कैसे दिन बीते कोई जतन बता जा

जीवन में जब ऐसे पल आते हैं कि आदमी बेवश हो जाता है और उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं देती तो ऐसे आदमी को क्या करना चाहिए। मुझे नहीं मालूम। पता नहीं कितने लोगों के जीवन में ऐसा घटित होता होगा। मेरे जीवन में कुछ ऐसा ही चल रहा है। लेकिन इससे मुझे एक सीख मिल रही है कि जीवन में कितना भी भयंकर कष्ट हो, कितनी भी बड़ी मुसीबत आए, कभी नाउम्मीद नहीं होना चाहिए। गौर से देखने पर पाता हूं कि जिन मुसीबतों को देखकर हिम्मत टूट रही है वो तो अभी आयी ही नहीं हैं। ये तो मन की चाल है जो यह डर दिखाता है कि तुम्हारा समय कैसे बीतेगा। लेकिन डर तो लगता ही है साहेब। अब इस डर से हाथ पैर पटकने का मतलब है कि साहस को कमजोर करना।

गूगल

फिर दिल कहता है ये जीवन तो एक तमाशा है यार। यह कितनी अच्छी बात है। दिल और आत्मा को सुकून देती है। अब इस तमाशे को कैसे झेलना है‌‌। जिन्हें भगवान या नसीब ने या उनकी अपनी मेहनत ने कुछ दिया है वे उन लोगों का तमाशा बनाते हैं जो अपनी जिंदगी से पहले ही परेशान चल रहे हैं। ताने मारने से लेकर नीचा दिखाने तक की कोशिशें की जाती हैं उस इंसान के लिए जिसे उसकी जिंदगी ने ही जलील कर दिया है। आजकल तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है।

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