उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग अधिकांशत ट्रेन से सफर करता है। यह ट्रेन बहुत ही आलीशान है और इसमें सुख सुविधा के सभी साधन मौजूद हैं। हरे रंग की इस रेलगाड़ी के पास हमेशा एक हेलीकॉप्टर मौजूद रहता है ताकि किसी भी अनहोनी के घटित होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
इसी ट्रेन से वह कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने पहुंचा। 2011 में सत्ता पर काबिज होने के बाद किम जोंग उन ने अधिकांश यात्राएं इसी ट्रेन से तय की है। इसी ट्रेन पर पीली पट्टी के साथ वह दो बार दक्षिण कोरिया भी जा चुका है।

वर्ष 2018 में चीन की यात्रा और वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई बैठक में शामिल होने के लिए भी उसने इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया था। तानाशाह के परिवार का ट्रेनों से गहरा लगाव है। यह जगजाहिर है कि इसके पिता किम जोंग द्वितीय हवाई यात्राओं से डरते थे। इसी लिए उन्होंने अपनी विदेशी यात्राओं में कटौती करते हुए केवल दो देशों, रूस और चीन, की यात्रा करते थे, वह भी सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्थाओं से सुसज्जित ट्रेन द्वारा। वर्ष 2001 में इन्होंने प्योंगयांग से मास्को की, लगभग 20000 किलोमीटर की लंबी यात्रा भी ट्रेन से ही तय की थी जिसमें इसे 24 दिन लगे थे।
कोरिया के आधिकारिक बयानों के अनुसार 2011 में किम जोंग द्वितीय जब ट्रेन पर सवार होकर निरीक्षण कर रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हो गई थी। रेल के उन डिब्बों को जिनमें किम जोंग द्वितीय और इनके पिता तथा उत्तरी कोरिया के संस्थापक किम सुंग द्वितीय यात्रा किया करते थे उन्हें प्योंगयांग के कुमसुजान मेमोरियल पैलेस में प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है। प्योंगयांग की एक फैक्ट्री में एक जैसी मिलती-जुलती कई ट्रेनें किंम जोंग ने बनवा रखे हैं। उत्तर कोरियाई सरकार के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन में बुलेट प्रूफ खिड़कियां लगी हुई हैं और इसकी दीवारों तथा फर्श को इतना मजबूत बनाया गया है कि शक्तिशाली विस्फोटकों का भी इस पर कोई असर नहीं होगा। किम जोंग द्वारा प्रयोग में ली जा रही इस ट्रेन को चलायमान किला भी कहा जाता है।

यह ट्रेन अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इसमें एक हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि जिन ट्रैक से यह गुजरेगी वहां सुरक्षा गार्ड्स तैनात रहेंगे जैसा कि हनोई यात्रा के समय किया गया था। इस ट्रेन में साजो सामान की संख्या अधिक होने के कारण इसकी गति बहुत अधिक नहीं है। इसकी गति महज 55 किलोमीटर प्रति घंटा है। किम जोंग-उन जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गया था तो इसे कुल 65 घंटे की यात्रा करनी पड़ी थी। इस ट्रेन में सभी प्रकार के व्यंजनों की सुविधा है तथा उच्च तकनीकी एवं संचार सुविधाएं भी मौजूद हैं।

किम जोंग उन अपने पिता की तरह हवाई यात्रा से डरता नहीं है। हवाई यात्रा के लिए वह स्पेशल प्लेन का प्रयोग करता है। अपने इसी विशेष प्लेन से वह दो बार चीन तथा एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है। किम जोंग के इस विशेष प्लेन का नाम उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय पक्षी चैमाई के नाम पर रखा गया है इसका निर्माण शीत युद्ध के दौरान एक रूसी कंपनी के द्वारा किया गया था।
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