दुनियाभर में एलियन को लेकर अक्सर कई दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन मानव सभ्यता के इतिहास में आज एक निर्णायक क्षण घटित हुआ। लैटिन अमेरिक के देश मेक्सिको की संसद में दो रहस्यमय शव रखे गए हैं। दावा किया जा रहा है कि ये एलियन की लाशें हैं। एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान एलियन के इन दो शवों का प्रदर्शन किया गया ताकि लोग उन्हें देख सकें। दावा है कि ममी बन चुकीं यह लाशें 1000 साल पुरानी हैं। इन्हें पेरू के कूस्को से हासिल किया गया है।
Google
एलियन की इन लाशों का आधिकारिक अनावरण यूएफओ विशेषज्ञ जैमी मौसान ने किया। मौसान ने कहा कि रेडियोकार्बन डेटिंग के आधार पर डीएनए साक्ष्य हासिल करने में सफलता हासिल की है। एक वेबसाइट से बातचीत में उन्होंने कहा कि शैवाल की खान में मिले नमूने जो जीवाश्म में बदल गए हैं, हमारी पृथ्वी के विकास के हिस्सा नहीं हैं। मौसान एक पत्रकार भी हैं और लंबे समय से परग्रही जीवों के बारे में जांच कर रहे हैं।
अश्लील फिल्म देखना अपराध नहीं है, क्योंकि यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है। और इसमें हस्तक्षेप करना निजता में दखल देने के समान है।पोर्नोग्राफी सदियों से प्रचलन में थी।
Courtesy Google
यह कहना है केरल उच्च न्यायालय का। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के कृत्य को अपराध घोषित करना किसी व्यक्ति की निजता में दखल और उसकी निजी पसंद में हस्तक्षेप करना होगा। केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पीवी कुन्हिकृष्णन ने भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 292 के तहत 33 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ अश्लीलता के मामले को रद्द करते हुए यह निर्णय दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी प्राइवेसी में अश्लील फोटो या वीडियो देखना अपने आप में आईपीसी की धारा 292 (अश्लीलता) के तहत अपराध नहीं है। इसी तरह, किसी व्यक्ति द्वारा अपनी प्राइवेसी में मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखना भी आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध नहीं है। न्यायमूर्ति कुन्हिकृष्णन ने कहा कि यदि कोई किसी अश्लील वीडियो या फोटो को प्रसारित या वितरित करने या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहा है, तो वह आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध बनता है।
Courtesy twitter
लेकिन हमें इस प्रश्न पर निर्णय लेना है कि यदि कोई व्यक्ति दूसरों को दिखाए बिना अपने निजी समय में अश्लील वीडियो देखता है, तो क्या यह अपराध की श्रेणी में आएगा ? वर्ष 2016 में कोच्ची के अलुवा महल में सड़क के किनारे अपने मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखते हुए पुलिस ने …………..को पकड़ा था। आरोपी व्यक्ति ने एफआईआर और उसके संबंध में चल रही अदालती कार्यवाही को रद्द करने की याचिका दायर की थी। माता पिता को सचेत करते हुए न्यायमूर्ति ने कहा कि नए डिजिटल युग ने इसे बच्चों के लिए भी अधिक सुलभ बना दिया है। माता-पिता द्वारा बच्चों को खुश करने के लिए इंटरनेट वाले मोबाइल फोन देने के प्रति भी आगाह करते हुए कहा कहा कि माता-पिता को इसके खतरे के बारे में पता होना चाहिए तथा अपनी उपस्थिति में बच्चों को मोबाइल फोन दें। उन्होंने आगे कहा कि अगर नाबालिग बच्चे अश्लील वीडियो देखते हैं तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके। इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।
Courtesy Rauter
वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे। कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।
यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।
Google
किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।
👉👉 This is Hindi translation of a news published in News Channel Al Jazeera. To read the source news click on the link given below.
