हौसला आफजाई

आज के दौर में जब मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं और इंसान परेशान है, तो उसके मनोबल और हिम्मत को बढ़ाने के लिए कवियों और साहित्यकारों से बड़ा साथी कोई हो नहीं सकता। निदा फ़ाज़ली का शेर है

मन बैरागी, तन अनुरागी,

क़दम-क़दम दुश्वारी है

जीवन जीना सहज ना जानो,

बहुत बड़ी फ़नकारी है।

साहित्यकार श्रीकांत वर्मा का कथन है कि……

“जब इंसान अपने दर्द को ढो सकने में असमर्थ हो जाता है तब उसे एक कवि की ज़रूरत होती है, जो उसके दर्द को ढोए अन्यथा वह व्यक्ति आत्महत्या कर लेगा।”

तो आइए पढ़ते हैं प्रसिद्ध साहित्यकारों की हौसला आफजाई करने वाली कुछ कालजयी पंक्तियों को।

जीवन का अंतिम सत्य

क्या हार में क्या जीत में,

किंचित नहीं भयभीत मैं,

संघर्ष पथ पर जो मिले,

यह भी सही वह भी सही।

शिवमंगल सिंह सुमन

दाँव पर सब कुछ लगा है,

रुक नहीं सकते

टूट सकते हैं मगर

हम झुक नहीं सकते।

अटल बिहारी बाजपेई

वह पथ क्या

पथिक कुशलता क्या

जिस पथ पर बिखरे शूल न हों

नाविक की धैर्य परीक्षा क्या

जब धाराएँ प्रतिकूल न हों।

जय शंकर प्रसाद

साधो ये मुरदों का गाँव

पीर मरे पैगम्बर मरिहैं,

मरिहैं जिन्दा जोगी

राजा मरिहैं परजा मरिहैं,

मरिहैं बैद और रोगी

चंदा मरिहैं सूरज मरिहैं,

मरिहैं धरणि अकासा

चौदहो भुवन के चौधरी मरिहैं,

इन्हूं की का आसा

नौहूं मरिहैं दसहूं मरिहैं,

मरिहैं सहज अठासी

तैंतीस कोट देवता मरिहैं

बड़ी काल की बाजी

नाम अनाम अनंत रहत है,

दूजा तत्व न होई

कहत कबीर सुनो भाई साधो,

भटक मरो मत कोई।

कबीर दास

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