चापलूस दलालों की
अब होती जय जय कार है
इसीलिए इस दुनिया का
अब हो रहा सत्यानाश है।
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बेच रहे ईमान सरासर
पाप सभी स्वीकार है
इंसा का इंसा पर अब तो
नहीं रहा ऐतबार है।
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चारो ओर है अंधियारा
बढ़ रहा अत्याचार है
शांति सौहार्द की आस नहीं
दुनिया कितनी लाचार है।
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