Click the link below 👇👇👇

https://www.aljazeera.com/opinions/2023/9/10/from-ghana-to-guyana-hope-mounts-in-fight-against-suicide-criminalisation?sf181679475=1

एशिया को जंग का मैदान नहीं बनने देंगे।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने एशिया प्रशांत के देशों से अपील की है कि उन्हें विदेशी शक्तियों के हाथों का खिलौना नहीं बनना चाहिए। एशियान संगठन के सदस्य देशों के बीच एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणपूर्वी अर्थव्यवस्थाओं को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहिए।

Courtesy Russia Today

दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन एशियान की बैठक को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से अपील की कि वे आपसी संघर्षों तथा मतभेदों को दूर करें तथा एकजुट होकर न्यायोचित और पारस्परिक लाभप्रद सहयोग के लिए कार्य करें। उन्होंने आगे कहा कि एशियान के सदस्य राष्ट्र इस बात पर सहमत हैं कि वे किसी भी ताकतवर देश के हाथ की कठपुतली बनकर इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र नहीं बनने देंगे, क्योंकि यह विध्वंसक होगा

उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र का नेतृत्व करना होगा और शांति, स्थिरता तथा समृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। एशियाई देशों के बीच बढ़ रही प्रतिद्वंदिता और इसके विनाशकारी परिणामों को लेकर उन्होंने सचेत किया है। एशियाई देशों में सहयोग बढ़ाने के लिए उन्होंने एक योजना तैयार करने की भी बात कही, जो प्रासंगिक हो और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप हो।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख प्रबोवो शुबियांतो अमेरिकी रक्षा प्रमुख से मुलाक़ात करने अमेरिकी दौरे पर गए हुए हैं जहां अमेरिका की ओर से मीडिया को संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है जिसमें चीन और रूस के खिलाफ बातें कही गई है

हालांकि बाद में शुबियांतो ने इस वक्तव्य से दूरी बनाते हुए कहा कि इंडोनेशिया दोनों देशों के साथ दोस्ताना संबंध चाहता है। उन्होंने कहा कि कोई संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया गया है और ना ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ है। मैं सिर्फ इस बात पर बल देना चाहता हूं कि चीन के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं। दोनों देश एक दूसरे का सम्मान करते हैं और उनके बीच पारस्परिक समझ भी अच्छी है। इस समय मैं अमेरिका में हूं लेकिन मैं रुस के साथ भी दोस्ती चाहता हूं।
इस समय यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनातनी है तथा समय-समय पर अमेरिका और चीन के बीच भी रह रह कर विवाद गहराता रहता है। इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में वह रूस और चीन, दोनों देशों का दौरा करेंगे


शीत युद्ध की छाया में एशियाई देशों के संगठन एशियान की स्थापना हुई थी और वर्तमान में इसमें 10 सदस्य देश शामिल है जिनकी कुल आबादी 600 मिलियन है। आर्थिक सहयोग इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। इसी सप्ताह के दौरान एशियाई देश पूर्वी एशिया सम्मेलन में फिर मिलेंगे जिसमें रूस चीन भारत जापान और अमेरिका भी शामिल होंगे

👉👉 यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


https://www.rt.com/news/582446-indonesia-asean-destructive-rivalry/


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