भारत जैसे रूढ़िवादी समाज में सेक्स की चर्चा आज भी वर्जित या निषेध माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी चर्चा गुप्त रूप में होनी चाहिए। यहां तक कि ईश्वर भी सेक्स को अनुमोदित नहीं करता है। हालांकि हमारे वेदों और धर्म ग्रंथो में इसे लेकर कुछ और ही कहा गया है। खोजकर्ताओं के अनुसार पुराने युगों में न केवल इस पर चर्चा होती थी, बल्कि साफ तौर पर इसका प्रचलन था।
यहां कुछ उद्धरण प्रस्तुत हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार दीर्घात्मा नामक एक राजा खुले दरबार में महिलाओं के साथ यौन क्रीड़ा करता था। यहीं नहीं महाराजा रणजीत सिंह खुले आसमान के नीचे दूसरे लोगों की उपस्थिति में काम क्रीड़ा का आनंद उठाते थे। यही नहीं पुराने समय में घाटकानचुकी नामक एक खेल बहुत प्रसिद्ध था जिसमें लोगों के मनोरंजन के लिए कुछ पुरुष और महिलाएं खुल्लम-खुल्ला लोगों के सामने यौन क्रिया करते थे।

प्राचीन धार्मिक पुस्तकों के अनुसार गुरुकुल में सेक्स का औपचारिक ज्ञान बच्चों को दिया जाता था। उस समय गुरुकुल में समृद्ध और संपन्न घरों के बच्चों को अच्छा गृहस्थ आश्रम व्यतीत करने हेतु यौन क्रिया की शिक्षा दी जाती थी।
नारद मुनि ब्रह्म जी के पुत्र थे। इनका जन्म उस समय हुआ था जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री को ब्रह्म जी को समर्पित किया था।
महाभारत में वर्णित है उर्वशी ने अर्जुन से कहा था कि यदि कोई स्त्री सेक्स की इच्छा रखती है तो उसकी इच्छा पूरी की जानी चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता है तो इससे समाज का अंत हो जाएगा।
उलुपि की कहानी
अर्जुन की चार पत्नियों में से एक और कौरव्या की पुत्री उलुपि ने अर्जुन से कहा था कि यदि कोई पुरुष अपनी कामवासना को शांत करने के लिए किसी स्त्री के साथ रात व्यतीत करता है तो इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है।
ऋग्वेद में एक स्थान पर यम और यामी नामक भाई बहन की चर्चा आती है जिसमें यामी अपनी कामोत्तेजना के लिए यम की ओर उन्मुख होती है।
आदिपर्व में भी कहा गया है कि कामवासना अपराध नहीं है। यह प्रकृति द्वारा सृजित एक प्राकृतिक क्रिया है।
विशेषज्ञों की मानें तो कर्ण के द्वारा शासित प्रदेश अंगदेश में काम क्रीड़ा के लिए महिलाओं और बच्चों का व्यवहार होता था।
महाभारत के आदिपर्व के 63वें अध्याय में वर्णित है कि ऋषि पाराशर सत्यवती मत्स्यगंधा ने वैवाहिक जीवन के पहले ही संसर्ग किया था जिससे उन्हें वेद व्यास नामक पुत्र की प्राप्ति हुई जिन्होंने आगे चलकर महाभारत की रचना की।
प्राचीन ग्रंथ हरिवंश में कहा गया है कि ऋषि वशिष्ठ की पुत्री शतरूपा अपने पिता को ही अपना पति मानती थी और उनके साथ संबंध भी बनाती थी।
हिन्दू देवता इंद्र कई महिलाओं के साथ संबंध बनाने के लिए विख्यात हैं। हरि भविष्य के अनुसार उन्होंने अपने पौत्र की पत्नी वपुश्त्मा के साथ भी काम क्रीड़ा किए थे जिसके लिए उन्हें शापित भी होना पड़ा था।
महाभारत में जिक्र आता है कि एक बार स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी ने अर्जुन से सेक्स की मांग की थी जिस उसने ठुकरा दिया था और उर्वशी ने उसे एक वर्ष के लिए नपुंसक होने का श्राप दे दिया था।
हिन्दू धर्म में कामशास्त्र पर कामसूत्र नामक एक ग्रंथ की भी रचना की गई है जिसमें यौन क्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। महाभारत में यह भी कहा गया है कि पुरुष एक से अधिक महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बना सकता है और यह बुरा व्यवहार नहीं समझा जाना चाहिए। महाभारत में ही यह भी कहा गया है कि पुत्र की प्राप्ति हेतु एक महिला कई पुरुषों से सेक्स संबंध रख सकती है।
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