Author: चापलूसों का शिकार

केवल सुखी जीना काफी नहीं, सार्थक जीना जरुरी है। बढ़ती हुई उम्र और नौकरी न मिलने की हताशा एक इंसान को ख़ुद से दूर कर देती है।

मोबाइल पर पार्न देखना


अश्लील फिल्म देखना अपराध नहीं है, क्योंकि यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है। और इसमें हस्तक्षेप करना निजता में दखल देने के समान हैपोर्नोग्राफी सदियों से प्रचलन में थी।

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यह कहना है केरल उच्च न्यायालय का। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के कृत्य को अपराध घोषित करना किसी व्यक्ति की निजता में दखल और उसकी निजी पसंद में हस्तक्षेप करना होगा। केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पीवी कुन्हिकृष्णन ने भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 292 के तहत 33 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ अश्लीलता के मामले को रद्द करते हुए यह निर्णय दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी प्राइवेसी में अश्लील फोटो या वीडियो देखना अपने आप में आईपीसी की धारा 292 (अश्लीलता) के तहत अपराध नहीं है। इसी तरह, किसी व्यक्ति द्वारा अपनी प्राइवेसी में मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखना भी आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध नहीं है। न्यायमूर्ति कुन्हिकृष्णन ने कहा कि यदि कोई किसी अश्लील वीडियो या फोटो को प्रसारित या वितरित करने या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहा है, तो वह आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध बनता है।

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लेकिन हमें इस प्रश्न पर निर्णय लेना है कि यदि कोई व्यक्ति दूसरों को दिखाए बिना अपने निजी समय में अश्लील वीडियो देखता है, तो क्या यह अपराध की श्रेणी में आएगा ?
वर्ष 2016 में कोच्ची के अलुवा महल में सड़क के किनारे अपने मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखते हुए पुलिस ने …………..को पकड़ा था। आरोपी व्यक्ति ने एफआईआर और उसके संबंध में चल रही अदालती कार्यवाही को रद्द करने की याचिका दायर की थी।
माता पिता को सचेत करते हुए न्यायमूर्ति ने कहा कि नए डिजिटल युग ने इसे बच्चों के लिए भी अधिक सुलभ बना दिया है। माता-पिता द्वारा बच्चों को खुश करने के लिए इंटरनेट वाले मोबाइल फोन देने के प्रति भी आगाह करते हुए कहा कहा कि माता-पिता को इसके खतरे के बारे में पता होना चाहिए‌‌ तथा अपनी उपस्थिति में बच्चों को मोबाइल फोन दें। उन्होंने आगे कहा कि अगर नाबालिग बच्चे अश्लील वीडियो देखते हैं तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

तानाशाह किम जोंग की ट्रेन

उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।

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वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे।
कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।

यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।

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किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।

👉👉 This is Hindi translation of a news published in News Channel Al Jazeera. To read the source news click on the link given below.


https://www.aljazeera.com/news/2023/9/12/kim-jong-uns-moving-fortress-armoured-train-what-to-know

मोरक्को में आया भूकंप

दो दिन पहले मोरक्को में आए भयानक भूकंप ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी और लाखों बेघर हो गए। विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप का कारण है, अफ्रीकी प्लेट का उत्तर की ओर बढ़ना और यूरेशियन प्लेट से टकराना। 6.8 की तीव्रता वाला यह एक असामान्य भूकंप था। यह मोरक्को में पिछले 60 वर्षों में आया सबसे भयावह था। अब तक लगभग 3000 मारे जा चुके हैं और 2500 से अधिक घायल हैं। जब दो भूगर्भीय प्लेट एक दूसरे के विपरित गति करती हैं तब भूकंप आते हैं और मोरक्को में सामान्यतः भूकंप तब आते हैं जब ये दोनों प्लेट टकराती हैं।

अब सरकारें नहीं होने देंगी आत्महत्या

लगभग 2000 लोग प्रत्येक दिन आत्महत्या करके अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन दुनिया भर की सरकारें ऐसे लोगों की सहायता करने की बजाय उन्हें दण्डित करती हैं। लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है।

