पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां इतनी भयानक है कि जल्दी ही सैन्य तख्तापलट हो सकता है। बदतर आर्थिक हालत और राजनीतिक उथल-पुथल देश में संवैधानिक संकट का संकेत दे रहा है।
Google
दरअसल पाक के आर्मी चीफ जनरल हासिम मुनीर की कुछ तस्वीरें उभर कर सामने आ रही हैं जिनसे पाकिस्तान में संभावित तख्तापलट के संकेत मिल रहे हैं। इसी माह वे पांच दिन अमेरिकी दौरे पर थे जहां पर वे कई प्रमुख लोगों से मुलाकात करते हैं। अपने अमेरिकी दौरे के दौरान मुनीर अमेरिकी विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकेन के साथ मुलाकात की जबकि सामान्य: ऐसा होता नहीं है। भला सेना प्रमुख विदेश सचिव से मुलाकात क्यों करेंगे। खैर जो तस्वीर सबसे ज्यादा परेशान कर रही है वो है जनरल मुनीर और विक्टोरिया न्यूलैंड की मुलाकात की तस्वीरें। दरअसल न्यूलैंड नाम की महिला ने जब जब किसी देश का भ्रमण किया तो वहां तख्तापलट पलट हो गया। यूक्रेन, म्यांमार, जार्जिया, कजाखस्तान के संदर्भ में न्यूलैंड की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में पाक आर्मी चीफ से इसकी एक घंटे की मुलाकात कहीं न कहीं पाकिस्तान में किसी बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम की ओर संकेत कर रही है।
दुनिया इस समय समुद्री बाढ़ के भयानक प्रकोप का सामना कर रही है। इस आपदा में हजारों लोग मारे जा रहे हैं और लाखों लोग बेघर हो रहे हैं। लीबिया में आई भीषण समुद्री बाढ़ के कारण अब तक 20000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। परिस्थितियां इतनी भयावह हैं की लाशों को ढूंढना भी मुश्किल हो रहा है।
All images Courtesy Google
सवाल केवल लीबिया का नहीं है। सवाल है, जलवायु परिवर्तन और आने वाले समय में इसके दुष्परिणामों का।
केवल सितंबर माह के शुरुआती 11 दिनों में दुनिया के आठ देशों में भीषण बारिश और बाढ़ ने 8 देशों में भयंकर तबाही मचाई। इन देशों में तुर्की, ग्रीस, ब्राजील, अमेरिका, स्पेन, चीन, हांगकांग और लीबिया शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के बदलते रुख के पीछे सबसे बड़ी वजह है जलवायु परिवर्तन। बदलती जलवायु का असर वैश्विक तापमान और मौसम, दोनों पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर का तापमान और मॉनसून अस्थिर हो रहा है। दुनियाभर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और मौसम में अनियमितता देखने को मिल रही है। इस वर्ष तो गर्मी ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। ठंडे देशों में अचानक से गर्मी शुरू हो गई है, रेगिस्तान में बाढ़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। 1902 के बाद से मौसम की दूसरी सबसे बड़ी चरम घटनाएं 2023 में देखी जा रही हैं। मौसमी घटनाओं के जरिए प्रकृति ये कहने की कोशिश कर रही है कि हमें पर्यावरण पर ध्यान देने की जरूरत है।
उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके। इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।
Courtesy Rauter
वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे। कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।
यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।
Google
किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।
👉👉 This is Hindi translation of a news published in News Channel Al Jazeera. To read the source news click on the link given below.
