कल्कि करेंगे संहार

पौराणिक मान्यतानुसार भगवान विष्णु के दसवें व अंतिम अवतार भगवान कल्कि के इस धरा पर अवतरण होने का समय चल रहा है। प्रभु कल्कि का प्रकट होना अभी शेष है। ग्रंथों में कलियुग के अंतिम चरण में कल्कि अवतार के आने की भविष्यवाणी की गई है। लेकिन कलयुग के समयकाल को लेकर विद्वानों में मतभेद है। अभी कलयुग का कौन सा चरण चल रहा है किसी को कुछ नहीं पता।

हालांकि भगवान कल्कि की सम्भावित जन्मतिथि श्रावण शुक्ल षष्ठी को कल्कि जयंती के रूप में मनाने का प्रचलन भी है। एक मान्यता के अनुसार जब कलयुग अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु अपने 64 कलाओं से युक्त दसवें अवतार भगवान कल्कि अवतार के रूप में इस पृथ्वी पर अवतरित होंगे और कलयुग का अंत कर एक नई सृष्टि का सृजन कर मनुष्य को सनातन वैदिक धर्म पर आरूढ़ कराएंगे।


भगवान विष्णु का यह अवतार निष्कलंक अवतार होगा। कल्कि भगवान का स्वरूप अर्थात सगुण रूप परम दिव्य होता है। वे श्वेत अश्व पर सवार हैं, उनका रंग गोरा है जो क्रोध में काला हो जाता है। पीले वस्त्र धारण किए उनके हृदय पर श्रीवत्स का चिह्न अंकित होगा और गले में कौस्तुभ मणि होगी। उनके हाथों में दो तलवारें होंगी।


कलयुग के घोर अंधकार के युग में जब लोग धर्म और विश्वास को नजर अंदाज़ कर देते हैं और अपनी भौतिकवादी महत्वाकांक्षा और लालच में अपने उद्देश्य को भूल जाते हैं तब भ्रष्ट राजाओं की हत्या के बाद, भगवान कल्कि मनुष्यों के दिलों में भक्ति का भाव जगाएंगे। लोगों को धर्म के मार्ग का अवलंबन और शुद्धता का पालन करना सिखाएंगे ताकि सनातन वैदिक धर्म पर लोगों का विश्वास पुनः वापस आ जाए।
कल्कि अवतार की भविष्यवाणी कई सदियों से हिंदुओं के बीच लोकप्रिय है। कई लोग मानते हैं कि कल्कि का अवतार हो चुका है और वे दुनिया में शांति और समृद्धि स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कल्कि का अवतार अभी तक नहीं हुआ है और वे भविष्य में अवतार लेंगे।

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