Al Jazeera


प्रतिवर्ष दुनिया में 700000 (7 लाख) लोग खुदकुशी करके अपनी जान दे देते हैं। इसका अर्थ यह हुआ की 2000 लोग रोजाना आत्मघात करते हैं। ऐसे सभी लोगों को जो अपने जीवन को समाप्त कर खत्म करना चाहते हैं, उन्हें सहायता, दया सहानुभूति की जरूरत है।
दुनिया भर के 23 देशों में आत्महत्या करना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है और इसके लिए उन्हें आर्थिक दंड या कारावास की सजा दी जाती है। आत्महत्या जैसे कलंक को मिटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आत्महत्या निवारण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संघ ने मिलकर 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या प्रतिषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन को दुनिया भर में यह संदेश देने के लिए चुना गया है कि खुदकुशी जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। वर्ष 2023 इसकी आस को जगाता दिख रहा है। क्योंकि अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रही एक संस्था ने इसके लिए एक रूपरेखा भी तैयार कर लिया है। इसके लिए यह संगठन उन देशों पर खुदकुशी संबंधी कानूनों को बदलने का दबाव बना रहा है जहां इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
पिछले कुछ सालों में गुआना पाकिस्तान घाना और मलेशिया ने अपने यहां खुदकुशी को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। ये क्रांतिकारी कानूनी बदलाव न केवल आत्महत्या और खुदकुशी के विचार जैसे कलंक को समाप्त करने की ओर पहला कदम होगा बल्कि यह लोगों को भी इस समस्या को रोकने के लिए आगे आने में मदद करेगा। बहुत सारे देशों में, जो पहले ब्रिटिश कालोनी रह चुके हैं, खुदकुशी कानूनी अपराध माना जाता है जो कि पुराने अंग्रेजी विधान पर आधारित हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि अतीत के इन कानूनी खामियों से नाता तोड़कर एक साहसिक कदम उठाया जाए और आने वाली सदी को बेहतर बनाया जा सके। कष्टों और पीड़ा से जूझ रहे ऐसे लोग जो आत्महत्या करने की सीमा तक पहुंच जाते हैं, उन्हें भी इलाज और सहयोग पाने का अधिकार है। आत्महत्या के मामलों में सजा मिलने के डर के कारण लोग किसी से भी सहयोग या सहायता मांगने से हिचकते हैं और इसी कारण ऐसी घटनाओं की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। इसका मतलब यह हुआ कि सरकारें भी इस समस्या की गंभीरता से अनजान है और इसीलिए इसे रोकने के लिए उनके पास कोई कारगर उपाय नहीं है। यही कारण है कि गुयाना, जहां आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, इसे कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर सहमत होते हुए आत्महत्या निवारण विधेयक 2022 को पास किया जिसमें न केवल आत्महत्या को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया बल्कि इसे रोकने के उपायों का भी प्रावधान किया गया है। आज गुयाना में आत्महत्या रोकने के लिए पूरे देश में जगह-जगह केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। गुयाना के इन प्रयासों ने सेंट लूसिया, बहामास और सुरीनाम जैसे द्वीपीय और विकासशील देशों को भी खुदकुशी को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी वर्ष ब्रीजटाउन घोषणापत्र पर द्वीपीय और विकासशील देश ने हस्ताक्षर किए हैं जिसमें स्वास्थ्य संबंधी कानूनों में संशोधन और खुदकुशी को गैर कानूनी बनाने की बात कही गई है। घाना ने भी मार्च 2023 को इसे कानूनी दायरे से बाहर कर दिया। केन्या और युगांडा में भी इसे लेकर याचिकाएं दायर हो रही हैं। मलेशिया ने भी इसी वर्ष कानून बनाकर इसे सजा के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। बांग्लादेश ने भी इस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पहल को समर्थन दे रहा है। आत्महत्या के 77 फीसदी मामले कम और मध्य आय वाले देशों में होते हैं।
आत्महत्या अपराध नहीं है बल्कि मानव अधिकार है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अब समय आ गया है कि खराब मानसिक स्वास्थ्य को दण्ड देने की बजाय दुनिया उन लोगों की मदद करें जो दुखों के कारण आत्महत्या करने को प्रेरित होते हैं।

This article is a Hindi translation of news published in Al Jazeera news portal. Read the source here. Click the link below 👇👇👇

https://www.aljazeera.com/opinions/2023/9/10/from-ghana-to-guyana-hope-mounts-in-fight-against-suicide-criminalisation?sf181679475=1