लगभग 2000 लोग प्रत्येक दिन आत्महत्या करके अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन दुनिया भर की सरकारें ऐसे लोगों की सहायता करने की बजाय उन्हें दण्डित करती हैं। लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है।
Al Jazeera
प्रतिवर्ष दुनिया में 700000 (7 लाख) लोग खुदकुशी करके अपनी जान दे देते हैं। इसका अर्थ यह हुआ की 2000 लोग रोजाना आत्मघात करते हैं। ऐसे सभी लोगों को जो अपने जीवन को समाप्त कर खत्म करना चाहते हैं, उन्हें सहायता, दया सहानुभूति की जरूरत है। दुनिया भर के 23 देशों में आत्महत्या करना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है और इसके लिए उन्हें आर्थिक दंड या कारावास की सजा दी जाती है। आत्महत्या जैसे कलंक को मिटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आत्महत्या निवारण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संघ ने मिलकर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या प्रतिषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन को दुनिया भर में यह संदेश देने के लिए चुना गया है कि खुदकुशी जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। वर्ष 2023 इसकी आस को जगाता दिख रहा है। क्योंकि अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने इसके लिए एक रूपरेखा भी तैयार कर लिया है। इसके लिए यह संगठन उन देशों पर खुदकुशी संबंधी कानूनों को बदलने का दबाव बना रहा है जहां इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है। पिछले कुछ सालों में गुआना पाकिस्तान घाना और मलेशिया ने अपने यहां खुदकुशी को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। ये क्रांतिकारी कानूनी बदलाव न केवल आत्महत्या और खुदकुशी के विचार जैसे कलंक को समाप्त करने की ओर पहला कदम होगा बल्कि यह लोगों को भी इस समस्या को रोकने के लिए आगे आने में मदद करेगा। बहुत सारे देशों में, जो पहले ब्रिटिश कालोनी रह चुके हैं, खुदकुशी कानूनी अपराध माना जाता है जो कि पुराने अंग्रेजी विधान पर आधारित हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि अतीत के इन कानूनी खामियों से नाता तोड़कर एक साहसिक कदम उठाया जाए और आने वाली सदी को बेहतर बनाया जा सके। कष्टों और पीड़ा से जूझ रहे ऐसे लोग जो आत्महत्या करने की सीमा तक पहुंच जाते हैं, उन्हें भी इलाज और सहयोग पाने का अधिकार है। आत्महत्या के मामलों में सजा मिलने के डर के कारण लोग किसी से भी सहयोग या सहायता मांगने से हिचकते हैं और इसी कारण ऐसी घटनाओं की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। इसका मतलब यह हुआ कि सरकारें भी इस समस्या की गंभीरता से अनजान है और इसीलिए इसे रोकने के लिए उनके पास कोई कारगर उपाय नहीं है। यही कारण है कि गुयाना, जहां आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, इसे कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर सहमत होते हुए आत्महत्या निवारण विधेयक 2022 को पास किया जिसमें न केवल आत्महत्या को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया बल्कि इसे रोकने के उपायों का भी प्रावधान किया गया है। आज गुयाना में आत्महत्या रोकने के लिए पूरे देश में जगह-जगह केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। गुयाना के इन प्रयासों ने सेंट लूसिया, बहामास और सुरीनाम जैसे द्वीपीय और विकासशील देशों को भी खुदकुशी को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी वर्ष ब्रीजटाउन घोषणापत्र पर द्वीपीय और विकासशील देश ने हस्ताक्षर किए हैं जिसमें स्वास्थ्य संबंधी कानूनों में संशोधन और खुदकुशी को गैर कानूनी बनाने की बात कही गई है। घाना ने भी मार्च 2023 को इसे कानूनी दायरे से बाहर कर दिया। केन्या और युगांडा में भी इसे लेकर याचिकाएं दायर हो रही हैं। मलेशिया ने भी इसी वर्ष कानून बनाकर इसे सजा के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। बांग्लादेश ने भी इस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पहल को समर्थन दे रहा है। आत्महत्या के 77 फीसदी मामले कम और मध्य आयवालेदेशों में होते हैं। आत्महत्या अपराध नहीं है बल्कि मानव अधिकार है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अब समय आ गया है कि खराब मानसिक स्वास्थ्य को दण्ड देने की बजाय दुनिया उन लोगों की मदद करें जो दुखों के कारण आत्महत्या करने को प्रेरित होते हैं।
This article is a Hindi translation of news published in Al Jazeera news portal. Read the source here. Click the link below 👇👇👇
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने एशिया प्रशांत के देशों से अपील की है कि उन्हें विदेशी शक्तियों के हाथों का खिलौना नहीं बनना चाहिए। एशियान संगठन के सदस्य देशों के बीच एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणपूर्वी अर्थव्यवस्थाओं को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहिए।
Courtesy Russia Today
दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन एशियान की बैठक को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से अपील की कि वे आपसी संघर्षों तथा मतभेदों को दूर करें तथा एकजुट होकर न्यायोचित और पारस्परिक लाभप्रद सहयोग के लिए कार्य करें। उन्होंने आगे कहा कि एशियान के सदस्य राष्ट्र इस बात पर सहमत हैं कि वे किसी भी ताकतवर देश के हाथ की कठपुतली बनकर इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र नहीं बनने देंगे, क्योंकि यह विध्वंसकहोगा।
उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र का नेतृत्व करना होगा और शांति, स्थिरता तथा समृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। एशियाई देशों के बीच बढ़ रही प्रतिद्वंदिता और इसके विनाशकारी परिणामों को लेकर उन्होंने सचेत किया है। एशियाई देशों में सहयोग बढ़ाने के लिए उन्होंने एक योजना तैयार करने की भी बात कही, जो प्रासंगिक हो और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप हो। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख प्रबोवो शुबियांतो अमेरिकी रक्षा प्रमुख से मुलाक़ात करने अमेरिकी दौरे पर गए हुए हैं जहां अमेरिका की ओर से मीडिया को संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है जिसमें चीन और रूस के खिलाफ बातें कही गई है।
हालांकि बाद में शुबियांतो ने इस वक्तव्य से दूरी बनाते हुए कहा कि इंडोनेशिया दोनों देशों के साथ दोस्ताना संबंध चाहता है। उन्होंने कहा कि कोई संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया गया है और ना ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ है। मैं सिर्फ इस बात पर बल देना चाहता हूं कि चीन के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं। दोनों देश एक दूसरे का सम्मान करते हैं और उनके बीच पारस्परिक समझ भी अच्छी है। इस समय मैं अमेरिका में हूं लेकिन मैं रुस के साथ भी दोस्ती चाहता हूं। इस समय यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनातनी है तथा समय-समय पर अमेरिका और चीन के बीच भी रह रह कर विवाद गहराता रहता है। इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में वह रूस और चीन, दोनों देशों का दौरा करेंगे।
शीत युद्ध की छाया में एशियाई देशों के संगठन एशियान की स्थापना हुई थी और वर्तमान में इसमें 10 सदस्य देश शामिल है जिनकी कुल आबादी 600 मिलियन है। आर्थिक सहयोग इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। इसी सप्ताह के दौरान एशियाई देश पूर्वी एशिया सम्मेलन में फिर मिलेंगे जिसमें रूस चीन भारत जापान और अमेरिका भी शामिल होंगे।
👉👉 यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारत ने किसी भी देश का पक्ष न लेकर, और अपने देश के हितों को आगे रखकर सही कदम उठाया है।
Courtesy Russia Today
यह कहना है पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। शुक्रवार को अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। भारत में चल रही जी 20 देशों की बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था के निर्धारण में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूक्रेन के मामले में भारत सरकार ने रणनीतिक तटस्थता की नीति अपनाते हुए पश्चिमी देशों की इस अपील को खारिज कर दिया कि वह रूस के साथ अपने सारे व्यापारिक संबंधों को तोड़ ले। अपनी इस नीति के तहत भारत ने पश्चिमी देशों से मधुर संबंध बनाते हुए रूस से ईंधन, तेल, कोयला और भारी उपकरण का व्यापार कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सफलता हासिल की है। सिंह ने आगे कहा कि जब दो ताकतवर देशों के बीच संघर्ष चल रहा हो तो ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना किसी भी देश के लिए बड़ा मुश्किल होता है। शांति की अपील करते हुए मनमोहन सिंह ने भारत के पक्ष को सही ठहराया। वह वर्ष 2004 से 2014 के बीच में भारत के प्रधानमंत्री थे। पिछले वर्ष फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मोदी कई बार यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर चुके हैं। अपनी बातचीत में मोदी ने कहा था कि विश्व शांति के लिए उनका देश जो कुछ भी कर सकता है, उसके लिए वह तैयार हैं। मनमोहन सिंह ने कहा आगे कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तथा चीन और पश्चिमी देशों के बीच में आए दरार के कारण वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अब बदल चुकी है। नई वैश्विक व्यवस्था को बनाने में भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आजादी के बाद संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए एक बड़े और शांतिप्रिय लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को आज दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है। भारत इस वर्ष जी 20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है, और जिसकी बैठक नई दिल्ली में चल रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है जी 20 की बैठक में रूस यूक्रेन युद्ध के समाधान पर चर्चा नहीं होगी बल्कि इसकी जगह जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऋण संकट जो इस समय की विकासशील देशों की मुख्य समस्या है, चर्चा का मुख्य केंद्र होगा। मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष चल रहे हैं और इन सभी का समाधान कूटनीति तथा बातचीत के जरिए होना चाहिए। जी 20 के सदस्य देश के रूप में या बिना जी-20 के हमारे देश का रुख भी यही होना चाहिए क्योंकि एक बंटा हुआ विश्व किसी भी चुनौती का सामना नहीं कर सकता।
यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
पिछले वर्ष परमाणु युद्ध के डर से एलन मस्क ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए यूक्रेन के हमले को रोक दिया था। यह दावा किया गया है एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स और टेस्ला पर लिखी गई एक पुस्तक में जो में, जो शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है।
Elon Musk image courtesy Russia Today
रूसी सेना के एक फ्लीट पर जब यूक्रेन ड्रोन हमला करने वाला थे, उसी समय स्टार लिंक और स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क ने कंपनी के कर्मचारियों को सिग्नल बंद करने का आदेश दे दिया था। पिछले वर्ष जब यूक्रेनी सेना ने रूसी सेना की एक टुकड़ी पर हमला करने के लिए ड्रोन भेजे तो बीच रास्ते में ही इनका संपर्क टूट गया। वाल्टर इजाकसन की लिखी पुस्तक जो अगले सप्ताह प्रकाशित होगी, में यह दावा किया गया है।
इसमें कहा गया है कि एलन मस्क ने गुप्त तरीके से स्पेस एक्स के इंजीनियरों को क्रीमिया के आसपास के इलाकों में स्टार लिंक के सिग्नल को बंद करने का आदेश दिया था। मस्क को डर था कि यूक्रेनी हमले के जवाब में रूस मिनी पर्ल हार्बर जैसा परमाणु हमला कर देगा। पुस्तक में यह दावा भी किया गया है कि यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफार्मेशन मिनिस्टर मिखाइल फेदरोव ने मस्क को संदेश भेजकर पुनः सिग्नल शुरू करने का अनुरोध किया था जिसे मस्क ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यूक्रेन युद्ध में हद से आगे बढ़ रहा है और अपनी रणनीतिक हार को न्योता दे रहा है। इस असफल ड्रोन हमले की ख़बर सबसे पहले अमेरिकी समाचार पत्र न्यू यॉर्क टाइम्स में जुलाई में प्रकाशित की गई थी हालांकि इसमें सभी घटनाओं का जिक्र नहीं किया गया था। जुलाई 2022 से अब तक स्पेस एक्स ने कीव को बीस हजार से अधिक स्टार लिंक के सिग्नल सर्विस स्टेशन दिए हैं ताकि यूक्रेनी नागरिकों को इंटरनेट और संचार सुविधाएं मिल सकें। इजाकसन ने पुस्तक में मस्क की बातचीत का एक अंश प्रकाशित किया है जिसमें मस्क कह रहे हैं कि वह इस युद्ध में कहां शामिल हैं? स्टार लिंक को किसी युद्ध का हिस्सा बनने के लिए नहीं बनाया गया है। यह इसलिए बनाया गया है ताकि लोग नेटफ्लिक्स जैसी सेवाओं का आनंद ले सकें, आनलाइन स्कूल की सुविधा उठा सकें। किसी ड्रोन हमले को सफल बनाने के लिए इसे नहीं बनाया गया है। क्रीमिया पर इस असफल हमले के बाद मस्क ने पेंटागन से कहा था कि अब स्टार लिंक यूक्रेन को अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करेगा, क्योंकि उनके और पेंटागन के बीच की बातें समाचार चैनल सीएनएन को लीक हो रहीं थीं। हालांकि बाद में मस्क ने ट्वीट कर यूक्रेन में स्टार लिंक की सेवाएं जारी रखने की बात कही थी। इजाकसन प्रसिद्ध समाचार पत्रिका टाइम के संपादक रह चुके हैं। इसके अलावा वह तुलान विश्व विद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर हैं और बेंजामिन फ्रैंकलिन, अल्बर्ट आइंस्टीन, हेनरी किसिंजर और स्टीव जॉब्स जैसी महान हस्तियों की जीवनी भी लिख चुके हैं।
……………………………… यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
तुर्की में क्रिप्टो करेंसी व्यापार से जुड़े एक व्यक्ति और उसके दो संबंधियों को निवेशकों के लाखों डालर्स के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में 11, 196 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है। 29 वर्षीय फारुख फतेह ओजेर की कंपनी थोडेक्स जब 2021 में अचानक से धराशाई हो गयी तो वह निवेशकों के लाखों डालर्स के साथ अल्बानिया भाग गया था। जून में प्रत्यर्पण के जरिए इसे तुर्की लाया गया जहां उसे संगठित अपराध और रुपए के लेनदेन संबंधी धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए इसने कहा कि यदि उसका इरादा आपराधिक होता तो वह इतने शौक से थोडेक्स कंपनी नहीं स्थापित करता। उसने यह भी कहा कि वह इतना बुद्धिमान और चतुर है कि किसी भी संस्था का नेतृत्व कर सकता है और इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि मैंने 22 वर्ष की अवस्था में अपनी कंपनी स्थापित कर लिया था। इस मामले में उसकी बहन सेराप और भाई गुवेन भी दोषी ठहराए गए। तुर्की में ऐसे असाधारण जेल सजा देना आम बात है। यूरोपीय संगठन में शामिल के प्रयास में तुर्की ने 2004 में मौत की सजा का प्रावधान समाप्त कर दिया था। तुर्की में ही वर्ष 2022 में टेलीविजन पर धार्मिक उपदेश देने वाले एक व्यक्ति अदनान ओक्तार को धोखाधड़ी और यौन अपराध के एक मामले में 8658 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ओक्तार के लिए 40562 वर्ष जेल की सजा की मांग की थी। थोडेक्स कंपनी जो वर्ष 2017 में अस्तित्व में आई थी, आभासी मुद्रा के मामले में तुर्की की बड़ी कंपनियों में से एक थी।
The most exciting thing in tech right now is AI chatbots. These chatbots are continuously being tested to see how brilliantly they could perform and expectedly they are emerging as the superheroes, tackling challenges with efficiency and precision. Many of them are showing unexpected performence. But still, there are some fields where it isn’t great in comparison to human brains.