दो दिन पहले मोरक्को में आए भयानक भूकंप ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी और लाखों बेघर हो गए। विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप का कारण है, अफ्रीकी प्लेट का उत्तर की ओर बढ़ना और यूरेशियन प्लेट से टकराना। 6.8 की तीव्रता वाला यह एक असामान्य भूकंप था। यह मोरक्को में पिछले 60 वर्षों में आया सबसे भयावह था। अब तक लगभग 3000 मारे जा चुके हैं और 2500 से अधिक घायल हैं। जब दो भूगर्भीय प्लेट एक दूसरे के विपरित गति करती हैं तब भूकंप आते हैं और मोरक्को में सामान्यतः भूकंप तब आते हैं जब ये दोनों प्लेट टकराती हैं।
लगभग 2000 लोग प्रत्येक दिन आत्महत्या करके अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन दुनिया भर की सरकारें ऐसे लोगों की सहायता करने की बजाय उन्हें दण्डित करती हैं। लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है।
Al Jazeera
प्रतिवर्ष दुनिया में 700000 (7 लाख) लोग खुदकुशी करके अपनी जान दे देते हैं। इसका अर्थ यह हुआ की 2000 लोग रोजाना आत्मघात करते हैं। ऐसे सभी लोगों को जो अपने जीवन को समाप्त कर खत्म करना चाहते हैं, उन्हें सहायता, दया सहानुभूति की जरूरत है। दुनिया भर के 23 देशों में आत्महत्या करना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है और इसके लिए उन्हें आर्थिक दंड या कारावास की सजा दी जाती है। आत्महत्या जैसे कलंक को मिटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आत्महत्या निवारण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संघ ने मिलकर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या प्रतिषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन को दुनिया भर में यह संदेश देने के लिए चुना गया है कि खुदकुशी जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। वर्ष 2023 इसकी आस को जगाता दिख रहा है। क्योंकि अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने इसके लिए एक रूपरेखा भी तैयार कर लिया है। इसके लिए यह संगठन उन देशों पर खुदकुशी संबंधी कानूनों को बदलने का दबाव बना रहा है जहां इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है। पिछले कुछ सालों में गुआना पाकिस्तान घाना और मलेशिया ने अपने यहां खुदकुशी को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। ये क्रांतिकारी कानूनी बदलाव न केवल आत्महत्या और खुदकुशी के विचार जैसे कलंक को समाप्त करने की ओर पहला कदम होगा बल्कि यह लोगों को भी इस समस्या को रोकने के लिए आगे आने में मदद करेगा। बहुत सारे देशों में, जो पहले ब्रिटिश कालोनी रह चुके हैं, खुदकुशी कानूनी अपराध माना जाता है जो कि पुराने अंग्रेजी विधान पर आधारित हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि अतीत के इन कानूनी खामियों से नाता तोड़कर एक साहसिक कदम उठाया जाए और आने वाली सदी को बेहतर बनाया जा सके। कष्टों और पीड़ा से जूझ रहे ऐसे लोग जो आत्महत्या करने की सीमा तक पहुंच जाते हैं, उन्हें भी इलाज और सहयोग पाने का अधिकार है। आत्महत्या के मामलों में सजा मिलने के डर के कारण लोग किसी से भी सहयोग या सहायता मांगने से हिचकते हैं और इसी कारण ऐसी घटनाओं की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। इसका मतलब यह हुआ कि सरकारें भी इस समस्या की गंभीरता से अनजान है और इसीलिए इसे रोकने के लिए उनके पास कोई कारगर उपाय नहीं है। यही कारण है कि गुयाना, जहां आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, इसे कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर सहमत होते हुए आत्महत्या निवारण विधेयक 2022 को पास किया जिसमें न केवल आत्महत्या को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया बल्कि इसे रोकने के उपायों का भी प्रावधान किया गया है। आज गुयाना में आत्महत्या रोकने के लिए पूरे देश में जगह-जगह केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। गुयाना के इन प्रयासों ने सेंट लूसिया, बहामास और सुरीनाम जैसे द्वीपीय और विकासशील देशों को भी खुदकुशी को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी वर्ष ब्रीजटाउन घोषणापत्र पर द्वीपीय और विकासशील देश ने