हत्यारा सांड़


शीर्षक पढ़कर आपको अजीब लगा होगा। भला सांड़ निर्लज्ज कैसे हो सकता है। आज के पोस्ट में आपको प्राचीन ग्रीस से जुड़ी इस किदवंती के बारे जानकारी प्राप्त होगी कि प्राचीन समय में मृत्यु दण्ड देने के लिए कितने भयावह तरीके अपनाए जाते थे।

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दरअसल बेशर्म साड़ मिस्र में मृत्यु दण्ड देने वाला एक भयानक यातना यंत्र था। यह पीतल धातु से बनी और अंदर से खोखली सांड़ की आकृति थी। इस यंत्र में दंड पाए हुए व्यक्ति को बैल के अंदर कैद कर दिया जाता था और फिर इसके नीचे आग जला दी जाती थी। धीरे धीरे यह यंत्र गर्म होता रहता था जिससे यंत्र के अंदर कैद व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो जाती थी। इस सांड़ के पेट के अंदर, जहां सजा पाए हुए कैदी को कैद किया जाता था, नलिकाएं लगी थी जिससे राजा मरने वाले व्यक्ति की चीख पुकारों को सुन सके।

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इस यंत्र का प्रयोग अपराधियों और राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को दंड देने के लिए किया जाता था। मृत्यु दंड देने का इससे क्रूर तरीका इतिहास में खोजे नहीं मिलता। हालांकि किसी भी तरीके से यह सत्य प्रतीत नहीं होता और मनगढ़ंत कहानी लगती है। लेकिन फिर भी इसे सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता।


यह दंतकथा एथेंस के पेरिलोस से शुरू होती है। एथेंस के प्रांत सिसली में एक्रागास नामक इलाके में फलारिस नाम का एक शासक था। इसको एथेंस के एक नागरिक पेरिलोस ने पीतल की धातु से बना हुआ सांड़ के आकार जैसा एक यातना (कष्ट) देने वाला यंत्र दिया था। पेरिलोस ने दावा किया कि मृत्यु दण्ड देने का यह एक मानवीय तरीका होगा लेकिन वास्तविकता में तो यह अन्य पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा क्रूर और पाशविक थी।
बताया जाता है कि फलारिस मृत्यु दण्ड देने के इस नए तरीके से इतना प्रभावित हुआ कि उसने इस यंत्र का पहला प्रयोग पेरिलोस पर ही करने का आदेश दे दिया। फिर क्या था, पेरिलोस को धातु से बने इस सांड़ के अंदर कैद कर दिया गया लेकिन जल्द ही पेरिलोस को अहसास हो गया कि उसका सुझाया हुआ मृत्यु दण्ड का तरीका उतना मानवीय और सभ्य नहीं है जितना कि उसने दावा किया था। उसने फलारिस से क्षमा याचना की लेकिन फलारिस ने दया नहीं दिखाई और इस प्रकार इस यंत्र का पहला शिकार यंत्र को बनाने वाला ही हो गया।


पेरीलोस की इस भयावह मृत्यु की जानकारी सबसे पहले डायोडोरस सिकुलस नाम के व्यक्ति ने उसकी मृत्यु की सालों बाद दी थी। फलारिस ने बहुत सारे लोगों को, जिनको वह अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता था, इसी तरीके से मृत्यु दण्ड दिया था। बहुत सारे स्रोत बताते हैं कि बाद में इस यंत्र को प्राचीन रोम के कई शासकों ने अपनाया था।

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एशिया को जंग का मैदान नहीं बनने देंगे।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने एशिया प्रशांत के देशों से अपील की है कि उन्हें विदेशी शक्तियों के हाथों का खिलौना नहीं बनना चाहिए। एशियान संगठन के सदस्य देशों के बीच एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणपूर्वी अर्थव्यवस्थाओं को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहिए।

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दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन एशियान की बैठक को संबोधित करते हुए सदस्य देशों से अपील की कि वे आपसी संघर्षों तथा मतभेदों को दूर करें तथा एकजुट होकर न्यायोचित और पारस्परिक लाभप्रद सहयोग के लिए कार्य करें। उन्होंने आगे कहा कि एशियान के सदस्य राष्ट्र इस बात पर सहमत हैं कि वे किसी भी ताकतवर देश के हाथ की कठपुतली बनकर इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र नहीं बनने देंगे, क्योंकि यह विध्वंसक होगा

उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र का नेतृत्व करना होगा और शांति, स्थिरता तथा समृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। एशियाई देशों के बीच बढ़ रही प्रतिद्वंदिता और इसके विनाशकारी परिणामों को लेकर उन्होंने सचेत किया है। एशियाई देशों में सहयोग बढ़ाने के लिए उन्होंने एक योजना तैयार करने की भी बात कही, जो प्रासंगिक हो और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप हो।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख प्रबोवो शुबियांतो अमेरिकी रक्षा प्रमुख से मुलाक़ात करने अमेरिकी दौरे पर गए हुए हैं जहां अमेरिका की ओर से मीडिया को संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है जिसमें चीन और रूस के खिलाफ बातें कही गई है

हालांकि बाद में शुबियांतो ने इस वक्तव्य से दूरी बनाते हुए कहा कि इंडोनेशिया दोनों देशों के साथ दोस्ताना संबंध चाहता है। उन्होंने कहा कि कोई संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया गया है और ना ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ है। मैं सिर्फ इस बात पर बल देना चाहता हूं कि चीन के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं। दोनों देश एक दूसरे का सम्मान करते हैं और उनके बीच पारस्परिक समझ भी अच्छी है। इस समय मैं अमेरिका में हूं लेकिन मैं रुस के साथ भी दोस्ती चाहता हूं।
इस समय यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनातनी है तथा समय-समय पर अमेरिका और चीन के बीच भी रह रह कर विवाद गहराता रहता है। इंडोनेशिया के रक्षा प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में वह रूस और चीन, दोनों देशों का दौरा करेंगे


शीत युद्ध की छाया में एशियाई देशों के संगठन एशियान की स्थापना हुई थी और वर्तमान में इसमें 10 सदस्य देश शामिल है जिनकी कुल आबादी 600 मिलियन है। आर्थिक सहयोग इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। इसी सप्ताह के दौरान एशियाई देश पूर्वी एशिया सम्मेलन में फिर मिलेंगे जिसमें रूस चीन भारत जापान और अमेरिका भी शामिल होंगे

👉👉 यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


https://www.rt.com/news/582446-indonesia-asean-destructive-rivalry/


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मनमोहन सिंह ने की मोदी सरकार की तारीफ

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारत ने किसी भी देश का पक्ष न लेकर, और अपने देश के हितों को आगे रखकर सही कदम उठाया है।

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यह कहना है पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। शुक्रवार को अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। भारत में चल रही जी 20 देशों की बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था के निर्धारण में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यूक्रेन के मामले में भारत सरकार ने रणनीतिक तटस्थता की नीति अपनाते हुए पश्चिमी देशों की इस अपील को खारिज कर दिया कि वह रूस के साथ अपने सारे व्यापारिक संबंधों को तोड़ ले। अपनी इस नीति के तहत भारत ने पश्चिमी देशों से मधुर संबंध बनाते हुए रूस से ईंधन, तेल, कोयला और भारी उपकरण का व्यापार कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सफलता हासिल की है।
सिंह ने आगे कहा कि जब दो ताकतवर देशों के बीच संघर्ष चल रहा हो तो ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना किसी भी देश के लिए बड़ा मुश्किल होता है। शांति की अपील करते हुए मनमोहन सिंह ने भारत के पक्ष को सही ठहराया। वह वर्ष 2004 से 2014 के बीच में भारत के प्रधानमंत्री थे।
पिछले वर्ष फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मोदी कई बार यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर चुके हैं। अपनी बातचीत में मोदी ने कहा था कि विश्व शांति के लिए उनका देश जो कुछ भी कर सकता है, उसके लिए वह तैयार हैं। मनमोहन सिंह ने कहा आगे कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तथा चीन और पश्चिमी देशों के बीच में आए दरार के कारण वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अब बदल चुकी है। नई वैश्विक व्यवस्था को बनाने में भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आजादी के बाद संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए एक बड़े और शांतिप्रिय लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को आज दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है। भारत इस वर्ष जी 20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है, और जिसकी बैठक नई दिल्ली में चल रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है जी 20 की बैठक में रूस यूक्रेन युद्ध के समाधान पर चर्चा नहीं होगी बल्कि इसकी जगह जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ऋण संकट जो इस समय की विकासशील देशों की मुख्य समस्या है, चर्चा का मुख्य केंद्र होगा।
मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष चल रहे हैं और इन सभी का समाधान कूटनीति तथा बातचीत के जरिए होना चाहिए। जी 20 के सदस्य देश के रूप में या बिना जी-20 के हमारे देश का रुख भी यही होना चाहिए क्योंकि एक बंटा हुआ विश्व किसी भी चुनौती का सामना नहीं कर सकता।


यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


https://www.rt.com/india/582606-india-neutral-stance-ukraine/


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तो क्या एलन मस्क ने रोक दिया परमाणु युद्ध

पिछले वर्ष परमाणु युद्ध के डर से एलन मस्क ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए यूक्रेन के हमले को रोक दिया था। यह दावा किया गया है एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स और टेस्ला पर लिखी गई एक पुस्तक में जो में, जो शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है

Elon Musk image courtesy Russia Today


रूसी सेना के एक फ्लीट पर जब यूक्रेन ड्रोन हमला करने वाला थे, उसी समय स्टार लिंक और स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क ने कंपनी के कर्मचारियों को सिग्नल बंद करने का आदेश दे दिया था। पिछले वर्ष जब यूक्रेनी सेना ने रूसी सेना की एक टुकड़ी पर हमला करने के लिए ड्रोन भेजे तो बीच रास्ते में ही इनका संपर्क टूट गया। वाल्टर इजाकसन की लिखी पुस्तक जो अगले सप्ताह प्रकाशित होगी, में यह दावा किया गया है।

इसमें कहा गया है कि एलन मस्क ने गुप्त तरीके से स्पेस एक्स के इंजीनियरों को क्रीमिया के आसपास के इलाकों में स्टार लिंक के सिग्नल को बंद करने का आदेश दिया था। मस्क को डर था कि यूक्रेनी हमले के जवाब में रूस मिनी पर्ल हार्बर जैसा परमाणु हमला कर देगा। पुस्तक में यह दावा भी किया गया है कि यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफार्मेशन मिनिस्टर मिखाइल फेदरोव ने मस्क को संदेश भेजकर पुनः सिग्नल शुरू करने का अनुरोध किया था जिसे मस्क ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यूक्रेन युद्ध में हद से आगे बढ़ रहा है और अपनी रणनीतिक हार को न्योता दे रहा है। इस असफल ड्रोन हमले की ख़बर सबसे पहले अमेरिकी समाचार पत्र न्यू यॉर्क टाइम्स में जुलाई में प्रकाशित की गई थी हालांकि इसमें सभी घटनाओं का जिक्र नहीं किया गया था। जुलाई 2022 से अब तक स्पेस एक्स ने कीव को बीस हजार से अधिक स्टार लिंक के सिग्नल सर्विस स्टेशन दिए हैं ताकि यूक्रेनी नागरिकों को इंटरनेट और संचार सुविधाएं मिल सकें। इजाकसन ने पुस्तक में मस्क की बातचीत का एक अंश प्रकाशित किया है जिसमें मस्क कह रहे हैं कि वह इस युद्ध में कहां शामिल हैं? स्टार लिंक को किसी युद्ध का हिस्सा बनने के लिए नहीं बनाया गया है। यह इसलिए बनाया गया है ताकि लोग नेटफ्लिक्स जैसी सेवाओं का आनंद ले सकें, आनलाइन स्कूल की सुविधा उठा सकें। किसी ड्रोन हमले को सफल बनाने के लिए इसे नहीं बनाया गया है।
क्रीमिया पर इस असफल हमले के बाद मस्क ने पेंटागन से कहा था कि अब स्टार लिंक यूक्रेन को अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करेगा, क्योंकि उनके और पेंटागन के बीच की बातें समाचार चैनल सीएनएन को लीक हो रहीं थीं। हालांकि बाद में मस्क ने ट्वीट कर यूक्रेन में स्टार लिंक की सेवाएं जारी रखने की बात कही थी।
इजाकसन प्रसिद्ध समाचार पत्रिका टाइम के संपादक रह चुके हैं। इसके अलावा वह तुलान विश्व विद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर हैं और बेंजामिन फ्रैंकलिन, अल्बर्ट आइंस्टीन, हेनरी किसिंजर और स्टीव जॉब्स जैसी महान हस्तियों की जीवनी भी लिख चुके हैं।

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यह लेख Russia Today नामक एक News Channel पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


https://www.rt.com/news/582543-musk-starlink-crimea-attack/


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गर्भवती आदमी: जब आदमी ने जन्म दिया लड़के को। नागपुर की घटना

