शीर्षक पढ़कर आपको अजीब लगा होगा। भला सांड़ निर्लज्ज कैसे हो सकता है। आज के पोस्ट में आपको प्राचीन ग्रीस से जुड़ी इस किदवंती के बारे जानकारी प्राप्त होगी कि प्राचीन समय में मृत्यु दण्ड देने के लिए कितने भयावह तरीके अपनाए जाते थे।

दरअसल बेशर्म साड़ मिस्र में मृत्यु दण्ड देने वाला एक भयानक यातना यंत्र था। यह पीतल धातु से बनी और अंदर से खोखली सांड़ की आकृति थी। इस यंत्र में दंड पाए हुए व्यक्ति को बैल के अंदर कैद कर दिया जाता था और फिर इसके नीचे आग जला दी जाती थी। धीरे धीरे यह यंत्र गर्म होता रहता था जिससे यंत्र के अंदर कैद व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो जाती थी। इस सांड़ के पेट के अंदर, जहां सजा पाए हुए कैदी को कैद किया जाता था, नलिकाएं लगी थी जिससे राजा मरने वाले व्यक्ति की चीख पुकारों को सुन सके।

इस यंत्र का प्रयोग अपराधियों और राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को दंड देने के लिए किया जाता था। मृत्यु दंड देने का इससे क्रूर तरीका इतिहास में खोजे नहीं मिलता। हालांकि किसी भी तरीके से यह सत्य प्रतीत नहीं होता और मनगढ़ंत कहानी लगती है। लेकिन फिर भी इसे सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता।
यह दंतकथा एथेंस के पेरिलोस से शुरू होती है। एथेंस के प्रांत सिसली में एक्रागास नामक इलाके में फलारिस नाम का एक शासक था। इसको एथेंस के एक नागरिक पेरिलोस ने पीतल की धातु से बना हुआ सांड़ के आकार जैसा एक यातना (कष्ट) देने वाला यंत्र दिया था। पेरिलोस ने दावा किया कि मृत्यु दण्ड देने का यह एक मानवीय तरीका होगा लेकिन वास्तविकता में तो यह अन्य पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा क्रूर और पाशविक थी।
बताया जाता है कि फलारिस मृत्यु दण्ड देने के इस नए तरीके से इतना प्रभावित हुआ कि उसने इस यंत्र का पहला प्रयोग पेरिलोस पर ही करने का आदेश दे दिया। फिर क्या था, पेरिलोस को धातु से बने इस सांड़ के अंदर कैद कर दिया गया लेकिन जल्द ही पेरिलोस को अहसास हो गया कि उसका सुझाया हुआ मृत्यु दण्ड का तरीका उतना मानवीय और सभ्य नहीं है जितना कि उसने दावा किया था। उसने फलारिस से क्षमा याचना की लेकिन फलारिस ने दया नहीं दिखाई और इस प्रकार इस यंत्र का पहला शिकार यंत्र को बनाने वाला ही हो गया।
पेरीलोस की इस भयावह मृत्यु की जानकारी सबसे पहले डायोडोरस सिकुलस नाम के व्यक्ति ने उसकी मृत्यु की सालों बाद दी थी। फलारिस ने बहुत सारे लोगों को, जिनको वह अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता था, इसी तरीके से मृत्यु दण्ड दिया था। बहुत सारे स्रोत बताते हैं कि बाद में इस यंत्र को प्राचीन रोम के कई शासकों ने अपनाया था।
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