Category: news economy financial management

गुफाओं का शिकारी

मेघालय निवासी ब्रायन डी खारप्रान आजकल चर्चा में हैं। ख़ासकर तब से जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मन की बात के 104वें संस्करण में उनके नाम का जिक्र किया है। चर्चा के पीछे उत्तर पूर्वी राज्यों में उनके द्वारा खोजी गयी गुफाएं हैं। स्पेलोलॉजी के प्रति खारप्रान की दिलचस्पी ने उन्हें प्रसिद्ध कर दिया है। स्पेलोलॉजी का मतलब होता है गुफाओं का वैज्ञानिक अध्ययन। अपने प्रयासों के दौरान 76 वर्षीय खारप्रान ने मेघालय एडवेंचर एसोसिएशन की स्थापना भी की है। उन्हें इसकी प्रेरणा कहानियों की किताबों से मिली।

Image courtesy Google: Brian D Kharoran

वर्षों पहले 1964 में एक स्कूल विद्यार्थी के रूप में उन्होंने अपनी पहली खोज शुरू की थी। इसके बाद 1990 में उन्होंने अपने एक मित्र की सहायता से मेघालय एडवेंचर एसोसिएशन की स्थापना की ताकि मेघालय में मौजूद गुप्त गुफाओं की खोज की जा सके। अपने इस संस्था के सहयोग से उत्तर पूर्वी राज्यों में उन्होंने अब तक 1700 से अधिक गुफाओं की खोज की है और इन गुफाओं को उन्होंने विश्व मानचित्र पर भी दर्शा दिया है। बकौल प्रधानमंत्री मेघालय में विश्व की लंबी और गहरी गुफाएं मौजूद है। खारप्रान ने इन गुफाओं के इकोसिस्टम का भी अध्ययन किया है। इन गुफाओं में मौजूद फौना (एक प्रकार की वनस्पति) का भी अध्ययन किया जिनमें से कुछ बहुत ही दुर्लभ प्रजाति की हैं जो बहुत ही कम स्थानों पर पाई जाती हैं। उनके इस प्रयास ने मेघालय को खोज के एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थान के रूप विकसित करने की आवश्यकता को उजागर किया है।


मेघालय
मेघालय को बादलों का घर और पूर्व का स्काटलैंड भी कहा जाता है। मेघालय में भारत की सबसे अधिक गुफाएं हैं। पहले यह आसाम का ही भाग था। बाद में गारो, खासी और जयंतियां के पहाड़ी जिलों को काटकर मेघालय की स्थापना की गई।

एक युवा लड़की की डायरी

एनी फ्रैंक एक यहूदी लड़की थी जो अपनी मृत्यु के बाद दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गई। उसे यह प्रसिद्धि तब मिली जब उसकी मृत्यु के बाद उसकी लिखी डायरी प्रकाशित हुई। इस डायरी में उसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों के डर से छिपकर रहने के दौरान हुए अनुभवों का सहेजा है। उसकी कहानी यहूदियों के विनाश की इंसानी कीमत और मानवीय भावना के पलटाव की एक प्रतीक बन गई।


एनी फ्रैंक का जन्म 12 जून 1929 को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में हुआ था। नाजियों के सत्ता में आने के बाद उसका परिवार 1933 में नीदरलैंड चला गया। उसके पिता को फ्रैंक ने आम्सडर्म में व्यापार के क्षेत्र में कदम रखा। एनी फ्रैंक और उसकी बहन की शिक्षा दीक्षा यहीं शुरू हुई।


1942 में जब नाजियों द्वारा यहूदियों के ज़ुल्म और अत्याचार बढ़ने लगे तो एनी का परिवार ओटो फ्रैंक के आफिस के पीछे बने एक गुप्त मकान में छिपकर रहने लगा। उनके साथ लाने पेल्स नाम का एक और यहूदी परिवार रहने लगा। इस कमरे को जो सबसे ऊपरी मंजिल पर था, लोग गुप्त भवन के रूप में जानते थे।
इसी दौरान एनी ने डायरी लिखनी शुरू कर दी थी। यह डायरी उसने अपनी एक काल्पनिक मित्र जिसका नाम किट्टी था, को संबोधित करते हुए लिखी थी। अपनी इस डायरी में उसने बड़ी साफगोई से अपने विचारों, भावनाओं, अवलोकन और एकान्तवास में रहने की चुनौतियों को उजागर किया है। यह डायरी उसकी बौद्धिक जिज्ञासा, जीवन के सुनहरे स्वपन्नों और भावनात्मक संघर्षों से भी पर्दा उठाती है। लेकिन अगस्त 1944 में किसी ने नाजियों से इनकी मुखबिरी कर दी। इन्हें गिरफ्तार कर नजरबंदी शिविर में भेज दिया गया।
एनी को जर्मनी के एक कैंप में भेज दिया गया जहां 1945 में उसकी मृत्यु हो गई।
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद जब जर्मन हार चुके थे तो एक व्यक्ति के द्वारा एनी फ्रैंक की डायरी उसके पिता ओटो फैंक को मिली। ओटो ने अपनी लड़की की याद में “गुप्त भवन” के नाम से इस डायरी को प्रकाशित कराया। बाद में कई भाषाओं में “एक युवा लड़की की डायरी” के नाम से इस डायरी का अनुवाद हुआ। यह डायरी अब दुनिया में बहुत अधिक पढ़ी जाने वाली और अनुवादित पुस्तक बन चुकी है। उस गुप्त भवन को अब एनी फ्रैंक म्यूजियम के रूप में विकसित किया गया है जहां हर वर्ष लाखों लोग एनी फ्रैंक के बीते लम्हों की एक झलक पाने की आस में जाते हैं।