हस्ताक्षर किए हैं जिसमें स्वास्थ्य संबंधी कानूनों में संशोधन और खुदकुशी को गैर कानूनी बनाने की बात कही गई है। घाना ने भी मार्च 2023 को इसे कानूनी दायरे से बाहर कर दिया। केन्या और युगांडा में भी इसे लेकर याचिकाएं दायर हो रही हैं। मलेशिया ने भी इसी वर्ष कानून बनाकर इसे सजा के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। बांग्लादेश ने भी इस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पहल को समर्थन दे रहा है। आत्महत्या के 77 फीसदी मामले कम और मध्य आयवालेदेशों में होते हैं। आत्महत्या अपराध नहीं है बल्कि मानव अधिकार है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अब समय आ गया है कि खराब मानसिक स्वास्थ्य को दण्ड देने की बजाय दुनिया उन लोगों की मदद करें जो दुखों के कारण आत्महत्या करने को प्रेरित होते हैं।
This article is a Hindi translation of news published in Al Jazeera news portal. Read the source here. Click the link below 👇👇👇
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने एशिया प्रशांत के देशों से अपील की है कि उन्हें विदेशी शक्तियों के हाथों का खिलौना नहीं बनना चाहिए। एशियान संगठन के सदस्य देशों के बीच एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणपूर्वी अर्थव्यवस्थाओं को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहिए।
Courtesy Russia Today
दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन एशियान की बैठक को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से अपील की कि वे आपसी संघर्षों तथा मतभेदों को दूर करें तथा एकजुट होकर न्यायोचित और पारस्परिक लाभप्रद सहयोग के लिए कार्य करें। उन्होंने आगे कहा कि एशियान के सदस्य राष्ट्र इस बात पर सहमत हैं कि वे किसी भी ताकतवर देश के हाथ की कठपुतली बनकर इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र नहीं बनने देंगे, क्योंकि यह विध्वंसकहोगा।
उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र का नेतृत्व करना होगा और शांति, स्थिरता तथा समृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। एशियाई देशों के बीच बढ़ रही प्रतिद्वंदिता और इसके विनाशकारी परिणामों को लेकर उन्होंने सचेत किया है। एशियाई देशों में सहयोग बढ़ाने के लिए उन्होंने एक योजना तैयार करने की भी बात कही, जो प्रासंगिक हो और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप हो। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख प्रबोवो शुबियांतो अमेरिकी रक्षा प्रमुख से मुलाक़ात करने अमेरिकी दौरे पर गए हुए हैं जहां अमेरिका की ओर से मीडिया को संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है जिसमें चीन और रूस के खिलाफ बातें कही गई है।
हालांकि बाद में शुबियांतो ने इस वक्तव्य से दूरी बनाते हुए कहा कि इंडोनेशिया दोनों देशों के साथ दोस्ताना संबंध चाहता है। उन्होंने कहा कि कोई संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया गया है और ना ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ है। मैं सिर्फ इस बात पर बल देना चाहता हूं कि चीन के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं। दोनों देश एक दूसरे का सम्मान करते हैं और उनके बीच पारस्परिक समझ भी अच्छी है। इस समय मैं अमेरिका में हूं लेकिन मैं रुस के साथ भी दोस्ती चाहता हूं। इस समय यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनातनी है तथा समय-समय पर अमेरिका और चीन के बीच भी रह रह कर विवाद गहराता रहता है। इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में वह रूस और चीन, दोनों देशों का दौरा करेंगे।
शीत युद्ध की छाया में एशियाई देशों के संगठन एशियान की स्थापना हुई थी और वर्तमान में इसमें 10 सदस्य देश शामिल है जिनकी कुल आबादी 600 मिलियन है। आर्थिक सहयोग इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। इसी सप्ताह के दौरान एशियाई देश पूर्वी एशिया सम्मेलन में फिर मिलेंगे जिसमें रूस चीन भारत जापान और अमेरिका भी शामिल होंगे।
👉👉 यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारत ने किसी भी देश का पक्ष न लेकर, और अपने देश के हितों को आगे रखकर सही कदम उठाया है।