Image courtesy Google
These chatbots receives instructions from users and then hunts the internet for answers. Now these technological miracle have started occupying wider place in various fields like Banking and Finance Industry, Media and Entertainment, Healthcare, E-commerce, Retail, Travel and Tourism, Others. Global AI Based Chatbots market looks promising in the next 5 years. Growing demand around the world had a direct impact on the growth of the AI Based Chatbots. It is expected that the market will grow magnificently during 2023 – 2030.
Image courtesy Google
Govts of the world are showing keen interest in the development. Recently China has released the chatbots publicly while Britain is planning an AI summit and the US seems to be getting tougher on chip exports. But they’re poised to create a major new problem. Will meteoric manifestation of artificial intelligence dominate future? Will AI bring an all around transformation ? What will be it outcome, better or worse because they are ridiculously easy to misuse. AI could be used for all sorts of malicious tasks, including leaking people’s private information and helping criminals phish, spam, and scam people. Experts warn that we are heading toward a security and privacy “disaster.”
बच्चे मोबाइल पर अधिक समय व्यतीत ना करें और उनमें अच्छे नैतिक और सामाजिक गुणों का विकास हो, इसके लिए चीन एक नया कानून लागू करने जा रहा है। इस संबंध में चीन की उच्च इंटरनेट नियामक संस्था साइबर स्पेस प्रशासन विभाग एक प्रस्ताव जारी किया है।
Image Courtesy Google
प्रस्ताव के अनुसार इसके लिए सभी मोबाइल और ऐप में लघु मोड जोड़ा जाएगा जो प्रयोगकर्ता को उसकी उम्र के आधार पर इंटरनेट पर समय व्यतीत करने को नियमित करेगा। इस कानून के जरिए वह बच्चों के बीच अनवांछित जानकारियों को पहुंचने से भी रोक सकेगा। इस कानून पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए इसके ड्राफ्ट को 2 सितम्बर तक के लिए सार्वजनिक कर दिया गया था। कानून के अनुसार जब कम उम्र वाले अल्पवयस्क मोड में मोबाइल का प्रयोग करेंगे तो निर्धारित समय के बाद आनलाइन ऐप खुद ही बंद हो जाएगा।
इस दौरान उन्हें उम्र आधारित विषय वस्तु प्रदान किया जाएगा। इस मोड में कोई भी जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम होगी 10 बजे रात से सुबह 6 बजे के बीच मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। वे बच्चे जिनकी उम्र 8 वर्ष से अधिक नहीं होगी, केवल 40 मिनट इस्तेमाल कर सकेंगे, जबकि 8 से 16 वर्ष के वयस्क केवल एक घंटे ही मोबाइल का प्रयोग कर पाएंगे। इसके अलावा मोबाइल इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां ऐसी विषय वस्तु का निर्माण करेंगी जो बच्चों में समाजवादी मूल्यों का संचार करेंगे।
यह लेख अमेरिकी समाचार एजेंसी CNN के एक अंग्रेजी समाचार का हिंदी अनुवाद है। कृपया मूल समाचार को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। और हां Like Share Subscribe करना ना भूलें। धन्यवाद 🙏🙏🙏