Courtesy twitter:Anne Frank

“अब मैं दुनिया का विनाशक, मृत्यु बन चुका हूं।”

जूलियस राबर्ट ओपेनहाइमर जोकि जे राबर्ट ओपेनहाइमर के नाम से मशहूर हैं, एक बहुत ही जाने माने भौतिक विज्ञान शास्त्री हैं। इनकी कहानी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विकसित एटम बम से जुड़ी हुई है। 22 अप्रैल 1904 को जन्मे ओपेनहाइमर ने बचपन से भौतिक शास्त्र में अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। उन्होंने हावर्ड यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया और बाद में जर्मनी के गाटिंगटन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और वहीं से डाक्ट्रेट की उपाधि हासिल की। ओपेनहाइमर अपनी काबिलियत कें दम पर अपने समय के प्रमुख सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री बन गये। क्वांटम मैकेनिज्म और क्वांटम फील्ड के क्षेत्र में उनकी महती भूमिका है।


लेकिन उनके जीवन में नाटकीय मोड़ तब आया जब वो मैनहाटन परियोजना से जुड़े। यह एक गुप्त योजना थी जिसके अंतर्गत दुनिया के पहले एटम बम को विकसित किया जाना था। योजना के वैज्ञानिक निदेशक के रूप में ओपेनहाइमर ने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र से बौद्धिक लोगों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ताकि एटम बम को बनाया जा सके। उन्होंने न्यू मैक्सिको के लास एलमास प्रयोगशाला का नेतृत्व किया जहां पर ऐतिहासिक खोज और विकास की परियोजनाएं बनाई जाती थीं।
एटम बम बनाने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल और नैतिक रूप से चुनौतीभरा कार्य था क्योंकि इससे दुनिया में बहुत बड़े विनाश के होने का खतरा था। लेकिन ओपेनहाइमर के नेतृत्व ने इस परियोजना में आने वाली सभी चुनौतियों और अभियांत्रिकी समस्याओं पर विजय प्राप्त की। यद्यपि ओपेनहाइमर इस योजना के प्रति पूर्णतया समर्पित थे फिर भी वे इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि इस घातक हथियार के नैतिक परिणाम क्या होंगे। 1945 में दुनिया के पहले एटम बम के सफल परीक्षण के तुरंत बाद ओपेनहाइमर ने प्रसिद्ध हिन्दू धर्म शास्त्र भगवत् गीता के एक श्लोक के अर्थ को व्यक्त किया था जो इस प्रकार है।
“अब मैं दुनिया का विनाशक मृत्यु बन चुका हूं।”
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ओपेनहाइमर एटामिक ऊर्जा और हथियारों पर नियंत्रण की वकालत करने लगे। अपने राजनैतिक विचारधारा और वामपंथी झुकाव के कारण उन्हें कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ा और 1954 में उनको मिली सरकारी सुरक्षा वापस ले ली गई। यहीं से उनके जीवन में कठिनाईयों का दौर शुरू हो गया और विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान पर राजनीति विवाद भारी पड़ने लगे।

Julius Robert Oppenheimer


अपने जीवन में आने वाले इन संघर्षों के बावजूद वे अपना अध्ययन अध्यापन और खोज संबंधी कार्यों का निष्पादन करते रहे। फिर भी भौतिकी के क्षेत्र में वह प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में बने रहे और अपने योगदान के लिए उन्हें बहुत सारे सम्मान भी प्राप्त हुए। 18 फ़रवरी 1967 को उनका देहावसान हो गया लेकिन अपने पीछे वे वैज्ञानिक खोजों और परमाणविक हथियारों के विकास की विरासत छोड़ गए।

All images Courtesy: Twitter

This blog is a Hindi translation of a article from twitter. You can read the original article by accessing the following link 👇👇👇

A Hero Of Humanity

There are a lot of stories of heroes who lived for humanity and obeying the rules of God. Today In this blog I will expose you one such Hero who saved the lives of thousands in the 2nd World War by following the voice of soul.