Courtesy Russia Today
यह कहना है पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। शुक्रवार को अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। भारत में चल रही जी 20 देशों की बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था के निर्धारण में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूक्रेन के मामले में भारत सरकार ने रणनीतिक तटस्थता की नीति अपनाते हुए पश्चिमी देशों की इस अपील को खारिज कर दिया कि वह रूस के साथ अपने सारे व्यापारिक संबंधों को तोड़ ले। अपनी इस नीति के तहत भारत ने पश्चिमी देशों से मधुर संबंध बनाते हुए रूस से ईंधन, तेल, कोयला और भारी उपकरण का व्यापार कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सफलता हासिल की है। सिंह ने आगे कहा कि जब दो ताकतवर देशों के बीच संघर्ष चल रहा हो तो ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना किसी भी देश के लिए बड़ा मुश्किल होता है। शांति की अपील करते हुए मनमोहन सिंह ने भारत के पक्ष को सही ठहराया। वह वर्ष 2004 से 2014 के बीच में भारत के प्रधानमंत्री थे। पिछले वर्ष फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मोदी कई बार यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर चुके हैं। अपनी बातचीत में मोदी ने कहा था कि विश्व शांति के लिए उनका देश जो कुछ भी कर सकता है, उसके लिए वह तैयार हैं। मनमोहन सिंह ने कहा आगे कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तथा चीन और पश्चिमी देशों के बीच में आए दरार के कारण वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अब बदल चुकी है। नई वैश्विक व्यवस्था को बनाने में भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आजादी के बाद संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए एक बड़े और शांतिप्रिय लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को आज दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है। भारत इस वर्ष जी 20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है, और जिसकी बैठक नई दिल्ली में चल रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है जी 20 की बैठक में रूस यूक्रेन युद्ध के समाधान पर चर्चा नहीं होगी बल्कि इसकी जगह जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऋण संकट जो इस समय की विकासशील देशों की मुख्य समस्या है, चर्चा का मुख्य केंद्र होगा। मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष चल रहे हैं और इन सभी का समाधान कूटनीति तथा बातचीत के जरिए होना चाहिए। जी 20 के सदस्य देश के रूप में या बिना जी-20 के हमारे देश का रुख भी यही होना चाहिए क्योंकि एक बंटा हुआ विश्व किसी भी चुनौती का सामना नहीं कर सकता।
यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
पिछले वर्ष परमाणु युद्ध के डर से एलन मस्क ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए यूक्रेन के हमले को रोक दिया था। यह दावा किया गया है एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स और टेस्ला पर लिखी गई एक पुस्तक में जो में, जो शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है।
Elon Musk image courtesy Russia Today
रूसी सेना के एक फ्लीट पर जब यूक्रेन ड्रोन हमला करने वाला थे, उसी समय स्टार लिंक और स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क ने कंपनी के कर्मचारियों को सिग्नल बंद करने का आदेश दे दिया था। पिछले वर्ष जब यूक्रेनी सेना ने रूसी सेना की एक टुकड़ी पर हमला करने के लिए ड्रोन भेजे तो बीच रास्ते में ही इनका संपर्क टूट गया। वाल्टर इजाकसन की लिखी पुस्तक जो अगले सप्ताह प्रकाशित होगी, में यह दावा किया गया है।
