कश्मकश इस जिंदगी की
मिटती नहीं ऐ दोस्त
सुपुर्द ए खाक हो जाउंगा
लड़ते लड़ते एक रोज।

कहां कम है, मेरा जुनून
कभी आजमा के तो देख
हारता हूं, पर हारा नहीं मैं।
मेरे इरादे हैं बड़े नेक।
नहीं मलाल है, तेरी शोहरतों का
मैं एक इंकलाब हूं ऐ दोस्त
जिंदा रहकर देखूंगा सब कुछ
सागर की तरह बनकर खामोश।