Chiune Sugihara. Image courtesy: twitter account historic vid

Chiune Sugihara, a Japanese diplomat who served as the vice-consul of the Japanese Consulate in Kaunas, Lithuania during World War II.

Defying the orders of his superiors, he issued transit visas to over 6,000 Jews to enter in Japan.

He worked tirelessly nearly one month, writing visas by hand until the consulate was closed.

Image courtesy: twitter account historic vid

He later said, “I may have to disobey my government, but if I don’t, I would be disobeying God. I knew that somebody would surely complain about me in the future. But I myself thought this would be the right thing to do. There is nothing wrong in saving many people’s lives….The spirit of humanity, philanthropy…neighborly friendship…with this spirit, I ventured to do what I did, confronting this most difficult situation—and because of this reason, I went ahead with redoubled courage.”

Sugihara died in July 31st, 1986 at the age of 86. He was recognized as Righteous Among the Nations by Israel in 1985.

The lesson that we should take from him is that Recognize the inherent value in every person, our shared humanity transcends all barriers. This story is a call to see ourselves in others and act with compassion, even in the face of great risk.

विनाशलीला

पिछले सौ वर्षों का अगर विश्लेषण किया जाए तो यह बात आसानी से समझ में आती है कि दुनिया को अगर किसी देश ने सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वो अमेरिका है। बात चाहे दुनिया के आर्थिक तंत्र की हो या विनाश के हथियारों का या फिर हमारे जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली आधुनिक तकनीक तंत्र के विकास का, अमेरिका का प्रभाव हर क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। लेकिन अजीब बात यह है कि उसके प्रभाव का परिणाम यह है कि आज पूरी दुनिया में उथल पुथल है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं लुढ़कने की कगार पर हैं। कोई भी उपाय कारगर साबित नहीं हो रहा है और आदमी उग्रता की ओर चलने को विवश हो रहा है। दुनिया भर के देश एक दूसरे से लड़ने के लिए विश्व युद्ध की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

दुनिया भर के देशों के लोग अब इस बात की उम्मीद खो रहे हैं कि उनके नेता उनकी बढ़ती हुई परेशानियां और समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं। बावजूद इसके आशाएं और उम्मीदें जिंदा हैं लेकिन ऐसी उम्मीदें बहुत गहरा जख्म देने के बाद ही जगती हैं। अब विश्व ऐसे संकट, विनाश और कष्टों के सबसे कठिन दौर से गुजरने का अनुभव करेगा जो उसने शायद ही कभी देखा होगा। इस समय जो भी घटनाएं घटित हो रही हैं वे सभी दैवीय हैं जिनमें से कई घटित भी हो चुकी हैं, जैसे कि 11 सितंबर की घटना, वर्ष 2008 में अर्थव्यवस्थाओं का पतन और कोविड महामारी। पिछले 70 वर्षों में हमने कई बार दुनिया के अंत की चेतावनी सुनी हैं।

आने वाले समय में सबसे पहले जिसका पतध होगा वो देश अमेरिका होगा और जो युद्ध होगा वो मानव जाति का अंतिम संग्राम साबित होगा।

हालांकि इससे पहले की विनाशलीला शुरू हो, ईश्वर चेतावनी जरुर देता है। लेकिन उस विनाशलीला के बाद वो उम्मीद भी जिंदा होगी जो अभी खत्म हो चुकी है। और इसी के साथ इंसान एक बेहतर विश्व में प्रवेश करेगा।

लेकिन उस नये संसार में प्रवेश करने से पहले मानव जाति को विध्वंस और विलोपन के कष्ट को सहन करना होगा। हालांकि ईश्वर ऐसा होने नहीं देंगे। वह अवश्य ही इस विनाशलीला में हस्तक्षेप करेंगे और दुनिया में अपना साम्राज्य स्थापित करेंगे।

This article is a Hindi translation of book “The Fall Of The United States” authored by RONALD WEINLAND. You can access the English version by clicking the following link ,👇👇👇

https://www.falloftheus.com/

Financial Stress: Mental Health

Significant increase in prices, growing inflation rate and stagnation of salaries has toughened the lives of many people across the world.