इसमें कहा गया है कि एलन मस्क ने गुप्त तरीके से स्पेस एक्स के इंजीनियरों को क्रीमिया के आसपास के इलाकों में स्टार लिंक के सिग्नल को बंद करने का आदेश दिया था। मस्क को डर था कि यूक्रेनी हमले के जवाब में रूस मिनी पर्ल हार्बर जैसा परमाणु हमला कर देगा। पुस्तक में यह दावा भी किया गया है कि यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफार्मेशन मिनिस्टर मिखाइल फेदरोव ने मस्क को संदेश भेजकर पुनः सिग्नल शुरू करने का अनुरोध किया था जिसे मस्क ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यूक्रेन युद्ध में हद से आगे बढ़ रहा है और अपनी रणनीतिक हार को न्योता दे रहा है। इस असफल ड्रोन हमले की ख़बर सबसे पहले अमेरिकी समाचार पत्र न्यू यॉर्क टाइम्स में जुलाई में प्रकाशित की गई थी हालांकि इसमें सभी घटनाओं का जिक्र नहीं किया गया था। जुलाई 2022 से अब तक स्पेस एक्स ने कीव को बीस हजार से अधिक स्टार लिंक के सिग्नल सर्विस स्टेशन दिए हैं ताकि यूक्रेनी नागरिकों को इंटरनेट और संचार सुविधाएं मिल सकें। इजाकसन ने पुस्तक में मस्क की बातचीत का एक अंश प्रकाशित किया है जिसमें मस्क कह रहे हैं कि वह इस युद्ध में कहां शामिल हैं? स्टार लिंक को किसी युद्ध का हिस्सा बनने के लिए नहीं बनाया गया है। यह इसलिए बनाया गया है ताकि लोग नेटफ्लिक्स जैसी सेवाओं का आनंद ले सकें, आनलाइन स्कूल की सुविधा उठा सकें। किसी ड्रोन हमले को सफल बनाने के लिए इसे नहीं बनाया गया है। क्रीमिया पर इस असफल हमले के बाद मस्क ने पेंटागन से कहा था कि अब स्टार लिंक यूक्रेन को अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करेगा, क्योंकि उनके और पेंटागन के बीच की बातें समाचार चैनल सीएनएन को लीक हो रहीं थीं। हालांकि बाद में मस्क ने ट्वीट कर यूक्रेन में स्टार लिंक की सेवाएं जारी रखने की बात कही थी। इजाकसन प्रसिद्ध समाचार पत्रिका टाइम के संपादक रह चुके हैं। इसके अलावा वह तुलान विश्व विद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर हैं और बेंजामिन फ्रैंकलिन, अल्बर्ट आइंस्टीन, हेनरी किसिंजर और स्टीव जॉब्स जैसी महान हस्तियों की जीवनी भी लिख चुके हैं।
……………………………… यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
अगर इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए तो दुनिया में बहुत सारे अधम और बुरे किरदार आपको मिल जाएंगे। इन किरदारों में हत्यारे, बलात्कारी और सीरियल किलर सहित ऐसे कृत्य करने वाले लोग शामिल हैं जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। अगर हम आपसे कहें कि किसी ऐसे घृणित किरदार की कल्पना करें तो जाहिर तौर पर वह एक छोटा बालक तो नहीं हो सकता। लेकिन हाय! ऐसा एक किरदार है जिसकी उम्र महज 11 वर्ष है।
All Images Courtesy History Defined
यह डरावनी कहानी मैरी बेल नामक एक बच्चे की है जिसकी कहानी आपमें कंपकंपी पैदा कर देगी। यह कहानी है एक मासूम के क्रूर और निर्दयी बनने की। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि बचपने और मासूमियत से भरी एक लड़की इतना जघन्य कृत्य कैसे कर सकती है। आखिर किन मनोभावों ने उसे घृणित कृत्य करने पर विवश कर दिया। केवल 11 वर्ष की सीरियल किलर मैरी बेल की कहानी में इतनी पहेलियां हैं जिनका उत्तर खोजना आसान नहीं होगा। यह एक बेचैनी कर देने वाली कहानी है। यह कहानी मानव स्वभाव की जटिलताओं को समझने में हमारी मदद करेगी।
मैरी बेल का बचपन बहुत ही बेचैन और उथल पुथल भरे वातावरण में गुजरा। मानसिक रूप से अस्वस्थ बेट्टी नामक एक महिला के गर्भ से चुनौतीपूर्ण माहौल में बेल का जन्म हुआ। बेला की मां यौनकर्मी (वेश्या) के रूप में कार्य करती थी और अक्सर घर पर कम रहती थी। बचपन में मां का बेटी के प्रति व्यवहार भी डरावना ही रहता था। बेल की मां ने कई बार उसकी जान लेने तक की कोशिशें कर चुकी थी। यही नहीं कई बार उसकी मां ने उसका यौन शोषण भी किया। मेरी बेल के जीवन में यह सारी तकलीफें 5 वर्ष की उम्र से ही शुरू हो गई थी। घरेलू हिंसा और आपराधिक कृत्यों के बीच बेल को एक बहुत ही कटु माहौल मिला। इस कारण मारपीट करना, चोरी करना मैरी बेल के लिए एक सामान्य घटना हो गई। लोगों की निगाह में उसका अशांत व्यवहार ध्यान आकर्षित करने के रूप में मशहूर होने लगा। बेल बार बार कहा करती थी कि मैं एक हत्यारी हूं लेकिन लोगों उसकी बातों को बेकार और शेखी बघारने वाली समझकर खारिज कर दिया करते थे। दुर्भाग्यवश उसकी बातें खोखली साबित नहीं हुई। 