संजू भगत को देखकर उनके पड़ोसी उन पर हंसा करते थे क्योंकि उनका पेट बहुत अधिक बाहर की निकला हुआ था, देखकर लगता था कि जैसे उनके पेट में बच्चा हो। लेकिन लोगों की प्रतिक्रिया की परवाह न करते हुए उन्होंने अपनी इस शारीरिक कुरुपता को रूपए कमाने का जरिया बना लिया।

इमेजिन गूगल से साभार


संजू भगत का जन्म 1963 में नागपुर में हुआ था। बचपन में उनके शरीर में किसी भी प्रकार की असमान्यता के लक्षण नहीं थे। संजू भगत का परिवार एक गरीब परिवार था संजू भगत अपने खेतों में काम करते और जब वह 20 वर्ष के हुए तब उनका पेट बढ़ना शुरू हुआ। जब संजू भगत की उम्र 30 वर्ष की हुई तो लोग उन्हें गर्भवती आदमी कहकर उनको चिढ़ाते थे। अब संजू भगत के परिवार के लोगों को उनकी चिंता सताने लगी और उन्होंने संजू से कई बार कहा कि वह अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह मशवरा करें। धीरे-धीरे संजू भगत का पेट बाहर की ओर निकलता रहा और इतना बढ़ गया कि उनको सांस लेने में कठिनाई होने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर संजू भगत को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें एक अजीबोगरीब बात पता चली। डॉक्टरों के अनुसार संजू भगत ना तो पेट से थे और ना ही उनके पेट में कोई ट्यूमर था। संजू भगत के पेट में उनका जुड़वा भाई था। 1999 में जब संजू अस्पताल पहुंचे तो उस दिन अजय मेहता नाम के डॉक्टर ड्यूटी पर थे। ऑपरेशन के दौरान संजू के पेट से एक दूसरा इंसान निकाला। यही नहीं उनके पेट के अंदर से बहुत सारे मानव अंग निकले जैसे की बाल, हड्डियां, महिला जननांग इत्यादि। डॉक्टर इस घटना से आश्चर्यचकित थे और अंग्रेजी में इस घटना को vanishing twin syndrome कहा जाता है। वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम में जुड़वा या ज्यादा बच्चे होने पर, एक बच्चा गर्भ में ही मर जाता है। इसकी वजह से एक भ्रूण गायब हो जाता है या दूसरा बच्चा, मल्टीपल, प्लेसेंटा इसे आंशिक या पूर्ण रूप से सोख लेता है। इसका पहला मामला 1945 में सामने आया था।
यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
https://www.historydefined.net/sanju-bhagat/
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सांपों का संसार द्वीप

अटलांटिक महासागर के नीले जल विस्तार और प्रकृति की सुंदरता के बीच एक रहस्य भी छिपा हुआ है। यह रहस्य है सांपों का द्वीप। जी हां, दुनिया का वह हिस्सा जो सबसे ख़तरनाक और भयानक माना जाता है। इस टापू पर दुनिया के खतरनाक सांप रहते हैं।

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ब्राजील के समुद्री तट पर स्थित इस निर्जन टापू के पत्थरों के नीचे एक रहस्य छिपा हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच इस टापू की वनस्पतियों में लाखों जहरीले सांप सरकते हुए दिखाई देते हैं जो हर वक्त हमला करने के लिए तैयार रहते हैं। दुनिया का सबसे जहरीला सांप गोल्डन लांसहेड है जिसके काटने पर मनुष्य एक घंटे से अधिक जीवित नहीं रह सकता है।
इल्ह दा क्विमिदा ग्रैंडी द्वीप जिसे सांपों का द्वीप भी कहा जाता है, देखने में जितना मनमोहन है उतना ही खतरनाक भी है। यह ब्राजील के दक्षिण पूर्वी तट स्थित साओ पालो द्वीप से 33 किमी दूर है।

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अटलांटिक महासागर में स्थित यह द्वीप आकार में केवल 430000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। और सांपों की संख्या का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हर 11 फीट की एक सांप रहता है।
यह लेख History Defined नामक एक ब्लाग पर प्रकाशित अंग्रेजी लेख का हिंदी रूपांतरण है। इसका अंग्रेजी संस्करण आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
https://www.historydefined.net/snake-island/
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