People are facing the anxiety of surviving the economic realities of the country. While struggling it is easy to overlook mental wellbeing.

How will I deal these

Financial stresses makes our mental health vulnerable such as anxiety, depression, shame, loneliness, poor sleep, poor self-esteem, anger, fear, substance abuse. It may lead to suicidal thoughts in extreme cases. Research reveals that people who experience financial burdens have a higher chance of suffering from depression and alcohol dependence. Financial burden also affects the effectiveness of individual resulting in the form of fatigue, depression, sadness, stress and so on.

Caring Mental Health

One way to care for mental health is to connecting family and friends. It will be helpful finding someone with similar situations in dealing with financial crisis. Having the company of a person who are actively looking to better situation will make our character strong. It’s better having some good support than no support.

While trying to find a way to mitigate the effects of the financial burden is to visit the counseling unit. Skilled professionals can help by giving practical advice on how to handle situations. They can enhance the emotional and psychological states of the mind. There are a lot of councilling centres.

चंद्रयान-3 की लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब पर विश्व में सबसे अधिक देखा जाने वाला इवेंट बना

ISRO Chandrayaan-3 Live: भारत ने फिर इतिहास रचा। अबकी बार यूट्यूब की लाइव स्ट्रीमिंग ने रिकॉर्ड बनाया है। इंडिया के चंद्रयान-3 ने चाँद पर सफल लैंडिंग कर की है। इसी के साथ, भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना है। वहीं, इसरो के लाइव स्ट्रीमिंग लिंक ने भी यूट्यूब पर इतिहास रच दिया। चंद्रयान-3 के लैंडिंग की लाइव स्ट्रीमिंग को 8.06 मिलियन लोगों ने एक साथ देखा, जिसने यूट्यूब इतिहास के सभी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया। चंद्रयान-3 की लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब पर विश्व में सबसे अधिक देखा जाने वाला इवेंट बना

ISRO Chandrayaan-3 Live: यूट्यूब पर अब तक ब्राजील बनाम दक्षिण कोरिया के फुटबॉल मैच की लाइव स्ट्रीमिंग सबसे ज्यादा 6.15 मिलियन लोगों ने एक साथ देखी थी। जिसे 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की लाइव स्ट्रीमिंग ने ध्वस्त कर दिया। वहीं, तीसरे नंबर पर ब्राजील बनाम क्रोएशिया का फुटबॉल मैच है, जिसे 5.2 मिलियन लोगों ने एक साथ देखा था। 

ISRO Chandrayaan-3 Live: इसरो के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले सब्सक्राइबर्स की संख्या 2.68 मिलियन यानी करीब 26 लाख थी, जो कि अब सफल लैंडिंग के बाद 35 लाख हो गई। लैंडिंग का लाइव प्रसारण करीब एक घंटे 11 मिनट तक चला और महज एक घंटे में इसरो के नौ लाख सब्सक्राइबर्स बढ़ गए। इसरो के लाइव प्रसारण को सब्सक्राइबर्स से तीन गुना से अधिक लोगों ने एक साथ देखा। 

इसरो के यूट्यूब चैनल पर 2.68 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं, लेकिन महज 9 मिनट के अंदर ही चंद्रयान-3 की लाइव लैंडिंग को देखने के लिए चैनल से 2.9 मिलियन लोग जुड़ गए।

  • 13 मिनट में 3.3 मिलियन लोग लाइव प्रसारण देखने जुड़े।
  • 17वें मिनट में लगभग 40 लाख लोग लाइव जुड़ गए।
  • 31 मिनट के बाद इसरो के यूट्यूब चैनल पर 5.3 मिलियन यानी 53 लाख से ज्यादा लोग लाइव जुड़े। 
  • 45 मिनट के बाद 66 लाख लोग लाइव प्रसारण देख रहे थे। इसके बाद कुछ ही मिनटों में दर्शकों की संख्या 80 लाख पहुंच गई।

Financial Literacy

In today’s financially tough atmosphere it has become very vital to learn financial literacy concept. In India, educational curricula focus on traditional academic subjects like Math, Science and Language Arts etc. But the growing sense of the importance of financial literacy is turning this sense. The National Education Policy (NEP) of 2020 advocates for the incorporation of financial literacy at all educational levels. India has a substantial population which lacks financial literacy. Most of them are experiencing debt, poverty and financial exclusion for not having the skilled financial management ability. Economy is getting increasingly intricate day by day and the best way to cope up with this situation demands grasping of financial management skills. Financial literacy will empower individuals to make prudent financial decisions to enable him to a improved financial well-being.

So Indian education system needs introduction of a dedicated financial literacy courses spanning from primary school to university levels.