11 वर्ष की आयु होने के ठीक एक दिन पूर्व 25 मई 1968 में बेल ने अपने जीवन का पहला अपराध किया। उसने एक हत्या की। हालांकि इससे पहले भी वह अपने हत्यारे स्वभाव का परिचय दे चुकी थी। वह खेल खेलते समय कई बार अपने साथियों को गंभीर नुक़सान पहुंचा चुकी थी लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते थे। खैर… पहली हत्या करने के ठीक दो सप्ताह बाद उसने दूसरी हत्या कर दी जब उसने चार वर्षीय मार्टिन ब्राउन नामक एक बच्चे की बहुत ही घिनौने तरीके से गला घोंटकर हत्या कर दी। अधिकारियों का मानना है कि उसने यह घटना अकेले अंजाम दी थी। हत्या के पहले और हत्या के बाद उसका व्यवहार अजीब और परेशान करने वाला था। पहली हत्या के ठीक दो माह बाद बेल ने दूसरी हत्या को अंजाम दिया। इस हत्या ने उसके आस पास के लोगों को हिलाकर रख दिया। इसके कुछ दिनों बाद ब्रायन होव नामक एक बच्चा लापता हो गया। खोजबीन करने वाले अधिकारियों को पत्थरों के नीचे दबी उसकी लाश मिली जिसकी हत्या गला घोंटकर की गई थी और उसके पेट को कैंची और ब्लेड से चीरकर कई टुकड़े कर दिए गए थे। शुरुआती छानबीन में पता लगा कि होव के पेट को चीरकर अंग्रेजी के अक्षर एन N को उकेरा गया था लेकिन बाद में पता चला कि यह अक्षर एन नहीं एम M था। अधिकारियों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह हत्या किसी नाबालिग द्वारा की गई है। पुलिस ने जब मैरी बेल और उसकी दोस्त नोरमा बेल से पूछताछ शुरू की तो दोनों के बयान विरोधाभासी थे। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों टूट गई और कबूल कर लिया कि दोनों ने मिलकर इस हत्या को अंज़ाम दिया है। अपराध की दृष्टि से इंग्लैंड के इतिहास में यह बड़ी कुख्यात घटना थी जिसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या कोई छोटी लड़की ऐसा कुकृत्य कर सकती है। इस घटना में नाटकीय मोड़ तब आया जब कोर्ट ने सुनवाई के बाद नोरमा बेल को बिना सजा दिए मुक्त कर दिया जबकि मैरी बेल को खतरनाक व्यक्तित्व और दूसरे बच्चों के लिए खतरा बताते अनिश्चितकालीन जेल की सजा सुनाई। मैरी को सजा होते ही इंग्लैंड की मीडिया में उससे जुड़ी खबरों और उसके जीवन की घटनाओं को प्रकाशित करने की होड़ मच गई। उसकी मां बेट्टी ने मीडिया से पैसे लेकर निर्लज्जतापूर्वक बेल से जुड़ी जानकारियां बेचने लगी। इसके बाद अखबारों में मेरी बेल की खबर 1977 में प्रकाशित हुई जब वह जेल से भागने में सफल हो गयी। हालांकि उसे शीघ्र ही गिरफ्तार भी कर लिया गया। 12 वर्ष बाद मैरी को जेल से रिहा कर दिया गया और अब वह 23 वर्ष की हो गई थी। यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। एक निवेदन 🙏🙏🙏 कृपया ब्लॉग को Subscribe जरुर करें और like तथा share करना ना भूलें। https://www.historydefined.net/mary-bell/
तुर्की में क्रिप्टो करेंसी व्यापार से जुड़े एक व्यक्ति और उसके दो संबंधियों को निवेशकों के लाखों डालर्स के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में 11, 196 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है। 29 वर्षीय फारुख फतेह ओजेर की कंपनी थोडेक्स जब 2021 में अचानक से धराशाई हो गयी तो वह निवेशकों के लाखों डालर्स के साथ अल्बानिया भाग गया था। जून में प्रत्यर्पण के जरिए इसे तुर्की लाया गया जहां उसे संगठित अपराध और रुपए के लेनदेन संबंधी धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए इसने कहा कि यदि उसका इरादा आपराधिक होता तो वह इतने शौक से थोडेक्स कंपनी नहीं स्थापित करता। उसने यह भी कहा कि वह इतना बुद्धिमान और चतुर है कि किसी भी संस्था का नेतृत्व कर सकता है और इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि मैंने 22 वर्ष की अवस्था में अपनी कंपनी स्थापित कर लिया था। इस मामले में उसकी बहन सेराप और भाई गुवेन भी दोषी ठहराए गए। तुर्की में ऐसे असाधारण जेल सजा देना आम बात है। यूरोपीय संगठन में शामिल के प्रयास में तुर्की ने 2004 में मौत की सजा का प्रावधान समाप्त कर दिया था। तुर्की में ही वर्ष 2022 में टेलीविजन पर धार्मिक उपदेश देने वाले एक व्यक्ति अदनान ओक्तार को धोखाधड़ी और यौन अपराध के एक मामले में 8658 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ओक्तार के लिए 40562 वर्ष जेल की सजा की मांग की थी। थोडेक्स कंपनी जो वर्ष 2017 में अस्तित्व में आई थी, आभासी मुद्रा के मामले में तुर्की की बड़ी कंपनियों में से एक थी।